
कानपुर। बड़े अरमानों से पिता ने बेटी के लिए वर चुना, तो बेटी ने भी उसे अपना सौभाग्य समक्षकर जन्म-जन्मांतर के लिए अपना पति स्वीकार कर हमेशा सुख-दुख में जीवन भर साथ रहने की सौंगध ले ली। लेकिन मायके वालों को यह नहीं पता था कि जिसके हाथ में वो अपनी बेटी सौंप रहे है वों ही पति उसका रक्षक नहीं भक्षक बन जायेगा।