
सबगुरु न्यूज-सिरोही। सुदर्शन फाकीर का मशहूर शेर है…
मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है।
क्या मिरे हक में फैसला देगा।।
कुछ ऐसा ही सिरोही के रामझरोखा मंदिर की जमीन को खुर्द बुर्द करने के मामले में जिला कलक्टर के द्वारा किया जाने का आरोप लगा है। सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने इस जांच समिति और इसकी रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर के द्वारा की गई टिप्पणी सवालिया निशान लगाया है।
कथित रूप से रामझरोखा मंदिर की करीब 18 हजार वर्ग फीट जमीन का विभाजन करके खुर्द बुर्द करने के मामले में संयम लोढ़ा नेतृत्व में कांग्रेस के आंदोलन बाद जिला कलेक्टर जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर इन पट्टों को निरस्त करने की कार्रवाई शुरू करने के आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश में कलेक्टर के द्वारा की गई टिप्पणी पर पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा ने जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी को पत्र भेजकर नगर परिषद सिरोही की ओर से की गई जांच को दुर्भावनापूर्ण एवं संदेहास्पद बताते हुए गंभीर कानूनी अनियमितताओं की ओर ध्यान आकर्षित करवाया है।

लोढ़ा ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि 9 दिसंबर 2025 को जिला कांग्रेस कमेटी सिरोही की ओर से रामझरोखा मंदिर की भूमि के अवैध बेचान एवं हस्तांतरण को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया था। इसके पश्चात नगर परिषद सिरोही से करवाई गई जांच में केवल प्रक्रियात्मक अनियमितता बताकर मामले को हल्का करने का प्रयास किया गया, जबकि वास्तविकता में यह गंभीर कानूनी अनियमितताओं का मामला है, जो सुधार योग्य नहीं हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस नगर परिषद ने मंदिर भूमि से संबंधित दस्तावेज और पट्टे जारी किए, उसी संस्था से जांच करवाई गई, जिससे जांच की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह खड़े होते हैं। जांच रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि भूखंडों से संबंधित आपत्ति सूचना प्रक्रिया, रिकॉर्ड तथा तकनीकी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है, इसके बावजूद जांचकर्ताओं ने इसे सिविल न्यायालय का विषय बताकर अपने दायित्व से बचने का प्रयास किया।
लोढ़ा ने कहा कि जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह तथ्य सामने आया है कि धारा 69-ए के अंतर्गत उक्त पट्टे जारी नहीं किए जा सकते थे। इसके बावजूद मंदिर भूमि का अवैध रूप से बेचान, लीज और भौतिक हस्तांतरण किया गया, जिससे करोड़ों रुपये के गबन की आशंका है। उन्होंने पट्टा संख्या 43 से 50 तथा भूखंड संख्या 1 से 8 को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है।
पूर्व विधायक ने यह भी चेताया कि संबंधित भूमि का स्वामित्व और कब्जा विवादित होने के बावजूद खरीदारों की ओर से बैंकों से ऋण लिया जा रहा है, जिससे अवैध स्वामित्व हस्तांतरण की स्थिति बन सकती है। ऐसे में उक्त भूमि पर तत्काल रिसीवर नियुक्त कर उसे राजहक में लेकर सुरक्षित किया जाना आवश्यक है।
इसके साथ ही उन्होंने निजी विद्यालय के पक्ष में जारी एक अपंजीकृत लीज की भी जांच कर कार्रवाई की मांग की है, जिस पर जांच रिपोर्ट में जानबूझकर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की गई। लोढ़ा ने जिला कलेक्टर से आग्रह किया है कि मंदिर भूमि से जुड़े सभी अवैध पट्टों व लीज को निरस्त कर दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएं, ताकि धार्मिक आस्था से जुड़ी इस ऐतिहासिक धरोहर की भूमि को सुरक्षित किया जा सके।
– भाजपा में ही पड़ गई थी फूट
रामझरोखा मंदिर की कथित जमीन के पट्टे काटकर उन्हें बेच देने के मामले में कांग्रेस ही नहीं बल्कि भाजपा नेता भी हमलावार हो गए थे। भाजपा के प्रवासी प्रकोष्ठ चेन्नई सह संयोजक तेजराज सोलंकी इस मामले सिरोही के विधायक ओटाराम देवासी उनके पुत्र विक्रम लगातार हमलावर थे। उन्होंने मामले मन बापबेटा पट्टा चोर हैशटैग पोस्टें वायरल की थी। इसके बाद पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए शुक्रवार को ही उन्हें इस पद से मुक्त कर दिया गया है।


