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Test cricket should be played with the red ball by Gautam Gambhir
ग्रेटर नोएडा। भारत के पूर्व ओपनर गौतम गंभीर ने आज दलीप ट्रॉफी फाइनल के बाद पारंपरिक खेल यानी लाल गेंद के साथ टेस्ट क्रिकेट खेलने का पक्ष लिया, साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के प्रयोग सिर्फ टी-20 क्रिकेट में ही किए जाने चाहिए।
गंभीर ने कहा, ‘मैं परंपरावादी हूं जो पुराने तरीके से क्रिकेट खेलना पसंद करता है। यह मेरी निजी राय है लेकिन मुझे लगता है कि इस तरह के बदलाव और प्रयोग सिर्फ टी-20 क्रिकेट में ही किए जाने चाहिए। पांच दिवसीय मैच और टेस्ट मुकाबले लाल गेंद से ही खेले जाने चाहिए। कम से कम मैं ऐसा ही महसूस करता हूं।’
गंभीर ने टूर्नामेंट में पांच पारियों में 71.20 के औसत से 356 रन जुटाए हैं। लेकिन उन्हें फिर भी लगता है कि गुलाबी गेंद से दूधिया रोशनी में परेसानी है। गौतम ने 5 पारियों में 4 अर्धशतक बनाए और अपनी टीम भारत ब्लू को फ़ाइनल में 355 रनों से जीत दिलाते हुए चैंपियन भी बनाया।
मुम्बई। बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की फिल्में पिछले काफी सालों से बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड कमाई कर रही है। इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा कमाई करनेवाले स्टार्स की लिस्ट में सलमान टॉप लिस्ट में हैं लेकिन इतनी कमाई के बावजूद भी वो अभी तक बांद्रा के अपने गैलेक्सी अपार्टमेंट के एक मामूली से फ्लैट में रहते हैं।
लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि सलमान अपनी फैमिली के साथ लिंकिंग रोड के लिटिल स्टार बिल्डिंग में शिफ्ट होने जा रहे हैं।
एक अखबार की रिपोर्ट की माने तो सलमान ने लिटिल स्टार अपनी फैमिली के लिए खरीदा है। फिलहाल घर में काम चल रहा है और जैसे ही यह काम पूरा होगा खान फैमिली उसमें शिफ्ट हो जाएगी. हालांकि गैलेक्सी अपार्टमेंट खान परिवार को बहुत प्रिय है और नया घर लेने का फैसला इन्होंने क्यों किया है ये तो कोई नहीं जानता।
सलमान फिलहाल कबीर खान की फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ की शूटिंग में व्यस्त हैं। ‘ट्यूबलाइट’ 1962 के सिनो-इंडो वॉर पर बनी एक पीरियड फिल्म है। इसके बाद सलमान 2012 की फिल्म ‘एक था टाइगर’ के सीक्वल ‘टाइगर जिंदा है’ में भी नजर आएंगे।
23 IAS and 130 PCS officers transferred by Uttar Pradesh government
लखनऊ। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश की सपा सरकार पिछले कई दिनों से प्रशासनिक अधिकारियों का ताबड़तोड़ तबादला कर रही है। राज्य सरकार ने बुधवार को भी कई जिलाधिकारियों समेत 23 आईएएस और 130 पीसीएस अफसरों की तैनाती में फेरबदल किया।
भारत में साहित्यकारों ने तो विश्वस्तरीय रचना संसार रचा है लेकिन साहित्य के इन पुराधाओं पर किसी ने कोई विशेष काम नहीं किया। विदेशी भाषाओं में ऐसा नहीं है। साहित्यकारों की एक पूरी टीम ने शेक्सपियर और अन्य लेखकों पर उतना काम कर लिया जितना इन लेखकों ने साहित्य नहीं रचा।
ऐसे में युवा रचनाकार डॉ. कायनात काजी की कृष्णा सोबती के साहित्य और उनके जीवन पर लिखी पुस्तक ‘कृष्णा सोबती का साहित्य और समाज’ तपती दुपहरी में हवा के ठंडे झोंके जैसा अहसास देती है। जिंदगीनामा को छोड़ दें तो कृष्णा सोबती मित्रो और रत्ती के बगैर अधूरी हैं।
कायनात ने उनके कथा संसार को समझने के साथ ही सोबती के जीवन दर्शन का भी गहन अध्ययन किया है और कृष्णा के कथाकार कृष्णा बनने तक के सफर को शब्दों में खूबसूरती से पिरोया है।
कृष्णा सोबती नारी मन के गूढ़ रहस्यों को उजागर करने और महिलाओं के विद्रोह को सुर देने वाले साहित्यकारों की जमात से आती हैँ। उन्होंने इतिहास को जिया है और देश के विभाजन का दर्द सहा है। जिंदगी का फलसफा कृष्णा जी के उपन्यास और कहानियों में झलकता है।
शरतचंद्र की तरह उनका लेखन भी हमेशा वक्त से आगे रहा। हिंदी साहित्य के उस दौर में जब कहानियां और किस्से घर-परिवार के झगड़ों और व्यक्ति के संतापों पर केंद्रित थे, उन्होंने कालजयी उपन्यास ‘मित्रो मरजानी’ लिखने का साहस किया। ‘सूरजमुखी अंधेरे के’, ‘डार से बिछुड़ी’, ‘जिंदगीनामा’, ‘दिलोदानिश’, ‘समय सरगम’ में उन्होंने कथा को उन्होंने नए आयाम दिए।
उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, कथा चून्द्रमणि पुरस्कार, साहित्य शिरोमणि पुरस्कार, हिंदी अकादमी अवार्ड, शलाका सम्मान, साहित्य अकादमी फेलोशिप मिल चुकी हैं। कायनात ने बड़ी बारीकी से कृष्णा जी के जीवन के तमाम पहलुओं को छुआ है।
यही नहीं मित्रो और रत्ती के पुर्नपाठ के बहाने समाज के अधखुले पन्नों को खोलने की कोशिश की है। इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने कृष्णा जी के जीवन परिचय के साथ ही उस दौर को ताजा कर दिया और उनके साहित्य में महिला किरदारों के मनौवैज्ञानिक तत्व को पाठकों के साथ साझा किया है। कायनात की लिखी इस पुस्तक को कृष्णा जी पर चलता-फिरता विकीपीडिया माना जा सकता है।
कायनात ने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और फोटोग्राफी में सिद्धहस्त हैँ। उन्होंने लंबे समय तक संडे इंडियन को अपनी सेवाएं दीं और फिलवक्त शिव नाडर विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा से जुड़ी हुई हैं। उन्हें हिंदी में पहले ट्रैवल ब्लॉग राहगीरी (rahgiri.com) शुरू करने का गौरव हासिल है। फोटोग्राफी के प्रति जुनून की हद तक दीवानगी उन्हें देश के दूसरे फोटोग्राफरों से अलग करती है।