पश्चिम बंगाल में SIR हिंसा, राजनीतिक दखलअंदाजी से प्रभावित है , ECI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

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नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) हिंसा, धमकी और लगातार राजनीतिक दखलअंदाजी से बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिससे ऐसी स्थिति बन गई है कि चुनाव अधिकारी अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन नहीं कर पा रहे हैं।

ईसीआई ने एक हलफनामे में कहा कि जहां अन्य राज्यों में एसआईआर का गिनती का चरण बिना किसी रुकावट और घटना के संपन्न हुआ, वहीं पश्चिम बंगाल में चुनाव अधिकारियों के खिलाफ रुकावट, धमकियों और हमलों की बार-बार घटनाएं हुईं।

आयोग ने आगे तर्क दिया है कि 2025 की चुनावी सूचियों की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान है, क्योंकि चल रहे एसआईआर के दौरान अनुपस्थित, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं की 58 लाख से अधिक प्रविष्टियों की पहचान की गई है तथा चुनावी पंजीकरण अधिकारियों द्वारा लगभग 1.51 करोड़ कानूनी नोटिस जारी किए जा रहे हैं। आयोग ने जोर दिया कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए 2025 की सूचियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

इससे पहले ईसीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ के समक्ष कहा था कि यह जवाबी हलफनामा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दायर एक संबंधित मामले में भी प्रासंगिक होगा, क्योंकि इसमें चुनाव अधिकारियों द्वारा सामना की गई दुश्मनी, धमकी और हिंसा के आरोपों को रिकॉर्ड पर रखा गया है।

हलफनामे में बूथ-स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) की शिकायतों पर स्थानीय पुलिस अधिकारियों द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने में व्यापक अनिच्छा दर्ज की गई है। इसमें कहा गया है कि कुछ मामलों में प्राथमिकी केवल जिला चुनाव अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही दर्ज की गईं और गिरफ्तारियां बहुत बाद में हुईं। आयोग ने आरोप लगाया कि बार-बार संचार के बावजूद राज्य जानबूझकर मामलों के पंजीकरण और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने पर ईसीआई के निर्देशों का पालन करने में विफल रहा।

हलफानाम में कहा गया है कि उद्धृत सबसे गंभीर घटनाओं में से एक 24 नवंबर 2025 को कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय का घेराव है। प्रदर्शनकारियों ने जबरन घुसने की कोशिश की, पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए, कार्यालय में तोड़फोड़ की, अधिकारियों को रोका, परिसर को बाहर से बंद कर दिया और अधिकारियों को अंदर या बाहर जाने से रोका, जिससे आधिकारिक काम में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई।

आयोग ने आरोप लगाया कि कोलकाता के पुलिस कमिश्नर से औपचारिक शिकायत के बावजूद प्रदर्शनकारी लगभग 28 घंटे तक वहीं डेरा डाले रहे। संज्ञेय अपराध होने के बावजूद इस घटना के संबंध में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है और कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

ईसीआई ने यह भी बताया कि गृह मंत्रालय की ओर से खतरे के आकलन के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी देश के एकमात्र चुनाव अधिकारी हैं जिन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। हलफनामे में हुगली और दक्षिण 24 परगना जिलों से सामने आई घटनाओं का भी जिक्र है।

ईसीआई ने कहा कि मौजूदा हालात के बावजूद बीएलओ ने गिनती के चरण के दौरान कुल 7.08 करोड़ से अधिक गणना फॉर्म एकत्र किए, जो कुल का 92.40 प्रतिशत है। आयोग ने जोर दिया कि चल रहा नोटिस चरण पात्रता निर्धारित करने और त्रुटियों को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण है और चुनावी सूची की अखंडता बनाए रखने के लिए इसे बिना किसी डर या धमकी के पूरा करना आवश्यक है।