तेहरान/वाशिंगटन। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि अमरीका के साथ शत्रुता समाप्त करने संबंधी समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। प्रस्तावित समझौते में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, ईरान की जब्त विदेशी परिसंपत्तियों को मुक्त करने तथा युद्ध के बाद पुनर्निर्माण में सहायता संबंधी प्रावधान शामिल हो सकते हैं।
ईरानी सरकारी टेलीविजन से बातचीत में अराघची ने कहा कि प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) हालिया संघर्ष के दौरान ईरान द्वारा हासिल उपलब्धियों को औपचारिक रूप से सुरक्षित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि कूटनीति इन उपलब्धियों को स्थायी स्वरूप देने का माध्यम है।
सरकारी मीडिया के अनुसार अराघची ने कहा कि प्रस्तावित समझौते का पहला प्रमुख बिंदु अमरीका द्वारा लगाये गये कथित अवैध नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त करना है। उन्होंने बताया कि ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री आवागमन को विनियमित करने के लिए एक संयुक्त कानूनी और परिचालन तंत्र पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था की घोषणा अगले 60 दिनों के भीतर की जा सकती है, जबकि जलडमरूमध्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी ईरानी सशस्त्र बलों के पास ही रहेगी।
अराघची ने बताया कि विचाराधीन समझौते में युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए व्यापक आर्थिक पुनर्निर्माण योजना भी शामिल है। इस योजना में मुआवजे से संबंधित प्रावधान भी हो सकते हैं, हालांकि इस संबंध में बातचीत अभी जारी है।
उन्होंने कहा कि वार्ता प्रक्रिया दो चरणों में विभाजित है। पहले चरण में प्रारंभिक समझौता ज्ञापन पर सहमति बनाई जाएगी, जबकि दूसरे चरण में व्यापक अंतिम समझौते पर बातचीत होगी। उनके अनुसार कई प्रारूपों की समीक्षा ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सहित प्रमुख निर्णय लेने वाली संस्थाओं द्वारा की जा चुकी है।
विदेश मंत्री ने दावा किया कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होते ही ईरान की जब्त परिसंपत्तियों को मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज को आने वाले दिनों में, संभवतः डिजिटल माध्यम से, अंतिम रूप दिया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि यूरेनियम संवर्धन तथा उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के प्रबंधन जैसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को वार्ता के दूसरे चरण के लिए स्थगित कर दिया गया है। ईरान का रुख है कि उच्च संवर्धित परमाणु सामग्री का कोई भी प्रबंधन देश के भीतर ही होना चाहिए। व्यापक प्रतिबंधों में राहत का मुद्दा भी अगले चरण में उठाया जाएगा।
अराघची ने क्षेत्रीय मुद्दों पर कहा कि लेबनान ईरान की रणनीतिक प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने हालिया घटनाक्रमों के प्रति ईरान की प्रतिक्रिया को व्यापक रणनीतिक उपलब्धि का हिस्सा बताया। उनके अनुसार प्रस्तावित व्यापक ढांचे में लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर युद्धविराम व्यवस्था, बल प्रयोग नहीं करने की पारस्परिक प्रतिबद्धता तथा संप्रभुता के सम्मान से जुड़े प्रावधान शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि यदि दूसरे चरण की वार्ताओं में पर्याप्त प्रगति नहीं होती है तो पूरी प्रक्रिया को वापस भी लिया जा सकता है। यह चरण लगभग 60 दिनों तक चलने की संभावना है, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया भी जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमरीका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद संघर्ष शुरू हुआ था। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल और अमेरिका समर्थित खाड़ी देशों को निशाना बनाया, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात प्रभावित हुआ था। अप्रैल में युद्धविराम होने के बावजूद छिटपुट सैन्य झड़पें जारी हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा था कि उन्होंने ईरान के खिलाफ निर्धारित हमलों को रद्द कर दिया क्योंकि वार्ताकारों ने एक बेहतरीन समझौता तैयार किया है, जिस पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं। ईरानी मीडिया में शुक्रवार को कथित 14 सूत्रीय समझौते का विवरण प्रकाशित होने के बाद श्री ट्रंप ने इन रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि उनका सहमत शर्तों से कोई संबंध नहीं है और वे वास्तविकता से मेल नहीं खातीं।



