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आरबीआई के डिप्टी गवर्नरों का काम नए सिरे से बांटा

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर उर्जित पटेल ने चार डिप्टी गवर्नर के बीच कामकाज नए सिरे से बांटा। विरल वी. आचार्य के डिप्टी गवर्नर का पद संभालने के बाद गवर्नर ने कामकाज का नए सिरे से बंटवारा किया है।
रिजर्व बैंक ने आज एक जारी विज्ञप्ति में कहा, आचार्य को मौद्रिक नीति विभाग के साथ साथ आर्थिक नीति एवं शोध, कापरेरेट रणनीति और बजट तथा वित्तीय बाजार संचालन विभाग का काम दिया गया है। अमेरिका में न्यूयार्क यूनिवर्सिटी में वित्त विभाग में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर आचार्य को पिछले महीने रिजर्व बैंक का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया गया।
सबसे वरिष्ठ डिप्टी गवर्नर आर. गांधी अब तक इस विभाग का काम देखते रहे हैं। पहले ये सभी विभाग डिप्टी गवर्नर रहते हुये उर्जित पटेल देख रहे थे। उनके गवर्नर बनने के बाद आर. गांधी इन विभाग का जिम्मा संभाले हुये थे। डिप्टी गवर्नर एस.एस. मुंदड़ा को ग्राहक शिक्षा एवं संरक्षण और मानव संसाधन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक अन्य डिप्टी गवर्नर एन.एस. विश्वनाथन बैंकिंग नियमन और संचार विभाग का कामकाज देखेंगे।
IIT मुंबई के छात्र रहे आचार्य ने यहां से कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग में 1995 में बी-टेक किया। वर्ष 2001 में उन्होंने न्यूयार्क यूनिवर्सिटी से फाइनेंस में P.hd की। वह 2001 से 2008 तक लंदन बिजनेस स्कूल में रहे तथा कई शोध संस्थानों में उन्होंनें काम किया है।
बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा ने की समान नागरिक संहिता की पैरवी

जयपुर। बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन ने देश में समान नागरिक संहिता की वकालात की है।
बजट में 3 लाख रुपए तक हो सकती है कर छूट सीमा: SBI

नई दिल्ली। सरकार नोटबंदी के बाद बने हालात को देखते हुये अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिये बजट से पहले कई बदलाव कर सकती है। सरकार प्रत्यक्ष करों में व्यापक फेरबदल कर सकती है। आयकर छूट सीमा को ढाई लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया जा सकता है और बैंकों में 5 साल की सावधि जमा के बजाय तीन साल की सावधि जमा पर कर छूट दी जा सकती है।
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शोध रिपोर्ट ‘ईकोरैप’ के मुताबिक आगामी बजट में व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा बढ़ सकती है। आयकर की धारा 80C के तहत विभिन्न निवेश और बचत पर मिलने वाली छूट सीमा भी बढ़ाई जा सकती है। आवास रिण के ब्याज पर भी कर छूट की सीमा बढ़ सकती है।
SBI की ईकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा मौजूदा 2.5 लाख रुपये से बढक़र तीन लाख रपये सालाना हो सकती है। धारा 80सी के तहत विभिन्न बचतों और निवेश पर मिलने वाली कर छूट सीमा 1.5 लाख से बढक़र दो लाख रपये की जा सकती है। आवास रिण के ब्याज पर मिलने वाली कर छूट सीमा दो लाख से बढक़र तीन लाख रपये की जा सकती है। इसके अलावा बैंकों में पांच साल की सावधि जमा के बजाय तीन साल की जमा पर कर छूट मिल सकती है।’’
स्टेट बैंक शोध की यह रिपोर्ट मुख्य आर्थिक सलाहकार और महा प्रबंधक आर्थिक शोध विभाग सौम्या कांती घोष ने तैयार किया है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इस तरह की छूट देने से सरकारी खजाने पर 35,300 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा लेकिन हमें आय घोषणा योजना-दो के राजस्व और रिजर्व बैंक की निरस्त नोट देनदारी से संतुलित होने की उम्मीद है।’
SBI शोध के अनुसार आय घोषणा योजना आईडीएस के तहत करीब 50,000 करोड़ रपये की कर वसूली और नोटबंदी की वजह से निरस्त देनदारी के तौर पर करीब 75,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है।
नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था में गतिविधियां बढ़ारने के लिये प्रत्यक्ष करों में यह फेरबदल हो सकता है। वर्तमान में ढाई लाख रुपये तक की व्यक्तिगत आय पर कोई कर नहीं है। ढाई लाख से पांच लाख तक 10 फीसदी, 5 से 10 लाख रुपये की वार्षिक आय पर 20 फीसदी और दस लाख रपये से ज्यादा की आय पर 30 फीसदी की दर से आयकर लगता है।
नोटबंदी से अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ है।चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि 7.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है जबकि पिछले साल यह 7.6 फीसदी रही थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल बजट को लेकर चुनौतियां पहले से ज्यादा हैं।
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