लखनऊ/अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महामंत्री चंपत राय ने राम मंदिर दानपात्र में कथित चोरी के मामले को लेकर पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है।
राय ने छह जुलाई को अयोध्या से रामभक्तों के नाम लिखे अपने हस्तलिखित पत्र में कहा है कि 10 जून से दानपात्र की गणना के दौरान हुई कथित अनियमितता को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं और उन पर भी बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं। हालांकि उन्होंने इस पूरे विवाद पर मौन रहने का निर्णय लिया है।
उन्होने पत्र में बताया कि छह जुलाई को हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में मामले की जांच कर रही एसआईटी की प्राथमिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट मूल रूप से गोपनीय थी, लेकिन अब सार्वजनिक हो चुकी है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और पूरे मामले की सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।
अपने ऊपर लगे आरोपों के बीच चंपत राय ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि उन्हें अक्टूबर 1991 में अयोध्या भेजा गया था और संगठन के प्रचारक के रूप में उनका 45 वर्षों का जीवन पूरी तरह सार्वजनिक और पारदर्शी रहा है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां उन्होंने कार्य किया, उनका जीवन एक खुली किताब की तरह रहा है।
पत्र के अंत में चंपत राय ने सभी रामभक्तों को आदरपूर्वक नमन करते हुए धैर्य बनाए रखने की अपील की और विश्वास जताया कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के बाद पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने पत्र पर 6 जुलाई 2026, अयोध्या अंकित करते हुए अपने हस्ताक्षर किए।



