
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन राव भागवत ने सेवा के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि सेवा धर्म हैं जिसमें जीवन दान कर देना चाहिये, यह हमारी प्राचीन परंपरा का आदेश है। ऐसे में सबको सुखी देखना और इसके लिए स्वयं को अनुशासित करना ही धर्म है।



