मुंबई/पुणे। त्वरित न्याय की नई मिसाल पेश करने वाले ऐतिहासिक फैसले में पुणे जिला एवं सत्र न्यायालय ने आज पुणे जिले के नसरापुर में साढ़े तीन वर्ष की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में भीमराव कांबले (65) को मौत की सजा सुनाई। इस अपराध को दुर्लभ से दुर्लभतम बताते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया, जिससे पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख देने वाले इस मामले में पीड़ित परिवार को न्याय मिल सका।
इस ऐतिहासिक फैसले का राजनीतिक जगत के तमाम नेताओं ने पुरजोर स्वागत किया है और इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे जिला एवं सत्र न्यायालय के फैसले की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत ने बेहद उचित फैसला सुनाया है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। ऐसे अमानवीय अपराध हमारे समाज में सुरक्षा की बुनियाद को कमजोर करते हैं, इसलिए यह बेहद जरूरी है कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिले।
वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने वीडियो संदेश में कहा कि यह फैसला कानून के शासन के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और पीड़ित परिवार के लिए न्याय की बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि एक मई को हुई इस घटना के तुरंत बाद उन्होंने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया था कि सरकार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। शिंदे ने कहा कि हमने संकल्प लिया था कि जब तक अपराधी को कानून के तहत अधिकतम सजा नहीं मिल जाती, हम चैन से नहीं बैठेंगे। आज अदालत के फैसले के साथ राज्य सरकार ने उस प्रतिबद्धता को पूरा किया है।
शून्य-सहिष्णुता की नीति पर जोर देते हुए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस तरह के अमानवीय अपराधों के लिए कोई माफी नहीं है। नसरापुर मामले में इतनी जल्दी दोषसिद्धि होना इस बात की मिसाल है कि कैसे प्रशासन और न्यायपालिका रिकॉर्ड समय में न्याय देने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।
सांसद सुप्रिया सुले ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह घटना एक काला अध्याय बनकर रहेगी। मृत्युदंड हालांकि इस मामले में बिल्कुल सही कानूनी जवाब है, लेकिन हमें व्यवस्थागत बदलावों के लिए अपनी आवाज बुलंद रखनी होगी। विकृत मानसिकता वाले लोगों में डर पैदा करने के लिए ऐसे अपराधियों को सबसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। हमारे बच्चों की सुरक्षा के लिए त्वरित न्याय हमारी प्राथमिकता है और हमेशा रहनी चाहिए।
भाजपा नेता चित्रा वाघ ने कहा कि यह फैसला ऐसे सभी अपराधियों के लिए कड़ी चेतावनी है। न्यायालय ने साफ संदेश दिया है कि इस तरह के अत्याचार करने वालों को कानून किसी भी कीमत पर नहीं बख्शेगा। न्यायपालिका ने ऐसे विकृत मानसिकता वाले का फन कुचलकर यह विश्वास फिर से जगाया है कि कानून ही कमजोरों का सबसे बड़ा रक्षक है।
गौरतलब है कि पुणे जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपराध के महज 60 दिनों के भीतर यह फैसला सुनाया है। हाल के वर्षों में बाल यौन उत्पीड़न के मामलों में यह सबसे त्वरित फैसलों में से एक है। विशेष न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसआर सालुंके ने आरोपी भीमराव कांबले को अपहरण, गंभीर यौन उत्पीड़न, दुष्कर्म और हत्या के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत चार दिन पहले दोषी ठहराया था और सोमवार को उसे फांसी की सजा दी।
अपनी टिप्पणी में न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी ने बच्ची की मौत के बाद भी उसके साथ यौन उत्पीड़न जारी रखा। उन्होंने गौर किया कि पीड़िता के शरीर पर चोट के 18 निशान थे, जो अदालत के अनुसार चरम क्रूरता को दर्शाते हैं।
घटना के 16 दिनों के भीतर पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने तेज गति से सुनवाई पूरी की। कार्यवाही के दौरान सरकारी वकीलों ने 55 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज कराए। अभियोजन पक्ष ने अपना मामला साबित करने के लिए फॉरेंसिक, मेडिकल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का सहारा लिया।
पुलिस की इस जांच में 1,200 पन्नों का आरोप पत्र शामिल था। न्यायमूर्ति सालुंके ने जांच अधिकारियों की सराहना की और इसे एक विस्तृत और पेशेवर जांच बताया। इसके साथ ही उन्होंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से मामले की पैरवी करने के लिए विशेष लोक अभियोजक की भी प्रशंसा की। इस अपराध की चरम क्रूरता ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया था।



