राजस्थान में वर्ष 2024 में हर दिन औसत 23 बच्चे हुए लापता

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जयपुर। राजस्थान में वर्ष 2024 में हर दिन औसत 24 बच्चे लापता हुए और पूरे साल में 8597 बच्चे लापता दर्ज किए गए जो एक साल में करीब 7.30 प्रतिशत की वृद्धि है।

अंतरराष्ट्रीय गुमशुदा बाल दिवस (25 मई) के अवसर पर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2023 में 8012 लापता बच्चों के मामले दर्ज किए गए। राजस्थान लापता बच्चों के मामले में देश के शीर्ष 10 राज्यों में शामिल है।

वर्ष 2024 में भारत में लापता बच्चों की संख्या एक लाख 47 हजाार 175 रही, जिसमें ट्रांसजेंडर बच्चे भी शामिल हैं। इनमें से एक लाख 11 हजार 271 लड़कियां थीं। राष्ट्रीय स्तर पर रुझान दर्शाते हैं कि 2023 से 2024 के बीच लापता बच्चों के मामलों में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो एक लाख 38 हजार 609 से बढ़कर एक लाख 47 हजार 175 हो गयी। इनमें से तकरीबन 5.8 प्रतिशत मामले राजस्थान से हैं।

मामलों के रोकथाम के लिए मजबूत कदमों की जरूरत पर जोर देते हुए क्राई की क्षेत्रीय निदेशक सोहा मोइत्रा ने कहा कि राजस्थान में लापता बच्चों के मामलों में बढ़ोतरी चिंताजनक है, क्योंकि लापता बच्चों में लड़कियों की तादाद बहुत अधिक बनी हुई है। हर पांच में से चार से अधिक लापता बच्चे लड़कियां हैं, जो गहरी लैंगिक असुरक्षाओं की ओर इशारा करता है और इस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि रोकथाम व्यवस्था को मजबूत करना, खासकर किशोरियों के लिए, और समुदाय स्तर पर खतरों से निपटना, बच्चों के लापता होने की संख्या को कम करने के लिए बेहद जरूरी है।

उन्होंने बताया कि एनसीआरबी आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2024 में कुल लापता बच्चों में 7091 लड़कियां थीं जो कुल मामलों का 82.48 प्रतिशत हैं जो राज्य में हर दिन औसतन 19 लड़कियां लापता हुई।

राजस्थान में 85 प्रतिशत से अधिक लापता बच्चे मिले, लेकिन अनसुलझे मामले अब भी बने हुए हैं। बच्चों को ढूंढने के मामले में राज्य के नतीजे अपेक्षाकृत बेहतर रहे हैं। साल भर में कुल 7371 लापता बच्चों को ढूंढा गया, जिनमें 6209 लड़कियां और 1162 लड़के शामिल हैं। बरामदगी की दर 85.7 प्रतिशत रही हैं।