HPCL की राजस्थान रिफाइनरी की लागत बढ़ी, कंपनी को 8,962 करोड़ रुपए की और शेयर पूंजी डालने को सरकार की मंजूरी

1

नई दिल्ली। सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम द्वारा राजस्थान में स्थापित की जा रही एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरआरएल की अनुमानित लागत में वृद्धि के साथ उसमें कंपनी की ओर से 8,962 करोड़ रुपए के अतिरिक्त शेयर पूंजी निवेश के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दी।

बालोतरा जिले के पचपदरा में एचपीसीएल और राजस्थान सरकार के बीच 74:26 प्रतिशत की भागीदारी के साथ लगाए जा रहे इस 90 लाख टन वार्षिक क्षमता के विशाल पेट्रोलियम शोधन कारखाने की परियोजना लागत को संशोधित कर 79,459 करोड़ रुपए कर दिया गया है। पहले इस पर 43,129 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान था। इसमें पेट्रोरसायनों की विनिर्माण क्षमता 24 लाख टन वार्षिक होगी। योजना के अनुसार इस परियोजना को इस वर्ष जुलाई के शुरू में वाणिज्य रूप से चालू किया जाना है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने एचआरआरएल की संशोधित लागत और उसमें एचपीसीएल की शेयर पूंजी बढ़ाने के प्रस्ताव को बताया कि हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की ओर से इस परियोजना में 8,962 करोड़ रुपए के अतिरिक्त इक्विटी निवेश को मंज़ूरी दी गई है। इसके बाद उसमें एचपीसीएल का कुल इक्विटी (शेयर पंजी) निवेश 19,600 करोड़ रुपये हो जाएगा।

मंत्री ने कहा कि एचआरआरएल रिफाइनरी एक बहुत ही जटिल है जिसमें डीजल, पेट्रोल के अतिरिक्त 26 प्रतिशत से अधिक क्षमता का उपयोग पेट्रोरसायनों के उत्पादन के लिए किया जाना है। इस काराखने के बन कर तैयार जो जाने पर इसमें सालाना 10 लाख टन पेट्रोल, 40 लाख टन डीज़ल के उत्पादन के साथ, 10 लाख टन पॉलीप्रोपाइलीन, पांच लाख टन लीनियर लो डेंसिटी पॉलीइथिलीन, पांच लाख टन हाई डेंसिटी पॉलीइथिलीन और लगभग चार लाख टन बेंजीन, टोल्यूनि और ब्यूटाडीन तैयार किया जा सकेगा।

ये सभी उत्पाद परिवहन, फार्मा, पेंट्स, पैकेजिंग इंडस्ट्रीज़ वगैरह जैसे क्षेत्रों और औद्योगिक जरूरतों में काम आएंगे। सरकार का कहना है कि यह परियोजना ऊर्जा के क्षेत्र में आत्म निर्भरता को मजबूत करेगी और पेट्रो रसायन क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम होगी।

वैष्णव ने कहा कि यह परियोजना राजस्थान के एक पिछड़े इलाके औद्योगीकरण में सहायक होगी, इसमें स्थानीय मंगला पेट्रोलियम तेल प्रखंड के कच्चे तेल का इस्तेमाल किया जाएगा और भारत की तेल-शोधन केंद्र के रूप में स्थित और मजबूत होगी इसके निर्माण में अलग-अलग हितधारकों की ओर से 25,000 लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।