जयपुर। राजस्थान में राजस्थान उच्च न्यायालय ने आयकर अपीलीय अधिकरण (आईटीएटी) की न्यायिक सदस्य एस सीतालक्ष्मी की दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति चंद्र प्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों को देखते हुए राहत देने से इन्कार कर दिया।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दर्ज मामले में आरोप है कि आईटीएटी में लंबित आयकर याचिकाओं में अनुकूल आदेश पारित करने के बदले रिश्वत मांगी और स्वीकार की गई। जांच एजेंसी के अनुसार इस कथित नेटवर्क में कुछ अधिवक्ता, बिचौलिए और अन्य सहयोगी भी शामिल थे, जिनसे हवाला के जरिए लेनदेन किया गया।
इस मामले में सीबीआई ने कई स्थानों पर छापेमारी करके बड़ी मात्रा में नकदी बरामद करने का दावा किया है। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी प्रभावशाली पद पर रहते हुए न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश में शामिल थीं। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए जमानत दी जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध का संकेत देती है। अदालत ने माना कि मामले की प्रकृति, साजिश के आरोप और सार्वजनिक पद के दुरुपयोग को देखते हुए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा। इससे पहले भी एस. सीतालक्ष्मी की जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।



