छत्तीसगढ : नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ किया आत्मसमर्पण

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रायपुर/जगदलपुर। तीन राज्यों में सक्रिय रहे और कई खूनी वारदातों के लिए कुख्यात नक्सली कमांडर सुन्नम चन्द्रेया उर्फ पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ बुधवार को छत्तीसगढ में बस्तर रेंज के पुलिस रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुन्दरराज के समक्ष औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया।

बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर के शौर्य भवन में आयोजित ‘पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन’ कार्यक्रम में पापा राव सहित सभी 18 माओवादी कैडरों को औपचारिक रूप से मुख्यधारा में शामिल कर लिया गया है।

इसे बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के सघन अभियानों और सरकार की आत्मसमर्पण कराने की नीति की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पापा राव कुख्यात, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य रहा है ओर उस पर 25 लाख रुपए के इनाम था।

कुख्यात नक्सली पापा राव के साथ डिवीजन वाइज कंपनी मेंबर प्रकाश मड़वी, अनिल ताती सहित कुल 17 अन्य सशस्त्र नक्सलियों ने आज आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटे। इस समूह ने सुरक्षा बलों को एके-47, एसएलआर, इंसास, 303 राइफल, बीजीएल लांचर सहित भारी मात्रा में हथियार सौंपे हैं।

सुरक्षा एजेंसियां बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में इसे सबसे बड़ी कामयाबी मान रहे हैं। उन्होंने बताया कि नक्सली पापाराव को साथियों के साथ जंगल से निकालना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प को पूरा करने की दिशा में आत्मसमर्पण के मामलों में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा नक्सली और पुलिस के बीच सेतु की तरह काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि गृह जिले कबीरधाम में उप मुख्यमंत्री शर्मा ने मंगलवार सुबह पापाराव से बात होने और आत्मसमर्पण करने की बात एक साक्षात्कार में कही थी। सूत्रों के मुताबिक जंगल से निकलकर मध्यस्थ लोगों की टीम के साथ नक्सलियों ने बीजापुर जिले के कुटरू थाने में आमद दी। आमदगी की इस खबर के बाद विशेष पुलिस महानिदेशक नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा ने यूनीवार्ता को कल बताया कि पापा राव पुलिस के संपर्क में है, वह एवं उसके साथियों का औपचारिक आत्मसमर्पण होना बाकी है।

कुख्यात नक्सली पापाराव के बारे में गृहमंत्री ने एक साक्षात्कार में कहा कि राज्य में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी में अब कोई सक्रिय सदस्य नहीं बचा है। एरिया कमेटी और पार्टी के सदस्यों ने वर्दी और हथियार त्याग दिए हैं। इस तरह से राज्य में सशस्त्र नक्सलवाद खत्म हो गया है। हमारे पास अभी सात दिन का समय शेष है, इस बीच बचे-खुचे छोटे-बड़े कैडरों का आत्मसमर्पण करवा लिया जाएगा।” गृहमंत्री ने दावा किया कि केंद्रीय गृहमंत्री शाह का 31 मार्च तक नक्सलवाद समूल नाश करने का संकल्प छत्तीसगढ़ में पूरा हो गया है।

नक्सली पापा राव का यह आत्मसमर्पण ऐसे समय में हुआ है, जब केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के लिए 31 मार्च की समयसीमा निर्धारित कर रखी थी। उसके जंगल से बाहर आने के साथ ही बस्तर में सक्रिय नक्सलियों की सबसे प्रभावशाली टीम का अंत माना जा रहा है। पिछले ढाई दशकों से वह सुरक्षा बलों के लिए ‘मोस्टवांटेड’ बना हुआ था और उसकी गिरफ्तारी के लिए कई राज्यों की पुलिस और केंद्रीय बल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे थे।

कुख्यात नक्सली कमांडर पापा राव मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सक्रिय था, लेकिन उसकी सक्रियता का दायरा तेलंगाना, महाराष्ट्र और ओडिशा की सीमाओं से लगे इलाकों तक फैला हुआ था। नक्सल संगठन के सबसे प्रभावशाली विंग डीकेएसजेडसी का सदस्य होने के नाते वह नेशनल पार्क एरिया कमेटी का लीडर भी था। पश्चिम बस्तर डिवीजन के सचिव के रूप में उसकी जिम्मेदारी तीनों राज्यों की सीमा से लगे जंगलों में फैली हुई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, पापा राव न केवल एक कुशल रणनीतिकार था, बल्कि उसने बस्तर में नक्सली संगठन के ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी।

सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार पापा राव पर कई बड़ी और खूनी नक्सली वारदातों की साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं। वह न केवल हमलों का मास्टरमाइंड था, बल्कि नए कैडरों को प्रशिक्षण देने, आईईडी प्लांट करने और सुरक्षा बलों को एंबुश में फंसाने की रणनीति बनाने में भी अहम भूमिका निभाता था। प्रमुख वारदातों में ताड़मेटला कांड (2010) शामिल है, जिसे बस्तर के इतिहास का सबसे खूनी हमला माना जाता है।

इस हमले में 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे और इसकी साजिश में पापा राव की अहम भूमिका बताई जाती है। इसके अलावा, दंतेवाड़ा-सुकमा मार्ग पर हुए चिंगावरम बस ब्लास्ट में 32 नागरिकों और जवानों की मौत हो गई थी। हाल ही में जनवरी 2025 में बीजापुर के कुटरू-बेदरे रोड पर हुए आईईडी ब्लास्ट में आठ सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे, जिसका मास्टरमाइंड भी पापा राव को ही माना जाता है।

पापा राव ने सुरक्षा बलों को चकमा देने और खुद को बचाने के लिए पिछले 20 वर्षों में कई बार अपनी मौत की अफवाह फैलाई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ऐसी तीन बड़ी घटनाएं हैं जब लोगों ने लगभग यकीन कर लिया था कि पापा राव मर चुका है। जुलाई 2016 में सुकमा में यह अफवाह फैली कि सांप काटने से उसकी मौत हो गई है।

2020 में कोरोना काल के दौरान किडनी फेल होने से उसकी मौत की खबर जोरों पर थी, जबकि जनवरी 2025 में बीजापुर के नेशनल पार्क एरिया में हुई मुठभेड़ के दौरान उसकी टीम के चार सदस्य मारे गए थे और इसी बीच पापा राव के मारे जाने की अफवाह उड़ी थी। हालांकि, वह हर बार जिंदा निकला और सुरक्षा बलों को चकमा देता रहा।

पापा राव का असली नाम सुन्नम चन्द्रेया है और वह छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के किस्टाराम थाना क्षेत्र के ग्राम निम्मलगुड़ा का मूल निवासी है। 1990 के दशक में किशोरावस्था के दौरान वह माओवादी संगठन से जुड़ गया। उस समय क्षेत्र में नक्सलियों की सक्रियता और ‘चेतना नाट्य मंडली’ के गीतों से प्रभावित होकर उसने हथियार उठा लिए। उसने संगठन में बाल संघम सदस्य के रूप में शुरुआत की और धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। वह बस्तर का दूसरा स्थानीय नक्सली था, जो माड़वी हिड़मा के साथ डीवीसीएम (डिविजनल कमेटी मेंबर) जैसे शीर्ष रैंक तक पहुंचा।

‘पापा राव’ नाम कैसे पड़ा, इस बारे में जानकारी बताती है कि जब वह पूर्णकालिक सदस्य बना, तो उसे नक्सली कमांडर रमन्ना उर्फ रावलु श्रीनिवास की टीम में शामिल किया गया। इस दौरान रमन्ना ने ही उसका नाम ‘पापा राव’ रखा था। पारिवारिक मोर्चे पर पापा राव ने जंगल में रहते हुए दो शादियां कीं।

उसकी पहली पत्नी उर्मिला भी एक नक्सली थी और पामेड़ एरिया कमेटी की सचिव थी। नवंबर 2025 में बीजापुर में हुई एक मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने उर्मिला को मार गिराया था। इसके कुछ महीने बाद ही पापा राव ने दूसरी शादी कर ली, जो खुद भी नक्सली बताई जाती है। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ जनों, पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और टीम बीजापुर के सदस्य मौजूद रहे।