नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के कुछ अन्य नेताओं को मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के पास निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर अचानक धरने पर बैठने के कुछ घंटे बाद ही दिल्ली पुलिस ने वहां कार्रवाई की और गांधी और अन्य कांग्रेसी नेताओं को हिरासत में ले लिया।
तीन घंटे से अधिक समय तक चले एक नाटकीय घटना क्रम में गांधी को हिरासत में लिए जाने से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने धरना स्थल पर जाकर उनसे धरना समाप्त करने के बारे में बातचीत की थी। इसके कुछ ही देर बाद पुलिस गांधी तथा उनके साथ धरने में शामिल हुए समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को वहां से हटा कर पुलिस वाहन में अन्यत्र ले गयी। इस दौरान गांधी ने उन्हें हटाये जाने का प्रतिरोध किया तो पुलिसकर्मी उन्हें उठा कर वाहन तक ले गए।
कांग्रेस महासचिव एवं सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा तथा पार्टी के अन्य नेताओं को भी पुलिस वहां से हटा कर अपने वाहनों में ले गई। इससे पहले गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में प्रश्न-पत्र लीक मामले पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ राजधानी में पुलिस की कार्रवाई का विरोध करने के लिए अपने धरने में शामिल होने का आह्वान किया था।
गांधी तथा पार्टी के अन्य नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास से मार्च करते हुए लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के निकट पहुंचे थे। जितेंद्र सिंह ने बाद में एक बयान में कहा कि विपक्ष के नेता गांधी ने उसके साथ बातचीत के नीट की परीक्षा और उससे जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने की मांग की जिसे सरकार ने मान लिया था लेकिन बाद में उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी शर्त रख दी।
गौरतलब है कि धरने पर बैठे कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग कर रहे थे। कांग्रेस नेताओं ने सोमवार को संसद भवन से बाहर प्रदर्शन के दौरान युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को युवाओं के भविष्य पर हमला बताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने और इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने की मांग की।
गांधी को जबरन धरना स्थल से उठाने को कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने शर्मनाक बताया। उन्होंने एक्स पर पुलिस कार्रवाई का एक फोटो शेयर करते हुए लिखा कि मोदी की तानाशाही देखिए। विपक्ष के नेता के साथ ऐसा सुलूक किया जा रहा है। शर्मनाक! उन्होंने कहा कि यह भी नहीं बताया जा रहा है कि गांधी को हिरासत में लेकर किस थाने में ले जाया जा रहा है।
हिरासत में लिये जाने से पहले गांधी ने कहा कि हम छात्रों के खून का हिसाब मांगने प्रधानमंत्री के घर आए हैं। युवाओं की गुनहगार मोदी सरकार जवाबदेही और संसद में चर्चा से भाग नहीं सकती। छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है। प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वह बिना जवाब दिए और बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देश के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने और उनके खिलाफ क्रूरता के लिए नरेंद्र मोदी, अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। खरगे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी छात्रों के अधिकारों और उनकी जायज मांगों के साथ मजबूती से खड़ी है। खरगे ने कहा कि इस बुजदिल तानाशाह सरकार को लाठीचार्ज और बल प्रयोग पर जवाब देना होगा। मोदी और शाह हमारे युवाओं के गुनहगार हैं, उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा।
प्रधानमंत्री आवास के समक्ष धरने पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, पवन खेड़ा, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, सांसद नासिर हुसैन, मणिकम टैगोर, इमरान मसूद, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पार्टी नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा, राजीव शुक्ला, अमरिंदर सिंह राजा बराड़, गुरदीप सिंह सप्पल तथा बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे।



