अमृतसर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सिख मर्यादा (आचार संहिता) और श्री अकाल तख्त साहिब के अधिकार के खिलाफ बार-बार आपत्तिजनक टिप्पणियां करने, गुरु की गोलक के खिलाफ टिप्पणियां करने और सिख गुरुओं वाले उनके आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के संबंध में गुरुवार को श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में अपना स्पष्टीकरण देने के लिए पेश हुए।
अकाल तक़्त सचिवालय में जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज के समक्ष उपस्थित होकर मुख्यमंत्री ने अपने पूर्व के बयानों पर विस्तृत स्पष्टीकरण देते हुए दोहराया कि वे श्री अकाल तक़्त साहिब की सत्ता में पूर्ण आस्था रखने वाले एक विनम्र सिख हैं, इसके द्वारा लिए गए प्रत्येक निर्णय को स्वीकार करते हैं और इसकी सर्वोच्चता को चुनौती देने या कमज़ोर करने का उनका कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
उपस्थिति के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मान ने कहा कि वह जत्थेदार साहिब के निर्देशों का पालन करते हुए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए हैं। उन्होंने कहा कि जत्थेदार साहिब के आदेशानुसार मैं एक विनम्र सिख के रूप में यहां उपस्थित हुआ और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया।
श्री अकाल तक़्त साहिब संपूर्ण सिख समुदाय के लिए सर्वोच्च प्राधिकरण है, और यह मेरे लिए भी सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि जत्थेदार साहिब ने उनका बयान दर्ज कर लिया है और सिंह साहिबानों से परामर्श के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मैं जत्थेदार साहिब के हर फैसले का पालन करूंगा। यहां उपस्थित होने से मुझे अपार संतोष, आंतरिक शांति और संतुष्टि मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लाखों लोगों की भावनाओं के प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने जत्थेदार साहब को 25,000 से 30,000 पन्नों की शिकायतें सौंपी हैं। उन्होंने कहा कि ये शिकायतें उन लोगों की भावनाओं को दर्शाती हैं जिन्होंने एसजीपीसी के कामकाज में विभिन्न अनियमितताओं को उजागर किया है। मैंने जत्थेदार साहब से विनम्रतापूर्वक इन शिकायतों की जांच कराने का अनुरोध किया है, क्योंकि लाखों लोगों की भावनाएं इनसे जुड़ी हैं। संस्थाएं सर्वोपरि होती हैं, जबकि उनके प्रमुख व्यक्ति गलती कर सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों को उनके कुकर्मों के लिए किसी प्रकार की नरमी नहीं मिलनी चाहिए।
विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन पर मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक कदम नहीं है। उन्होंने कहा कि एसआईटी का गठन केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के गुमशुदा स्वरूपों का पता लगाने के लिए किया गया है। इसका दायित्व केवल उनका पता लगाना है ताकि उनका दुरुपयोग न हो। उन्होंने कहा कि उन्होंने जत्थेदार साहिब से भी हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है ताकि एसजीपीसी को निर्देश दिया जा सके कि वह अपने द्वारा प्रकाशित प्रत्येक स्वरूप को आवंटित विशिष्ट कोड उपलब्ध कराए, जिससे गुमशुदा स्वरूपों का पता लगाने में सुविधा हो।
मीडिया से बात करते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि मुख्यमंत्री मान को उनके खिलाफ मिली शिकायतों के संबंध में बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के अधिकार को समर्पण की भावना से स्वीकार करते हुए श्री मान ने माना कि उन्होंने अतीत में कुछ गलत बयान दिए थे और सामने आए आपत्तिजनक वीडियो की फोरेंसिक जांच के लिए भी अपनी सहमति व्यक्त की।
जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि मान पंजाब सरकार के प्रमुख के रूप में एक संवैधानिक पद पर हैं और पद ग्रहण करते समय उन्होंने धर्मनिरपेक्ष रहने की शपथ ली थी। उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री राज्य में मौजूद सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व करता है और मुख्यमंत्री द्वारा अतीत में सिख परंपराओं, गुरु की गोलक के सिद्धांत, सिख मर्यादा, सिद्धांतों और आंतरिक मामलों के बारे में की गई टिप्पणियां अनुचित थीं और इनसे सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची।
जत्थेदार ने कहा कि मुख्यमंत्री को भविष्य में इस तरह से बात न करने की चेतावनी दी गई है। उन्होंने कहा कि मान द्वारा दी गई सफाई को रिकॉर्ड कर लिया गया है और पांच सिंह साहिबान की मीटिंग में इस पर विचार किया जाएगा। उन्होने मान को श्री अकाल तख्त साहिब की पंथ-मान्यता प्राप्त सिख रहत मर्यादा और मासिक गुरुद्वारा गजट मैगज़ीन की एक कॉपी भी खास तौर पर भेंट की, जिसमें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के आय-व्यय के बयानों का रिकॉर्ड छपता है, और उन्हें इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को पढ़ने और समझने की सलाह दी।
जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि मुख्यमंत्री ने माना कि उन्हें सिख रहत मर्यादा के बारे में जानकारी नहीं है और इसलिए उन्हें बिना सही समझ के मर्यादा के बारे में बयान देने से बचना चाहिए। मान से जुड़े वीडियो के बारे में, जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि मुख्यमंत्री से पंजाब सरकार की ओर से दो फोरेंसिक लैब के नाम सुझाने के लिए कहा गया है, जहां वीडियो की जांच की जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा सुझाई गई लैब के अलावा, श्री अकाल तख्त साहिब भी आपत्तिजनक वीडियो की स्वतंत्र रूप से फोरेंसिक जांच करवाएगा। उन्होंने कहा कि जो भी रिपोर्ट आएगी, उसे खालसा पंथ के सामने रखा जाएगा और उसी के अनुसार आगे फैसला लिया जाएगा।
जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक गद्दी है, जहां किसी के प्रति दुश्मनी या नफरत की भावना नहीं रखी जाती है, और जो भी यहां विनम्रता से आता है, उसकी बात सुनी जाती है। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने समुदाय को बातचीत और विचार-विमर्श से जोड़ा है, जिसके अनुसार श्री अकाल तख्त साहिब की परंपरा काम करती है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ पूरी बातचीत बहुत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और उन्होंने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि अगर कोई नेता जो उच्च संवैधानिक पद पर है, सिख परंपराओं और मर्यादा के खिलाफ कोई गलती करता है जिससे सिख भावनाओं को ठेस पहुंचती है, तो श्री अकाल तख्त साहिब का यह कर्तव्य है कि वह इस पर गंभीरता से ध्यान दे और संबंधित व्यक्ति से स्पष्टीकरण मांगे।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पवित्र स्वरूपों (ग्रंथों) के मुद्दे पर एक सवाल के जवाब में, जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि पंजाब सरकार और मान को इस संवेदनशील मामले में कोई जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए और बिना सत्यापित तथ्यों के बयान देने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब ने पहले ही सभी को इस मुद्दे पर किसी भी तरह की राजनीति न करने का निर्देश दिया है, और अगर इस निर्देश का उल्लंघन किया जाता है, तो इस पर गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा।
एक और सवाल के जवाब में, जत्थेदार ने बताया कि पेशी के दौरान मुख्यमंत्री ने एसजीपीसी के प्रशासनिक मामलों से जुड़े कुछ दस्तावेज जमा किए। ये दस्तावेज श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय के इंचार्ज को मिल गए हैं, और ठीक से जांच के बाद एसजीपीसी को इस बारे में बताया जाएगा।



