‘रामराज्य’ के संकल्प की पूर्ति के लिए प्रभादेवी में हजारों श्रद्धालुओं उपस्थिति
मुंबई। वर्तमान वैश्विक अशांति और युद्ध जैसी परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में भारत को चारों ओर से एक अभेद्य आध्यात्मिक सुरक्षा कवच प्राप्त हो, इस मुख्य उद्देश्य के साथ मुंबई में श्री राजमातंगी महायज्ञ अत्यंत दिव्य और चैतन्यमय वातावरण में संपन्न हुआ।
सनातन संस्था की ओर से प्रभादेवी, मुंबई स्थित नर्दुल्ला टैंक मैदान में आयोजित इस महायज्ञ में 7000 से अधिक श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। राष्ट्ररक्षा, देश की सर्वांगीण प्रगति और ‘रामराज्य’ की संकल्पना को साकार करना ही इस भव्य आयोजन के पीछे का मुख्य संकल्प था।
इस अवसर पर विधायक ज्ञानेश्वर म्हात्रे, विधायक डॉ. मनीषा कायंदे, सिद्धिविनायक मंदिर के कोषाध्यक्ष आचार्य त्रिपाठी, स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के अध्यक्ष रणजीत सावरकर, पीतांबरी उद्योगसमूह के व्यवस्थापकीय संचालक रवींद्र प्रभुदेसाई सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति और संत-महात्मा उपस्थित थे।
इस महायज्ञ का सनातन संस्था के यूट्यूब चैनल के माध्यम से दुनिया भर में सीधा प्रसारण (लाइव टेलीकास्ट) किया गया। इसके माध्यम से भारत के कई राज्यों सहित अमरीका, कनाडा, जापान, जर्मनी, चीन, अर्जेंटीना, पोलैंड, थाईलैंड, ब्राजील आदि 40 देशों के हजारों श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन जुड़कर इस महायज्ञ का आध्यात्मिक लाभ उठाया।
सनातन संस्था के प्रवक्ता अभय वर्तक ने इस अवसर पर कहा कि आज जब देश चारों ओर से विभिन्न चुनौतियों से घिरा हुआ है, तब भारत की रक्षा के लिए केवल भौतिक या सैन्य शक्ति ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ आध्यात्मिक बल का जुड़ा होना भी अत्यंत आवश्यक है।
आदिशक्ति की दस महाविद्याओं में परम शक्तिशाली मानी जाने वाली श्री राजमातंगी देवी का यह महायज्ञ भारत को एक अभेद्य आध्यात्मिक कवच प्रदान करेगा। सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले ने जिस मुंबापुरी (मुंबई) की भूमि से अपने धर्मकार्य का श्रीगणेश किया था, उसी पावनभूमि से राष्ट्र निर्माण की दिशा में आज यह एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।
सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले की आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी श्रीसत्शक्ति बिंदा सिंगबाल और श्रीचित्शक्ति अंजली गाडगीळ ने यजमान के रूप में तथा उनके साथ सैकड़ों सह-यजमानों ने इस शक्तिशाली वैदिक अनुष्ठान को पूर्ण किया।
गंभीर शंखनाद और राष्ट्रकल्याण के महासंकल्प के साथ यज्ञ का प्रारंभ हुआ श्रीमहालक्ष्मी अष्टोत्तर नामावली के मंत्रोच्चार के बीच कुंकुमार्चन किया गया और श्री राजमातंगी देवी के मूलमंत्रों के साथ यज्ञकुंड में आहुतियां समर्पित की गईं। महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र के सामूहिक पाठ के साथ इस मंगल विधि का समापन हुआ। इस महायज्ञ का पौरोहित्य इरोड, तमिलनाडु के शिवागम विद्यानिधि आगमाचार्य अरुणकुमार गुरुमूर्ति ने किया तथा शिवाचार्य गुरुमूर्ति इस यज्ञ के मुख्य आचार्य थे।
वर्तमान में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देश भर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक पर्व का औचित्य साधते हुए 1 हजार वर्ष पूर्व विदेशी आक्रामक महमूद गझनी द्वारा खंडित किए गए और प्रत्यक्ष भगवान चंद्रदेव द्वारा स्थापित किए गए सोरटी सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अंशों का सीधे मुंबई में दर्शन करने का एक अभूतपूर्व स्वर्ण अवसर इस यज्ञ स्थल पर श्रद्धालुओं को मिला; जिसका हजारों भक्तों ने अत्यंत भावपूर्ण हृदय से लाभ उठाया।
इस आध्यात्मिक समारोह के साथ-साथ यज्ञ स्थल पर लगाई गई। सनातन-निर्मित अध्यात्म, राष्ट्र रक्षा, आयुर्वेद और धर्मशास्त्र जैसे विषयों की अनमोल ग्रंथों और फलक प्रदर्शनी को भी मुंबईकरों की ओर से उत्कृष्ठ प्रतिक्रिया मिली। इस ऐतिहासिक में विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति, संत-महंत, हिंदुत्वनिष्ठ और मंदिर ट्रस्टी सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे। सभी ने एक सुर में भारत के सर्वांगीण विकास और शत्रुओं के विनाश के लिए सामूहिक प्रार्थना की।




