
हम भारतवासी बहुदेव उपासक हैं। लेकिन बहुदेववादी नहीं। प्रकृति दिव्य है। हम दिव्यता से आच्छादित हैं। जहां जहां आभा, प्रभा, सुभा और दिव्यता वहां वहां देवता। बहुदेव नीराजन हमारा स्वभाव है लेकिन शिव देव नहीं महादेव हैं। वे हजारों बरस से भारत के मन में रमते हैं। एक अकेले ही। एको रूद्र द्वितीयोनास्ति। भारत के कुछेक विद्वान रूद्र शिव को आयातित देवता मानते हैं।