एमडीएस विश्वविद्यालय और डॉ. शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय का एमओयू

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दिव्यांगजन सशक्तीकरण को नई दिशा
अजमेर। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर एवं डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ के मध्य दिव्यांगजन शिक्षा, पुनर्वास एवं समावेशी उच्च शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक महत्त्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता न केवल दो विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग का प्रतीक है, बल्कि भारत में समावेशी शिक्षा को व्यावहारिक रूप से सशक्त करने की दिशा में एक दूरगामी और ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

यह गरिमामय समारोह महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर सुरेश कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता तथा डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर संजय सिंह की विशिष्ट उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में दोनों विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्राध्यापकगण, प्रशासनिक अधिकारीगण, शोधार्थी एवं विषय विशेषज्ञ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिससे इस सहयोग के प्रति अकादमिक जगत की गंभीरता और उत्साह स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ।

इस मौके पर प्रो. संजय सिंह ने डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की विशिष्टताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2008 में स्थापित यह विश्वविद्यालय दिव्यांगजन शिक्षा के क्षेत्र में देश का एक अग्रणी संस्थान है, जिसकी आधारभूत अवधारणा रिवर्स इन्टीग्रेशन है। इस अभिनव मॉडल में दिव्यांग और गैर- दिव्यांग विद्यार्थी समान रूप से एक ही शैक्षणिक वातावरण में अध्ययन करते हैं, जिससे न केवल दिव्यांग विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है, बल्कि गैर दिव्यांग विद्यार्थियों में सहानुभूति, सहयोग एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित होती है। यह मॉडल पारंपरिक समावेशी शिक्षा से आगे बढ़कर एक संवेदनशील एवं सहभागितापूर्ण समाज निर्माण की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने विश्वविद्यालय में उपलब्ध अत्याधुनिक एवं दिव्यांग-अनुकूल सुविधाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि परिसर पूर्णतः सुलभ (Accessible) है, जहां टैक्टाइल गाइडेड पाथवे, उन्नत ब्रेल लाइब्रेरी, त्वरित ब्रेल प्रिंटिंग सुविधा, स्पीच एवं ऑडियोलॉजी क्लिनिक, कृत्रिम अंग निर्माण एवं प्रशिक्षण केंद्र जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय में पैरा-स्पोर्ट्स को भी विशेष महत्व दिया गया है, जिसके अंतर्गत सिंथेटिक ट्रैक, इनडोर स्टेडियम एवं व्हीलचेयर खेलों की सुविधाएं विकसित की गई हैं। दिव्यांग विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा, आवास, भोजन एवं छात्रवृत्ति उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया प्रो संजय सिंह ने बताया कि सहायक तकनीक (Assistive Technology) के माध्यम से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को लैपटॉप पर स्वतंत्र रूप से परीक्षा देने हेतु प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे सह लेखक (स्क्राइबर) पर निर्भरता से मुक्त हो सकें। साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट चश्मों एवं साइन लैंग्वेज के स्वचालित रूपांतरण जैसी अत्याधुनिक परियोजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न तकनीकी संस्थानों के सहयोग से नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

एमओयू के अंतर्गत दोनों विश्वविद्यालयों के बीच बहुआयामी सहयोग स्थापित किया जाएगा, जिसमें विशेष रूप से राजस्थान के दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए तैयार करने हेतु शैक्षणिक मार्गदर्शन, मानव संसाधन विकास केंद्र (HRDC) के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम, संयुक्त शोध परियोजनाएं, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन, तथा फैकल्टी एवं विद्यार्थियों के आदान-प्रदान को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त योग विज्ञान एवं मानव चेतना विभाग तथा पुनर्वास विज्ञान के संयुक्त अध्ययन एवं अनुसंधान की संभावनाएं भी इस सहयोग के माध्यम से साकार होंगी।

प्रो. संजय सिंह ने अपने संबोधन में ऑटिज्म एवं बौद्धिक अक्षमता के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में यह एक गंभीर सामाजिक एवं शैक्षणिक चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ दशक में इन मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके पीछे बदलती जीवनशैली, तकनीकी निर्भरता एवं पर्यावरणीय कारण प्रमुख हैं। इस समस्या के समाधान के लिए विश्वविद्यालय द्वारा काउंसलिंग सेंटर, ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली एवं परिवार सहयोग कार्यक्रम प्रारम्भ करने की योजना बनाई जा रही है।

इस अवसर पर कुलगुरु प्रोफेसर सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय सदैव समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि यह एमओयू केवल एक औपचारिक समझौता नहीं, बल्कि एक सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन है, जिसके माध्यम से दिव्यांग विद्यार्थियों को मुख्यधारा में सशक्त रूप से स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग नई शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप समावेशी, सुलभ एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा को बढ़ावा देगा। प्रो अग्रवाल ने कहा कि यह एमओयू दोनों विश्वविद्यालयों के बीच ज्ञान, अनुभव एवं संसाधनों के प्रभावी आदान-प्रदान का माध्यम बनेगा तथा दिव्यांगजन शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त, संवेदनशील एवं नवाचारपूर्ण शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

कार्यक्रम में प्रो. अरविंद पारिक, प्रो. सुभाष चंद्र, प्रो. मोनिका भटनागर, प्रो. ऋतु माथुर, डॉ. आशीष पारिक, डॉ. असीम जयंती देवी, कैलाश चंद्र शर्मा (कुल सचिव), नेहा शर्मा (वित्त नियंत्रक), डॉ. सूरजमल राव (सहायक कुल सचिव), डॉ लक्ष्मी कान्त शर्मा सहित अनेक गणमान्य प्रतिनिधियों साथ ही लखनऊ से डॉ. विजय शंकर शर्मा की उपस्थिति रही।