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क्रीडा भारती के त्रिदिवसीय राष्ट्रीय खेल संगम का श्रीगणेश

krida bharti organizing three days rashtriya khel sangh
krida bharti organizing three days rashtriya khel sangh

जयपुर। भारतीय पारंपरिक खेलों को प्रोत्साहित कर जन-जन तक प्रचारित एवं प्रसारित करने में लगी संस्था क्रीडा भारती द्वारा 25 से 27 दिसम्बर तक होने वाले त्रिदिवसीय राष्ट्रीय खेल संगम का प्रारम्भ केशव विद्यापीठ जामडोली, जयपुर में दीप प्रज्जवलन से हुआ।

यूं मोदी अचानक पहुंचे पाकिस्तान, लिखी रिश्तों की नई इबारत

pm narendra modi 's diplomatic dare revives hopes for peace
pm narendra modi ‘s diplomatic dare revives hopes for peace

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यूं अचानक पाकिस्तान पहुंच जाना किसी को अचंभित न करे, भला ये कैसे हो सकता है। उनके इस कदम ने आज बड़े से बड़े राजनयिक और कूटनीतिज्ञ को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रिश्तों की अहमियत पारिवारिक, सामाजिक, संगठनात्मक या सियासत के स्तर पर ही जरूरी नहीं,

मोदी ने छुए नवाज शरीफ की मां के पैर मिला आशीर्वाद

pm narendra modi touched the feet of sharif's mother in lahore
pm narendra modi touched the feet of sharif’s mother in lahore

लाहौर। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मिलने लाहौर पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने उनकी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यह सब अचानक से घटित हुआ। दरअसल, मोदी के स्वागत के लिए शरीफ के बेटे हसन और परिवार के दूसरे सदस्य बाहर हॉल में पहुंचे. उनके साथ शरीफ की मां भी थीं।

कलश यात्रा के बाद शुरू हुई भागवत कथा

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सबगुरु न्यूज-सिरोही। खण्डेलवाल छात्रावास में भागवत कथा वाचन शुरू होने से पहले शुक्रवार को शहर में कलश यात्रा निकाली गई। राजाराम महाराज एवं कथावाचक सरस प्रवक्ता बालसंत बांके बिहारी महाराज के सान्निध्य में निकली कलश एवं पोथी यात्रा में आस्था श्रद्धा व भक्ति का भाव उमड पडा। इस अवसर पर भागवत् कथारस का पान करने के साथ श्रद्धालुओं ने भक्ति सरिता में गोते लगाये।

हिन्दू समाज का संगठित होना अत्यंत आवश्यक : साध्वी हेमलता शास्त्री

sadhvi Hemalatha Shastri Speech at saraswatipuram
sadhvi Hemalatha Shastri Speech at saraswatipuram

जावरा। ऊंच-नीच, अगडे-पिछड़े से, वर्ण-दलित, गरीब-अमीर जैसे भाव हिन्दू समाज के लिए अत्यन्त घातक है और ये राष्ट्र को पतन की और ले जाने वाले हैं। वेद-पुराण आदि शास्त्रों में इनके लिए कोई स्थान नहीं दिया गया है। ये भाव विकृति के सूचक है।