
परीक्षित मिश्रा
सबगुरु न्यूज-सिरोही। जिला कलेक्टर ने रामझरोखा की कथित भूमि को खुर्द बुर्द करने के मामले में अपना आदेश जारी कर दिया है। इसके अनुसार सिरोही- 2 के खसरा संख्या 2711 का 0.31 हेक्टेयर विवादित भूखंड राज्य सरकार के नाम से दर्ज है न कि नगर परिषद सिरोही के नाम। ऐसे में नगर परिषद के द्वारा इस भूखंड विभाजन करके 69 ए के तहत पट्टे जारी करना अवैधानिक है। इसलिए इन पट्टों को निरस्त किए जाने की प्रक्रिया अमल में लाने के आदेश दिए गए।
अब कांग्रेस इस आदेश को ही दोषियों को बचाने वाला आदेश बता रही है। लेकिन, इस आदेश को लेकर विधि के जानकार लोगों को एक और चिंता सता रही है। वो ये कि यदि सिरोही जिला कलेक्टर के आदेश निति और विधि सम्मत है तो सिरोही शहर में नगरीय और पंचायत क्षेत्र में अतिक्रमण नियमन के तहत सरकार के विभिन्न अभियानों में पट्टा पाए लोगों को बेघर होना होगा। क्योंकि आज भी जिले ही नहीं प्रदेश में भी नगरीय पंचायत की सीमा में आई हजारों बीघा भूमियों को नगर निकाय या पंचायत के नाम से खातेदारी नहीं चढ़ाई गई है। इन पर विभिन्न अभियानों के तहत आवासीय आवश्यकता लिए अतिक्रमण नियमन पट्टे जारी कर दिए गए हैं। उन पर लोगों ने मकान आदि भी बना लिए हैं।
– नगरीय क्षेत्र की भूमि नगर को हस्तांतरण
राजस्व प्रावधान है कि नगर निकाय और पंचायत समिति की सीमा क्षेत्र में आने वाली राजस्व भूमिया उस नगर निकाय या पंचायत को हस्तांतरित करने का प्रावधान है। समय समय पर राज्य सरकार द्वारा कलेक्टरों को निकाय पंचायत क्षेत्रों में पड़ने वाली राजस्व विभाग की भूमियों को हस्तांतरित करने और राजस्व रिकॉर्ड में उनको निकायों और पंचायतों के नाम नामांतरित करने के आदेश आते रहे हैं। हर प्रशासन शहरों और गांवों के संग शिविर से पहले इसके आदेश आते रहे हैं। पुराना खसरा संख्या 2094 और नया खसरा संख्या 2711 की भूमि को सालों पहले ही निकाय को स्थानांतरित कर दी जानी चाहिए थी और अगर नहीं की गई है तो ये राजस्व विभाग की गलती रही होगी।
-पट्टे में स्पष्ट लिखा है
खसरा संख्या 2711 का पुराना खैर संख्या 2094 था। 2002 में इसी खरे का करीब 18000 वर्गफीट का अतिक्रमण नियमन का पट्टा रामझरोखा के महंत जयरामदास के।नाम से किया गया था। इसी पट्टे को विभाजित करके सिरोही नगर परिषद 69 ए के तहत 8 अलग अलग पट्टे जारी किए थे। जिसके बेचने को लेकर विवाद हुआ। 2002 को जारी मूल पट्टे में लिखा है कि खसरा संख्या 2094 नगर पालिका सीमा क्षेत्र में हैं।
ऐसे में राजस्व विभाग को इसे नगर पालिका सिरोही नाम से तभी नामांतरित कर दिया जाना चाहिए़ था। ये गलती जिला कलेक्टर कार्यालय के मातहत पटवार हल्के की है न कि नगर पालिका की। जिला कलेक्टर के आदेश और 2002 के पट्टे में विरोधाभास है। जिला कलेक्टर कार्यालय द्वारा नगर पालिका नाम से जमीन की जमाबंदी नहीं हो के आधार पर पट्टों को निरस्त करना स्पष्ट बता रहा है कि इस आदेश के माध्यम से इन पट्टों को निरस्त करने से आदेश को न्यायालय में चुनौती का आधार तैयार किया गया है न कि रामझरोखा मंदिर की जमीन को निर्विवाद रूप से आजाद करवाने की मंशा मन से।


