एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में राम मंदिर चढ़ावा गणना में चोरी और गबन के साक्ष्य मिले

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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की गणना के दौरान चोरी और गबन के मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया अनियमितताओं के साक्ष्य मिले हैं। एसआईटी के अनुसार उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में गणना कर्मियों को नोटों की गड्डियां और खुले नोट छिपाते हुए देखा गया है।

मंगलवार को सार्वजनिक की गई प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि अनियमितताएं 27 अप्रैल से पहले भी होने की आशंका है, लेकिन उस अवधि की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध न होने के कारण वित्तीय नुकसान का आकलन नहीं किया जा सका। एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट 22 जुलाई तक सौंपेगी। इसी दिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक प्रस्तावित है।

प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में लगभग 70 ऐसी घटनाएं दर्ज हुई हैं, जिनमें गणना कर्मियों को मुद्रा नोट छिपाते हुए देखा गया। जांच दल ने कहा कि आरोपियों के बयानों तथा उनकी ज्ञात आय से अधिक बैंक खातों में धनराशि मिलने से संदेह और मजबूत हुआ है।

रिपोर्ट में चढ़ावा गणना कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली, प्रशासनिक पर्यवेक्षण तथा मंदिर ट्रस्ट और संबंधित बैंक की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारंभिक रिपोर्ट है और विस्तृत जांच अभी जारी है।

रिपोर्ट के अनुसार निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया गया। प्रवेश और निकास पर अनिवार्य तलाशी, निर्धारित वर्दी, निजी सामान ले जाने पर प्रतिबंध, प्रत्येक दानपात्र (हुंडी) की अलग-अलग गणना, मूल्यवर्ग के अनुसार दस्तावेजीकरण तथा प्रभावी निगरानी जैसे प्रावधान पूरी तरह लागू नहीं किए गए। यह सब ट्रस्ट और बैंक के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद हुआ।

एसआईटी ने बताया कि 20 सितंबर 2024 को ट्रस्ट और बैंक के बीच हुए समझौते में गणना कक्ष की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान किए गए थे, लेकिन छह फरवरी 2025 को जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में अनिवार्य तलाशी की व्यवस्था को बदलकर नियमित अथवा यादृच्छिक कर दिया गया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो गई।

प्रारंभिक निष्कर्षों के आधार पर एसआईटी ने आठ व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है। इसके अलावा गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, वहां तैनात अन्य पर्यवेक्षकों तथा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच की अनुशंसा की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रस्ट के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. अनिल मिश्रा ने बैंक के साथ मिलकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। एसओपी लागू होने के बाद उसके अनुपालन की समीक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी भी उनकी थी, लेकिन लगातार पर्यवेक्षण का अभाव पाया गया। एसआईटी ने गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को सुरक्षा व्यवस्था लागू कराने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि नियमित तलाशी सुनिश्चित न किए जाने से कथित चोरी की घटनाओं को रोका नहीं जा सका।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास मंदिर परिसर की विभिन्न हुंडियों की चाबियां थीं, जबकि इसके लिए कोई औपचारिक या लिखित प्राधिकरण नहीं था। एसआईटी ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना है। जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव को गणना कार्य के लिए नामित किया, जिससे गबन का अवसर मिला। एसआईटी का कहना है कि यदि सीसीटीवी फुटेज की प्रभावी निगरानी होती तो इन घटनाओं को रोका जा सकता था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऑडिट में सीसीटीवी फुटेज 180 दिन तक सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई थी, लेकिन व्यवहार में केवल 45 दिन का बैकअप रखा जा रहा था। एसआईटी ने संबंधित बैंक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गणना कर्मियों को निर्धारित वर्दी उपलब्ध नहीं कराई गई, बैंक प्रतिनिधियों द्वारा प्रभावी निगरानी नहीं की गई और अधिकारियों के मासिक रोटेशन संबंधी प्रावधानों का भी पालन नहीं हुआ।

एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। अंतिम रिपोर्ट में पर्यवेक्षण संबंधी विफलताओं, प्रशासनिक जवाबदेही, संस्थागत कमियों तथा सुधारात्मक उपायों पर विस्तृत निष्कर्ष और सिफारिशें प्रस्तुत की जाएंगी।