
सिरोही। भाजपा के सिरोही मंडल प्रशिक्षण वर्ग में ऐसा रायता फैला कि आज भी सोशल मीडिया पर इसे समेटा नहीं जा पा रहा है। जिलाध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष की एक चूक ने फिर से भाजपा के आरएसएस से जुड़े नेताओं को धर्म संकट में डाल दिया था। अंतिम समय में किए गए सुधार ने ऐसा बवाल करवाया जो अभी तक नहीं थम रहा है।
पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों में ये मुद्दा मनोरंजन का विषय बन गया है। सोशल मीडिया में इसे लेकर चल रही बहस में ये सामने आ रहा है कि भाजपा जिला संगठन और जनप्रतिनिधि की कार्यप्रणाली से हतोत्साहित होकर भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के कार्यक्रमों से विमुख हो रहे हैं। नेता समुचित कार्यकर्ता भी नहीं जुटा पा रहे हैं।
क्या थी व्यवस्था?
भाजपा के प्रदेश, जिला और मंडल प्रशिक्षण वर्ग में सात विषय हैं। जिनपर संभागियों को बोलना था। इन सात विषयों के सात सत्र हैं और हर सत्र का एक मुख्य वक्ता और अध्यक्ष है। जिले के वक्ताओं का प्रदेश स्तर पर प्रशिक्षण हुआ और उनको अंतिम स्वीकृति प्रदेश अध्यक्ष ने दी। इन्होंने 11 मार्च को सरूपगंज के में आयोजित जिला स्तरीय प्रशिक्षण वर्ग में मार्गदर्शन दिया। इसके बाद मंडल स्तर पर भी ये प्रशिक्षण वर्ग होने थे।
सूत्रों के अनुसार इसके सातों विषय के सत्र मुख्य वक्ता और अध्यक्ष मंडल अध्यक्षों को तय करके भेजने और जिलाध्यक्ष को इसे स्वीकृत करना था। सिरोही नगर मंडल के प्रशिक्षण वर्ग के लिए भी मंडल स्तर पर सात मुख्य वक्ताओं और अध्यक्षों के नाम भेजे गए। जिलाध्यक्ष ने इस सूची को अन्तिम रूप से जारी कर दिया। यहीं गड़बड़ी हो गई।
एक नाम देखते ही RSS से जुड़े कार्यकर्ताओं में हड़कंप
पार्टी सूत्रों के अनुसार सिरोही मंडल में भी सात सत्रों के लिए सात वक्ताओं और अध्यक्षों की सूची बननी थी। इसमें एक विषय था पार्टी का इतिहास और विकास। इसके लिए जिस भाजपा नेता का नाम पहले चर्चा में आया था उन्होंने वक्तव्य देने में अनिच्छा जताई। इसके बाद इस स्तर के लिए हरीश दवे का नाम दिया गया। इस सूची की स्वीकृति के लिए जिलाध्यक्ष को भी दिया गया। वहां से स्वीकृति के बाद ये सूची भाजपा के सोशल मीडिया समूहों में वायरल हो गई। सूची के वायरल होने के बाद हंगामा शुरू हुआ।
आरएसएस से जुड़े कार्यकर्ताओं को हरीश दवे का नाम खटका। सूत्रों के अनुसार उन्होंने इसे लेकर आरएसएस के पदाधिकारियों के सामने ये रायता फैलाया कि हरीश दवे के धरने से ही आरएसएस के प्रकल्प सेवा भारती को रामझरोखा के सामने मिली भूमि खटाई में पड़ गई। सूत्रों की मानें तो इसे लेकर संघ के नेताओं का दबाव बढ़ने लगा। सूची जारी हो चुकी थी ये बात फैलते फैलते रात हो गई। दूसरे दिन प्रशिक्षण था। तो प्रशिक्षण से पहले ही दूरभाष पर हरीश दवे को सूचित करके बताया कि इस सत्र के लिए उनके वक्तव्य को ड्रॉप कर दिया।
उनकी जगह इस सत्र में पूर्व मंडल अध्यक्ष को वक्ता बनाया गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर ये मुद्दा छाया रहा। सोशल मीडिया में इस कार्यक्रम में कार्यकताओं की समुचित संख्या नहीं होने और भाजपा नेताओं व जिला संगठन की कार्यप्रणाली से कार्यकर्ताओं के हतोत्साहित होने की चर्चा को फिर से केंद्र में ला दिया।
ये हुआ आयोजन
भाजपा जिला कार्यालय में हुए सिरोही मंडल के पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान के तहत मंडल कार्यशाला प्रशिक्षण शिविर में राज्यमंत्री ओटाराम देवासी,सांसद लुम्बाराम चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ रक्षा भंडारी ने संबोधित किया।प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य वीरेंद्र सिंह चौहान व नारायण देवासी, जिला महामंत्री गणपत सिंह राठौड़, भाजपा जिला उपाध्यक्ष ताराराम माली, जिला प्रवक्ता लोकेश खंडेलवाल, पूर्व मंडल अध्यक्ष बाबूलाल सगरवंशी व पूर्व मंडल अध्यक्ष महिपाल चारण ने सातों विषयों और अन्य मुद्दों पर प्रकाश डाला। सात सत्रों के अध्यक्ष सुखदेव आर्य, भुबाराम माली, अरुण ओझा, मगन मीणा, रामलाल मेघवाल, शिवलाल जीनगर, हेमलता पुरोहित थे।
भाजपा नगर अध्यक्ष चिराग रावल ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। मंच संचालन नगर महामंत्री कैलाश मेघवाल ने किया। कार्यक्रम में नगर महामंत्री प्रकाश पटेल,उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह चौहान, गोविंद सैनी, तेजराज पुरोहित ने संभाली। इसमें भाजपा जिलामंत्री हरजी राम चौधरी, भाजपा भाजपा जिला मीडिया प्रभारी रोहित खत्री, जिला कार्यालय मंत्री बाबू सिंह माकरोडा, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष गोपाल माली, युवा मोर्चा जिला महामंत्री अनिल प्रजपात, नारायण माली, गोविंद प्रजापत, महेंद्र सिंह परमार, इंदर सिंह मकवाना, भबूत प्रजपात, मानक चंद सोनी, ललित प्रजापत, अमृत सुथार, अजय भट्ट, चुनीलाल पटेल सहित पूर्व मंडल अध्यक्ष,भाजपा पदाधिकारी, बूथ अध्यक्ष सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे।


