भीलवाड़ा में रंगतेरस पर खेली गई जीनकर समाज की पारंपरिक कोडा़मार होली

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भीलवाड़ा। राजस्थान में पुराने शहर के सर्राफा बाजार स्थित गुलमंडी में मंगलवार को रंगतेरस के पावन अवसर पर जीनगर समाज द्वारा पारंपरिक कोड़ामार होली खेली गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वीरांगनाओं के बलिदान की स्मृति में मनाया जाने वाला यह 200 वर्ष पुराना उत्सव न केवल शहर, बल्कि आसपास की कॉलोनियों और बस्तियों के लोगों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। उत्सव की शुरुआत दोपहर 12 बजे हुई। आयोजन स्थल पर चार बड़े कढ़ाव रखे गए, जिनमें करील 15 हजार लीटर पानी और 20 किलो गुलाल-रंग घोला गया।

परंपरा के अनुसार महिलाएं इन कढ़ाव की सुरक्षा के लिए हाथों में कपड़े से बने विशेष ‘कोड़े’ लेकर तैनात रहीं। जैसे ही पुरुषों ने डोलची (चमड़े का पात्र) से महिलाओं पर पानी फेंकने का प्रयास किया, महिलाओं ने कोड़ों से प्रहार करके उन्हें करारा जवाब दिया। दोपहर दो बजे तक चलने वाले इस रोमांचक खेल के दौरान कढ़ाव को कई बार पानी से भरा गया।

इससे पूर्व, सुबह समाज की महिलाएं बैरवा मोहल्ला में एकत्रित हुईं। वहां से वे हाथों में कपड़े के कोड़े लिए ढोल की थाप पर थिरकती हुई सामूहिक रूप से गुलमंडी पहुंचीं। सर्राफा बाजार पहुंचने पर समाज के पुरुषों और अन्य सदस्यों ने हंसी-ठिठोली के साथ उनका स्वागत किया।

कोड़ामार होली के दौरान तेज आवाज में डीजे पर बज रहे फिल्मी गीतों और भजनों पर समाज के युवाओं और महिलाओं ने जमकर नृत्य किया। कई चक्र के रोमांचक खेल के बाद कार्यक्रम के समापन की घोषणा की गई। इसके पश्चात सभी समाजजन ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते हुए समाज के नोहरे पहुंचे, जहां स्वल्पाहार के बाद सभी अपने घरों को लौटे।