मैं न होता, तो गहलोत की राजनीति ही खत्म हो जानी थी : गजेन्द्र सिंह शेखावत

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जयपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि मैं न होता, तो उनकी राजनीति ही खत्म हो जानी थी।

शेखावत ने सोशल मीडिया पर गहलोत पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं वीर दुर्गादास राठौड़ की परंपरा का अनुयायी हूं गहलोत जी, डर मेरे खून में नहीं है। आपको तो उल्टे अपने अप्रासंगिक हो जाने का भय सताता रहता है, इसलिए आप लगातार मेरे खिलाफ बोलते रहते हैं। सच तो यह है कि मैं न होता, तो आपकी राजनीति ही खत्म हो जानी थी।

उन्होंने कहा कि वह गहलोत की तरह किसी एक परिवार का सेवक नहीं हैं। उन्होंने कह कि गहलोत का पूरा राजनीतिक जीवन पदलोलुपता और सत्ता से चिपके रहने का प्रमाण रहा है, इसलिए कम से कम उनसे मुझे किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं। उन्होंने कहा कि गहलोत ध्यान भटकाने की राजनीति करते हैं जबकि मैं जनसेवा के अपने संकल्प पर प्रतिबद्ध हूं। बाकी समय स्वयं सबको जवाब दे देगा।

इसके बाद शेखावत ने भाजपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि वह वीर दुर्गादास राठौड़ की परंपरा से प्रेरणा लेते हैं और उनकी ही तरह एक सामान्य परिवार से आते हैं। उन्होंने कहा कि वीर दुर्गादास ने अपनी विचारधारा और स्वामीभक्ति के प्रति जिस निष्ठा और समर्पण का परिचय दिया, उसी भावना के साथ वह भी सार्वजनिक जीवन में कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि डर मेरे चरित्र और व्यक्तित्व का हिस्सा नहीं है। मैं अपने संकल्प और विचारों के प्रति पूरी निष्ठा के साथ काम करता हूं। उन्होंने कहा कि गहलात इतने वरिष्ठ नेता हैं कि उनकी हर टिप्पणी का जवाब देना आवश्यक नहीं है लेकिन यह कहना जरूरी है कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए कभी सत्ता, कभी आर्थिक संसाधनों और कभी मीडिया प्रभाव का उपयोग किया है।

उन्होंने कहा कि गहलोत 40 साल से राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस की धूरी बने हुए हैं लेकिन अब उन्हें इससे उतरने का भय सताने लगा है इसलिए वह तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में सचिन पायलट को नई जिम्मेदारी देने की चर्चा चल रही है इसलिए भी गहलोत अर्नगल टिप्पणियां कर रहे हैं।