जनजाति बहनों की यह कला देखेंगे तो दंग रह जाएंगे आप…

-वनवासी कल्याण परिषद ने जनजाति कला को दिया नया आयाम-राखी पर जनजाति बहनों ने बनाए जूट-कशीदे के कलात्मक उपहार-परिषद के उदयपुर अंचल का ‘इन बहनों से उन बहनों तक’ अभियान

उदयपुर। जूट का चश्मा कवर, जूट का ही मोबाइल कवर, हैंडबैग, शाॅपिंग बेग, पोटली, लेपटाॅप कवर, नोटपेड कवर, सभी जूट से निर्मित और उन पर खूबसूरती कशीदाकारी। एक से बढ़कर एक वनवासी अंचल की कला के नमूने, जिन्हें देखकर हर कोई अपने पास रखना चाहेगा। इन वस्तुओें को तैयार किया है राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद द्वारा प्रेरित नम्रता कौशल विकास केन्द्र की जनजाति बहनों ने।

परिषद ने इस बार उनकी कला को जन सामान्य तक पहुंचाने के लिए 16 से 20 जुलाई तक प्रदर्शनी व कार्यशाला का आयोजन रखा जिसमें कई जनजाति बहनें भाग ले रही हैं। यह कार्यशाला उदयपुर के सेक्टर-13 स्थित वनवासी कल्याण परिषद के कार्यालय में चल रही है। कोई भी सामान्यजन दोपहर 3 से 6 बजे तक प्रदर्शनी देख सकता है और खरीदारी भी कर सकता है।

परिषद की कार्यकारी अध्यक्ष राधिका लढ्ढा ने बताया कि इस प्रदर्शनी की थीम ‘इन बहनों से उन बहनों तक’ रखी गई है। आप अपनी बहन के लिए राखी का तोहफा खरीदिये, इसकी राशि उन जनजाति बहनों तक पहुंचेगी और उनकी कला के सम्मान के साथ उनकी आजीविका भी मजबूत होगी।

लढ्ढा ने बताया कि परिषद के सर्वांगीण विकास के बहुविध उद्देश्यों में एक आयाम वनवासी महिला सशक्तीकरण भी है। उनमें अन्तर्निहित सृजनशीलता व कलात्मकता को तराश कर, निखार कर उसे उत्पादक ऊर्जा में रूपांतरित करना जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो और आत्मविश्वास तथा आत्मसम्मान से अपने जीवन को सर्वांग सुंदर बना सके।

इन वस्तुओं की बिक्री के संदर्भ में लढ्ढा ने बताया कि फिलहाल परिषद से जुड़े कार्यकर्ता ही इन वस्तुओं को आमजन को बता रहे हैं। फिलहाल परिषद कार्यालय में ही ये वस्तुएं उपलब्ध हैं। कार्यकर्ताओं की मदद से ही इन्हें बाजार में पहुंचाने पर विचार चल रहा है।

इससे पूर्व, परिषद् द्वारा संचालित नम्रता कौशल विकास केन्द्र का उद्घाटन 16 जुलाई को प्रांतीय कार्यालय सेक्टर 13 हिरण मगरी में परिषद के प्रांत संगठन मंत्री  राजाराम भाई साहब, महामंत्री  गोपाललाल कुमावत, संरक्षक नक्षत्रलाल नागौरी, महिला कार्य प्रमुख  क्रांति माथुर ने मां भारती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।

राजाराम  ने उद्घाटन के मौके पर कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम 1978 से वनांचल में छिपी प्रतिभा को निखारने का काम कर रहा है, साथ ही यह केन्द्र इनको आत्म निर्भर भी बनायेगा। कार्यक्रम में सरला मूंदड़ा, कुसुम बोर्दिया, रेखा दीदी, सत्यनारायण लढ़ा, जगदीश कुलमी आदि उपस्थित रहे।