भुवनेश्वर। ओडिशा के बौद्ध जिले के हरभंगा प्रखंड के अंतर्गत अडेनीगढ़ गांव में शनिवार रात एक आंशिक रूप से लकवाग्रस्त व्यक्ति से एक जहरीला किंग कोबरा दो घंटे तक लिपटा रहा।
पीड़ित कृष्ण चंद्र साहू गहरी नींद में सो रहे थे, तभी सांप खुली खिड़की के रास्ते उनके घर में घुस आया और रेंगते हुए उनके शरीर पर चढ़ गया। अपनी शारीरिक स्थिति के कारण, सांप को देखने के बाद भी साहू तेजी से हिलने-डुलने या वहां से भागने में असमर्थ थे।
परिजनों के मुताबिक, किंग कोबरा ने जल्द ही उनके एक हाथ और पास रखी कुर्सी को कसकर जकड़ लिया, जिससे वे पूरी तरह बेबस हो गए। खुद को छुड़ाने में असमर्थ साहू डर और दर्द के मारे चिल्लाने लगे।
उनकी चीख-पुकार सुनकर परिवार के सदस्य तुरंत कमरे की तरफ भागे और उन्हें सांप की गिरफ्त में फंसा देखकर दंग रह गए। इस डर से कि कोई भी जल्दबाजी या अचानक की गयी हलचल कोबरा को भड़का सकती है। उन्होंने कोई बल प्रयोग नहीं किया और इसके बजाय बहुत सावधानी से सांप को शरीर से अलग करने की कोशिश में जुट गए।
तनाव से भरा यह बचाव अभियान करीब दो घंटे तक चला, जिसके बाद आखिरकार परिवार साहू को सुरक्षित छुड़ाने में कामयाब रहा। हैरान करने वाली बात यह रही कि इतनी लंबी अवधि के दौरानउन्हें सांप ने नहीं काटा। बाद में सांप को पकड़ लिया गया और बिना कोई नुकसान पहुंचाए उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
वन अधिकारियों को इस घटना की जानकारी दे दी गई है। उन्होंने निवासियों से मानसून के मौसम में सतर्क रहने का आग्रह किया है। इस मौसम में सांप अक्सर आश्रय और शिकार की तलाश में इंसानी बस्तियों में घुस आते हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे रात में दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें। अपने घरों के आस-पास सफाई बनाए रखें और ऐसी किसी भी स्थिति में तुरंत प्रशिक्षित सर्प संरक्षकों से मदद लें।
इस अजीबोगरीब घटना ने ओडिशा में बारिश के मौसम के दौरान इंसानों और सांपों के आमने-सामने होने की बढ़ती घटनाओं की ओर एक बार फिर ध्यान खींचा है। राज्य में देश भर में सर्पदंश से होने वाली मौतों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की जाती है, जहां सालाना लगभग 900 मौतें होती हैं।
समस्या की गंभीरता को देखते हुए ओडिशा सरकार ने एक अप्रैल 2015 से सर्पदंश से होने वाली मौतों को राज्य-विशिष्ट आपदा (स्टेट-स्पेसिफिक डिजास्टर) घोषित कर दिया था, और ऐसा दर्जा देने वाला वह देश का पहला राज्य बना था। इस कदम से पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा मिलना संभव हो सका और सर्पदंश के प्रति जागरूकता, रोकथाम व राहत के प्रयासों को मजबूती मिली।



