प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और प्रकाश के माध्यम से उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की है। याचिका पर शीघ्र सुनवाई होने की संभावना है।
गौरतलब है कि तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(4) के तहत जिला अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इस पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी थाने की पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया था।
अदालत के आदेश के अनुपालन में झूंसी थाना पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी तथा दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(3) तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की धारा 5L, 6, 3, 4(2), 16 और 17 के तहत दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गिरफ्तारी से संरक्षण के लिए हाईकोर्ट की शरण ली है।
पुलिस ने पहले क्यों नहीं दर्ज किया मुकदमा
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंगलवार को पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी नाबालिग ने आरोप लगाया था तो पुलिस ने पहले पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि एक पुलिस अधिकारी की तस्वीरें एक हिस्ट्रीशीटर के साथ जश्न मनाते हुए सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि 18 फरवरी को मौनी अमावस्या के दिन उन्हें संगम नोज पर रोका गया था। उसी दिन शाम को एक तथाकथित महाराज ने उनके खिलाफ मुकदमा दायर किया और आरोप लगाया कि उनके शिष्य मुकुंदानंद ने उन्हें पटककर गला दबाया।
उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या जैसे पर्व पर, जब भारी भीड़ होती है, ऐसे गंभीर आरोप लगाना संदेह पैदा करता है। दूसरा आरोप यह लगाया गया कि उन्होंने पालकी से कोई वजनदार वस्तु फेंकी, जिससे बड़ी घटना हो सकती थी।
स्वामी ने कहा कि वे दिनभर मीडिया कैमरों के सामने मौजूद थे और कोई साक्ष्य नहीं मिलने के कारण पुलिस ने प्रारंभ में मामला दर्ज नहीं किया। बाद में नया मामला यौन उत्पीड़न का सामने लाया गया। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि कोई लड़का आरोप लगा रहा था तो उसी दिन पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं कराया गया। उनका कहना था कि अदालत के आदेश के बाद ही प्राथमिकी दर्ज की गई।
उधर, अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच किसी स्वतंत्र या केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए। अजय राय ने पत्र में लिखा कि यदि किसी शीर्ष धर्माचार्य के विरुद्ध ऐसी परिस्थितियां बनती हैं, जिससे शासन और आध्यात्मिक परंपरा के बीच टकराव की धारणा बने, तो व्यापक धार्मिक समाज में असंतोष उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि आस्था, संवैधानिक अधिकार और शासन की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है।



