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झटपट बनाए चटपटी चाइनीज मैगी

chinees maggi recipe in hindi

2 मिनिट में बनने वाली मैगी हर किसी को पसंद आती हैं खासकर युवा को क्युकि ये झटपट तैयार हो जाती। झटपट बनने वाली मैगी के ओर तरीका हम आपको आज बताने जा रहे हैं। जी हाँ आज हम आपको चाइनीज मैगी की रेसिपी बताने जा रहे हैं। जानिए इसकी विधि।

सामग्री:
मैगी(उबली हुई)
लहसुन- 1 फली
ऑलिव ऑयल- 1 टेबलस्पून
अदरक- 1 फली
प्याज(कटे हुए)- 1 कप
गाजर और फलियां(कटी हुई)- 1 कप
नमक स्वादअनुसार
टोमैटो सॉस- 1 टेबलस्पून
सोया सॉस- 1/2 टेबलस्पून
मैगी मसाला

विधि:
एक पैन में तेल डालकर गर्म कर लें। अब इसमें लहसुन और अदरक डालकर हल्का भूरा कर लें। अब इसमें प्याज, गाजर और फलियां डालकर अच्छी तरह से मिलाएं। अब इसमें नमक, टोमैटो सॉस,सोया सॉस, और मैगी मसाला डालकर अच्छी तरह से मिक्स करके पकाएं। अब इस मिश्रण में मैगी डालकर अच्छी तरह से मिक्स करें और पकाएं। चाइनीस मैगी तैयार है।

शिमला मिर्ची की बर्फी

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अजमेर दक्षिण में पेयजल लाइनों के लिए 132.34 लाख स्वीकृत 

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अजमेर। महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल द्वारा अजमेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्रा में पेयजल के विकास कार्यों को गति प्रदान करते हुए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के माध्यम से 132.34 लाख रूपए के कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई है।

जयसमंद और राजसमंद छलकेंगी एक साथ

सबगुरु न्यूज उदयपुर। मेवाड़ की दो सबसे बड़ी झीलें 1973 के बाद पहली बार एक साथ छलकने को तैयार है। एक ओर उदयपुर जिले की जयसमंद झील व दूसरी ओर राजसमंद जिले की राजसमंद झील। 27.5 फीट भराव क्षमता वाली जयसमंद झील तो लगातार दूसरे साल छलकने को आतुर है। जयसमंद झील का जलस्तर 26 फीट नौ इंच के स्तर को छू गया।

अब यह पूर्ण भराव क्षमता से महज 6 इंच दूर है। वहीं राजसमंद झील का जल स्तर 29 फीट के पार हो गया है। बरसात का दौर कमजोर पड़ने से अब पानी को इस आंकड़े तक पहुंचने में कम से कम दो दिन और लग सकता हैं।

जल संसाधन विभाग के अनुसार दोनों झीलों में पानी की आवक बनी हुई है लेकिन दो दिन से बारिश थमने से आवक में कुछ कमी आई है। आवक जारी रहने और बरसात के आने पर यह अगले दो दिन में कभी छलक सकती है। ऐसा होने के साथ ही मेवाड़ मे ये दोनों झील एक बार फिर एक साथ छलक कर नई इबारत गढेगी। पिछले 44 वर्षों में राजसमंद झील 1973, 1994, 2006 व 2016 में ओवरफ्लो हुई। वहीं राजसमंद झील वर्ष 1973 के बाद अब तक एक बार भी नहीं छलकी है। ऐसे में राजसमंद के छलकने का पूरे मेवाड़ को इंतजार है।

एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित मीठे पानी की झील जयसमंद है तो राजसमंद अपनी बांध पर लगे दुनिया सके सबसे बड़े अभिलेख राजप्रशस्ति के लिए प्रसिद्ध है। विश्व विख्यात जयसमंद झील में 9 नदियां और 99 नालों का पानी समाहित होता है। वहीं राजसमंद झील के बांध पर बनी नौ चैकियां अपनी शिल्पकारी और सौन्दर्य के लिए दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करती है।

जयसमंद झील

जयसमंद झील वर्ष 1730 में बनकर तैयार हुई एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की इस झील के ओवरफ्लो होने का तरीका भी अनूठा है। भीण्डर क्षेत्र के केरेश्वर क्षेत्र से निकलने वाली गोमती नदी पर महाराज जयसिंह ने इसका निर्माण ऐसा करवाया कि पाल पर सबसे ऊपर बने 6 हाथी की सूंड को पानी पार करते ही झील ओवरफ्लो हो जाती थी। हालांकि झील के इतिहास में ऐसा एक बार ही हो पाया। वर्ष 1973 में पहली बार झील इसी तरह ओवरफ्लो हुई तो डूब क्षेत्र के कई गांवों में हाहाकार मच गया। बाद में रपट की ऊंचाई 1973 के हालात को देखकर घटा दी गई। नई व्यवस्था में पाल पर बने आखिरी हाथी के पैरों में बंधी जंजीरों को पानी छू ले तो समझो जयसमंद ओवरफ्लो हो गया। उदयपुर के तत्कालीन महाराणा जयसिंह द्वारा 14 हजार 400 मीटर लंबाई एवं 9 हजार 500 मीटर चैड़ाई में में निर्मित यह कृत्रिम झील एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी का स्वरूप मानी जाती है। दो पहाडियों के बीच में ढेबर दर्रा को कृत्रिम झील का स्वरूप दिया गया।

