अजमेर। विज्ञान भारती अजयमेरु की ओर से आयोजित 12वीं विज्ञान जागरूकता परीक्षा का पुरस्कार वितरण समारोह कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत के मुख्य आतिथ्य में पॉलिटेक्निक कॉलेज सभागार अजमेर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर रावत ने कहा कि अंग्रेजी गुलामी के 190 साल के समय में जिन भारतीय वैज्ञानिकों को भुला दिया गया उनके कार्य को याद करके हमें प्रेरणा प्राप्त करनी चाहिए
ऐसे सितारों में डॉ प्रमथ नाथ बोस, राधानाथ सिकदर, चिंतामणि रघुनाथ आचार्य, पुरुषोत्तम शंकर आगरकर, किशोरी मोहन बंदोपाध्याय, जगदीश चंद्र बसु, प्रफुल्ल चंद्र राय प्रमुख है। प्राचीन भारत में विज्ञान ने भारत की प्रतिष्ठा को आसमान की बुलंदियों तक पहुंचा दिया था जिसके उदाहरण वेदों और पुराणों में वर्णित प्रयोग हैं।
विज्ञान संपूर्ण विश्व और मुख्यतः मानव जीवन के लिए बहुत अधिक महत्वपूर्ण उपादान है तथा दैनिक जीवन में यह प्रत्येक कदम पर हमारे सहायक की भूमिका निभाता है। प्राचीन सभ्यताओं मोहनजोदड़ो और हड़प्पा का नगरीय संयोजन भारतीय विज्ञान की ही देन है। भारत ने पूरे विश्व में गणित सिखाया है। विद्यार्थी वर्ग को किताबी ज्ञान मात्र पर आधारित न रहते हुए विज्ञान को लोकप्रिय बनाने एवं प्रचारित करने हेतु तैयार रहना होगा।
समारोह में विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ विनय भारद्वाज ने कहा कि विज्ञान के बिना आधुनिक भारत के विकास का सपना अधूरा है। विज्ञान तो मानव जीवन का अभिन्न अंग है। विज्ञान भारती स्वदेशी विज्ञान और वर्तमान पीढ़ी के मन में विज्ञान के प्रति रुचि जाग्रत करने में अहम भूमिका अदा कर रही है।
समारोह में विज्ञान भारती चित्तौड़ प्रांत के अध्यक्ष गोविन्द नारायण पारीक ने अमृत काल में भारतीय वैज्ञानिकों का स्मरण करवाते हुए तथा विश्व को उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए, विज्ञान भारती का विस्तृत परिचय दिया। कार्यक्रम में बारहवीं विज्ञान जागरुकता परीक्षा के 30 से अधिक निजी एवं राजकीय विद्यालयों के प्रतिभागी विजेता विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस परीक्षा में लगभग 2000 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया था।
विज्ञान भारती अजयमेरु के अध्यक्ष पीराराम सोनी ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बाल वैज्ञानिकों में छिपी ऊर्जा को बाहर लाने की जरूरत है। हमें अपने प्राचीन विज्ञान तक जाने की अभी भी आवश्यकता है। उन्होंने विज्ञान की प्राचीन भारतीय परंपरा को विरासत के रूप में सहेज कर रखने की बात पर जोर दिया। पारितोषिक वितरण समारोह कार्यक्रम में विज्ञान भारती के क्षेत्र संरक्षक प्रो पुरुषोत्तम परांजपे, लीलामणि गुप्ता, कमलेश रावत, हरजी राम चौधरी, विष्णु शर्मा, अरविंद शर्मा भी उपस्थिति रहे।



