
भारत परंपराओं और उत्सवों का देश है। शायद ही यहां ऐसा कोई दिन बीतता होगा, जिस दिन कोई व्रत, त्यौहार, जयंती या अन्य कोई पुण्य तिथि उत्सव न बनता हो, यानि कि हर रोज देश के एक कोने से लेकर दूसरे सिरे तक कुछ न कुछ मंगलमय कामनाओं का गीत गान यहां सतत् चलता रहता है। ऐसे में किसी एक पक्ष से जुड़े परंपरागत उत्सवों में होने वाले कार्यों को यह कह कर रोक दिया जाए कि इससे पशु हानि या पशुओं पर अत्याचार हो रहा है, तो जरूर सोचना होगा कि आखिर एक वर्ग को ही क्यों इस बात के लिए निशाना बनाया जा सकता है?