कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पद की छाप नहीं छोड़ पाए गोविंद सिंह डोटासरा

सबगुरु न्यूज। राजस्थान में गोविंद सिंह डोटासरा को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बने दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक वह प्रदेश अध्यक्ष वाली छाप छोड़ने में सफल नहीं रहे हैं।

सचिन पायलट को जब 14 जुलाई को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से बर्खास्त करने के बाद डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। सचिन पायलेट की बर्खास्तगी के साथ ही राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी, राजस्थान के सभी जिला कांग्रेस कमेटी, सभी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य, सभी अग्रिम संगठनों की कमेटियों को भंग कर दिया गया था, ताकि संगठन के पदाधिकारी सचिन पायलट के समर्थन में इस्तीफा देकर कांग्रेस का माहौल खराब न कर सके।

लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी गोविंद सिंह डोटासरा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अकेले पदाधिकारी के रूप में काम कर रहे हैं। उनके साथ अब तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का गठन नहीं हुआ है। न ही जिला अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष, जिला एवं ब्लाक कमेटियों का गठन किया गया है। ऐसे में उन्हें अकेले ही काम करना पड़ रहा है।

गोविंद सिंह डोटासरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के साथ राजस्थान सरकार में शिक्षा राज्य मंत्री भी है। चूंकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष सांगठनिक दृष्टि से प्रदेश का सबसे बड़ा पदाधिकारी होता है। एक तरह से सरकार भी उनके नेतृत्व में काम करती है। मगर सरकार में मात्र राज्यमंत्री होने से होने के चलते गोविंद सिंह डोटासरा अध्यक्ष के रूप में कांग्रेसियों के गले नहीं उतर पा रहे हैं।

रही सही कसर उनको एक सामान्य मंत्री के रूप में गंगानगर और हनुमानगढ़ जिले का प्रभारी मंत्री बनने से पूरी हो गई। प्रदेश सरकार के अन्य मंत्रियों की तरह ही गोविंद सिंह डोटासरा को भी जिले का प्रभारी मंत्री बनाने से उनका कद हल्का पड़ा है।

सचिन पायलट जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवंं उप मुख्यमंत्री थे तो वो किसी भी जिले के प्रभारी मंत्री नहीं थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद गोविंद सिंह डोटासरा के अन्य मंत्रियों की तरह जिला प्रभारी बनने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश नहीं जा रहा है। ऊपर से झुंझुनूं एवं नागौर के सभी विधायक शिक्षा विभाग में उनके लोगों के तबादले नहीं होने को लेकर मुख्यमंत्री को उनकी शिकायत कर चुके हैं।

कांग्रेस के प्रभारी महासचिव अजय माकन भी जब जयपुर संभाग के कांग्रेसियों से फीडबैक ले रहे थे। उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष के रूप में गोविंद सिंह डोटासरा भी मौजूद थे। उनकी मौजूदगी में झुंझुनूं के लोगों ने गोविंद सिंह डोटासरा की कार्यप्रणाली की शिकायत की और तेज तर्रार विधायक राजेंद्र सिंह गुढ़ा की तो प्रभारी की मौजूदगी में ही शिक्षकों के तबादले को लेकर उनसे झड़प भी हुई थी। ऐसी घटनाएं डोटासरा के कद को कमजोर करती है।

डोटासरा के खुद के गृह जिले सीकर में भी उनके साथ कोई विधायक नहीं है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत, नीमकाथाना के विधायक सुरेश मोदी, दातारामगढ़ के विधायक वीरेंद्रसिंह चौधरी, धोद से विधायक परसराम मोरदिया तो खुलकर डोटासरा की खिलाफत कर रहे हैं। दीपेन्द्र सिंह, मोरदिया व हेमाराम चौधरी ने तो राष्ट्रीय महासचिव अजय माकन को फीडबैक देते समय उनके साथ बैठे डोटासरा की उपस्थिति पर आपत्ति तक जताई थी। डोटासरा के कमरे से बाहर जाने के बाद ही माकन को अपनी बातें कहीं।

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाले गोविंद सिंह डोटासरा पांचवें नेता हैं। उनसे पूर्व सरदार हरलाल सिंह, रामनारायण चौधरी, चौधरी नारायण सिंह, डॉक्टर चंद्रभान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं। डोटासरा से पूर्व प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके चारों ही नेताओं का कद अपने समय में काफी बड़ा माना जाता था।

सरदार हरलाल सिंह 1958- 59 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे थे। वह चिड़ावा से विधायक भी रह चुके थे। उनको सरदार की उपाधि से विभूषित किया गया था। वह मुख्यमंत्री के समकक्ष माने जाने वाले नेता थे। उनकी पोती प्रतिभा सिंह भी नवलगढ़ से विधायक रह चुकी है। रामनारायण चौधरी भी 1980 से 82 तक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं। उससे पूर्व वह भी राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री, विधानसभा के उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष रह चुके थे। उनकी पुत्री रीटा चौधरी वर्तमान में मंडावा से दूसरी बार कांग्रेस की विधायक है।

डोटासरा के राजनीतिक गुरु दातारामगढ़ से कई बार विधायक, राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके चौधरी नारायण सिंह 2003 से 2005 तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके है। चौधरी नारायण सिंह की गिनती दबंग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों में की जाती थी। उनके पुत्र वीरेन्द्र सिंह मौजूदा विधायक हैं।

डॉ चंद्रभान 2011 से 2014 तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं। इससे पूर्व वह 1989 से 1990 तक एवं 1998 से 2003 तक राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते डॉ चंद्रभान विधानसभा चुनाव में मंडावा से जमानत जब्त करवा कर चुके हैं।

शेखावाटी से अब तक पांच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने हैं और सभी जाट समुदाय से आते हैं, लेकिन इनमें सबसे कमजोर प्रदर्शन गोविंद सिंह डोटासरा का माना जा रहा है। प्रदेश के कांग्रेसियों का मानना है कि डोटासरा अपने से कोई निर्णय करने में सक्षम नहीं है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इशारे के बिना वो कोई भी काम नहीं करेंगे।

जानकारों के अनुसर देखना है कि आने वाले समय में डोटासरा अपने पूर्व वर्ती शेखावाटी के चार अध्यक्षों की तरह अपनी छाप छोड़ पाते हैं या नहीं, इसका पता तो आने वाले समय में कांग्रेस की विभिन्न स्तरो पर कमेटियों के गठन के वक्त ही लगेगा कि उनकी मर्जी से कितने लोग पदाधिकारी बन पाते हैं।