राजसमंद झील

वहीं, राजसमंद झील का निमार्ण 1662 ईस्वी में मेवाड़ के महाराणा राजसिंह ने आमेट क्षेत्र के रामदरबार से निकलने वाली नदी गोमती नदी पर करवाया था। यह लगभग 1.75 मील चैड़ी, 6.4 किमी लंबी और 30 फीट गहरी है। झील के दक्षिणी छोर पर, विशाल तटबंध नौचैकी सफेद संगमरमर से बना है। इसमें संगमरमर छतों और पत्थर के कदम हैं जो झील के पानी को छूते हैं। यहां पांच तोरण बने हैं और करीब नौ चबूतरे बने हैं। इन नौ चबूतरों में प्रत्येक में नौ सीढ़ियां हैं। साथ ही तटबंध की पूरी लम्बाई में नौ ये खूबसूरत से नक्काशीदार मंडप बने हैं। इन्हें सूरज की तस्वीरें, रथ, देवता, पक्षियों और विस्तृत नक्काशी के साथ सज्जित किया है। नौचैकी मेवाड़ पर लगे अभिलेख राजप्रशस्ति में 1017 पदों में मेवाड़ का इतिहास अंकित है।

11 शिक्षकों को जिला स्तरीय तथा 6 शिक्षकों को ब्लाक लेवल सम्मान

अजमेर। नगर निगम के महापौर धर्मेन्द्र गहलोत ने कहा है कि गुरूजन समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं। उनसे नम्रता के साथ व्यक्ति सीख कर समाज में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण शुरू


सबगुरु न्यूज उदयपुर। उदयपुर-अहमदाबाद आमान परिवर्तन के बाद उदयपुर सिटी स्टेशन पर बढ़ने वाले यात्री भार को ध्यान में रखकर इसका आधुनिकीकरण का काम लम्बे समय से किया जा रहा था। अब इस काम के असर भी देखने को मिल रहे हैं। सिटी स्टेशन पर लोगों के चढ़ने के लिए एस्केलेटर बनकर तैयार है। वहीं, दो लिफ्ट का भी निर्माण किया जा रहा है। इससे पहले रेलवे ने शहरवासियों की मांग पर और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सेन्ट्रल एरिया वाली सड़क पर सेकंड एंट्री गेट भी खोल दिया था।

इन कामों से उदयपुर को आस बंधी है कि जल्द ही उदयपुर-अहमदाबाद आमान परिर्वतन का काम पूरा हो जाएगा। साथ जयपुर-अजमेर और अजमेर-उदयपुर को इलेक्ट्रिक गेज करने पर भी रेलवे काम कर रहा है। साथ ही चित्तौड़ उदयपुर को डबल गेज करने का सर्वे भी होना है। ऐसे में उदयपुर में आने वाले सालों में रेलवे क्रांति होने के आसार बनने लगे हैं। इससे उदयपुर के लोगों को आस है कि पर्यटन और व्यापार में भी खासी बढ़ोतरी होगी।

सिटी रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण से प्लेटफार्म पर आने-जाने में यात्रियों का समय बचेगा और बुजुर्गों व विकलांगों को राहत मिलेगी। प्लेटफार्म नंबर चार और पांच का कार्य भी चल रहा है। यहां भी आने-जाने के लिए भी सुविधाओं का विकास करना होगा। सिटी स्टेशन की सेकंड इंट्री पर भी एस्केलेटर और लिफ्ट की आवश्यकता है। आगामी समय में यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी को देखते हुए सिटी स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) का निर्माण कार्य भी चल रहा है।

उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन अधीक्षक सुगनचंद वर्मा ने बताया सिटी रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट व एस्केलेटर का कार्य लगभग एक वर्ष पूर्व ही मंजूर हो गया था। उपकरण उपलब्ध नहीं होने से इसमें काफी देरी हुई। अब इस काम कार्य में तेजी आ गई है। एस्केलेटर की सीढ़ियां लगाई जा रही है। लिफ्ट के लिए निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। प्लेटफार्म नंबर एक पर एस्केलेटर तथा दो एवं तीन नंबर पर लिफ्ट लगाई गई है। जल्द ही दोनों का लोकार्पण किया जाएगा।