अजमेर शहर किसका है-माली का माली का…

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अजमेर।
महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर अजमेर शहर में शनिवार को उत्साह, श्रद्धा और सामाजिक एकता का अनूठा संगम देखने को मिला। माली-सैनी समाज के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रमों ने पूरे शहर को एक रंग में रंग दिया। सुबह से शुरू हुए आयोजन देर रात तक चलते रहे, जिनमें बड़ी संख्या में समाज के लोगों के साथ आमजन ने भी भागीदारी निभाई।

जयंती का मुख्य आयोजन अजमेर क्लब चौराहे स्थित ज्योतिबा फुले स्मारक पर आयोजित किया गया, जहां शाम होते-होते मेले जैसा माहौल बन गया। इससे पूर्व आदर्श नगर स्थित मनुहार गार्डन से दोपहर बाद लगभग 4 बजे भव्य वाहन रैली का शुभारंभ हुआ। सैकड़ों की संख्या में दोपहिया और चारपहिया वाहनों का काफिला डीजे, बैंड-बाजों और देशभक्ति व सामाजिक जागरूकता गीतों के साथ शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा।

रैली का मार्ग नगरा, मार्टिंडल ब्रिज, गर्वमेंट कॉलेज तिराहा, केसरगंज, स्टेशन रोड, मदार गेट, चूड़ी बाजार, नया बाजार, आगरा गेट, जयपुर रोड और बस स्टैंड चौराहा होते हुए शाम करीब 8 बजे स्मारक स्थल पर समाप्त हुआ। इस दौरान पूरे मार्ग में जगह-जगह समाज बंधुओं, व्यापारियों और विभिन्न संगठनों द्वारा पुष्पवर्षा कर रैली का भव्य स्वागत किया गया। मदार गेट क्षेत्र में रैली के पहुंचते ही ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ विशेष स्वागत किया गया, जिसने माहौल को और भी उत्साहपूर्ण बना दिया।


रैली की खास बात इसमें शामिल आकर्षक झांकियां, पारंपरिक गेर नृत्य और कलाकारों की प्रस्तुतियां रहीं। इन झांकियों के माध्यम से महात्मा फुले के जीवन, उनके सामाजिक सुधार कार्यों और शिक्षा के प्रति उनके योगदान को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की मंडलियों ने अपनी रंगारंग प्रस्तुतियों से लोगों का दिल जीत लिया और जगह-जगह रुककर दर्शकों ने उनका उत्साहवर्धन किया।

इस दौरान प्रतिभागियों के हाथों में समाज सुधार, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और समानता के संदेश देने वाले बैनर और पोस्टर नजर आए। शिक्षा ही सशक्तीकरण का आधार है और समानता से ही समाज का विकास संभव है जैसे नारों ने लोगों को प्रेरित किया। पूरे मार्ग में ज्योतिबा फुले अमर रहें और संत लिखमीदास जी महाराज के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा।


शाम को अजमेर क्लब चैराहे स्थित महत्मा ज्येतिबा स्मारक स्थल पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां महात्मा फुले की प्रतिमा को आकर्षक रंगीन रोशनी से सजाया गया। प्रतिमा पर फूलों की मालाएं अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लेकर फुले के आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया और उनके सामाजिक योगदान को याद किया।

कार्यक्रम के दौरान दीपदान का विशेष आयोजन किया गया, जिसमें हजारों दीपक प्रज्वलित कर समाज में प्रकाश, ज्ञान और जागरूकता का संदेश दिया गया। दीपों की रोशनी से पूरा स्मारक परिसर जगमगा उठा और माली सैनी समाज के उत्साह का दृश्य देखते ही बन रहा था। इसके बाद हुई भव्य आतिशबाजी ने आसमान को रंग-बिरंगी रोशनी से भर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया। महाआरती से पहले हुई जोधपुर के कलाकारों की गेर नृत्य प्रस्तुति ने समां बांध दिया।

समाज के वरिष्ठजनों ने बताया कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने अपने जीवन में शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के लिए जो संघर्ष किया, वह आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। ऐसे आयोजन न केवल उनके विचारों को आगे बढ़ाने का माध्यम हैं, बल्कि समाज में एकता और जागरूकता को भी मजबूत करते हैं। माली सैनी समाज के गणमान्य त्रिलोकचंद इंदौरा, पूनमचंद मारोठिया, घीसूलाल गढवाल, धर्मेन्द्र गहलोत, महेश चौहान, जितेन्द्र मारोठिया, दिलीप गढवाल आदि का मार्गदर्शन रहा।

भाजपा और कांग्रेस में होड

अजमेर में मनाई गई महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती ना केवल माली सैनी समाज के साथ साथ बल्कि अन्य के लिए भी सामाजिक चेतना और एकजुटता का संदेश देने वाली रही। मुख्य आयोजन स्थल पर एक स्वर में गूंजे नारे अजमेर शहर किसका है- माली का माली का… के उदघोष के जरिए माली-सैनी समाज ने अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास भी करा दिया। खास बात यह थी कि इस बार प्रमुख राजीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं में महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती के आयोजन तथा इसमें भागीदारी करने की होड लगी रही। सबने इसे अपने अपने तरीके से राजनीति लाभ सुनिश्चित करने का गुणाभाग लगाया। समाज के भीतर भी दोनों ही पार्टियों के समर्थक अप्रत्यक्ष रूप से अपने अपने समर्थित दलों के नेताओं की मिजाजपुर्सी में लगे रहे। विभिन्न कार्यक्रमों में कांंग्रेस की ओर से जिलाध्यक्ष राजकुमार जयपाल, श्रीगोपाल बाहेती, विजय जैन, द्रोपदी देवी कोली वहीं बीजेपी की तरफ से जिलाध्यक्ष रमेश सोनी, विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।