एक बार फिर सभापति तय करेगा आगामी विधानसभा का परिणाम!

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सिरोही जिले की छह नगर पालिका के चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 27 से।

सबगुरु न्यूज-सिरोही। कांग्रेस के विधानसभा का चुनाव सिरोही शहर में बुरी तरह से हारने के पीछे की एक वजह नगर परिषद सिरोही की कार्यप्रणाली भी है। सिरोही नगर परिषद में कांग्रेस के बोर्ड की सही मॉनिटरिंग और नियंत्रण नहीं होने की वजह से सिरोही नगर परिषद में कांग्रेस को 2018 में मिली बढ़त को खोना पड़ा। ऐसे में सभापति का चेहरा कांग्रेस का 2028 का सिरोही में कांग्रेस का नसीब तय करेगा। अब कांग्रेस अच्छा इंसान चुनती है या अच्छा लीडरशिप स्किल ये कांग्रेस के हाथ में है। क्योंकि 2028 का विधानसभा चुनाव का भविष्य इसी पर निर्भर है।

– दो नाम प्रमुख

फिलहाल सभापति के दावेदारों में दो नाम प्रमुखता से चल रहे हैं। तारा प्रजापत और रितु जैन। दोनों ही नामो से जुड़े दो व्यक्तियों के कार्यकाल के चुनाव परिणाम का अंतर बता रहा है कि 2028 में किसके नेतृत्व में सिरोही नगर परिषद जाने पर कांग्रेस सिरोही शहर में प्रभावी रहेगी ।

कांग्रेस ने हाल ही में सिरोही शहर में नेतृत्व परिवर्तन किया है। इससे पहले के सिरोही शहर अध्यक्ष के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा और नए अध्यक्ष के नेतृत्व में नगर परिषद चुनाव। इन दोनों परिणामों के अंतर बता रहा है कि कांग्रेस के लिए सिरोही शहर में क्या फायदेमंद रहा। दो नामों के अलावा एक और नाम पर चर्चा है जिनके पीछे पिछले बोर्ड की लॉबी बताई जा रही है। लेकिन, उस नाम से न तो जातिगत वोटों का फायदा मिलना है न ही संगठनात्मक।

– किसे मिलेगी प्राथमिकता 

जुलाई 2026 में सिरोही शहर का नेतृत्व परिवर्तन हुआ। इससे पहले सिरोही शहर के नेतृत्व जिनके हाथ में था उनकी देखरेख में विधानसभा चुनाव लड़ा गया। उसके पीछे की कांग्रेस की गणित थी कि उस नेतृत्व का जातिगत फायदा मिलेगा। लेकिन, सिरोही शहर ही क्या सिरोही विधानसभा में भी उस जाति के अधिसंख्य वोटों का डायवर्जन कांग्रेस की तरफ नहीं हुआ। आगे भी सिरोही नगर परिषद में नेतृत्व इनके हाथ में जाता है तो जातिगत वोटों का परिणाम वही रहना है जो 2028 और उससे पहले के चुनावों में था। इसकी वजह है धुर दक्षिण पंथी सोच। जिसे इस मतदाता समूह के अधिकांश मतदाता जातिगत प्राथमिकता से बहुत ऊपर रखते हैं। ये मतदाता समूह कांग्रेस को अपने क्राइटेरिया में फिट नहीं मानते हैं। ये बात अलग है कि पूर्व अध्यक्ष सोशली एक्टिव बेहतरीन इंसानो में से एक हैं, लेकिन बेहतरीन इंसान की सौम्यता को कांग्रेस किस तरह से भुना पाएगी ये वक्त बताएगा।

जुलाई 2026 में सिरोही शहर के नेतृत्व परिवर्तन के बाद की स्थिति पर काफी बदली हुई है। सिरोही शहर में सारणेश्वर दरवाजे के बाहर का इलाका भी भाजपा का क्षेत्र माना जाता है। 2028 में इस इलाके में कांग्रेस को जबरदस्त सेटबैक लगा था। लेकिन , जुलाई 2026 में नेतृत्व परिवर्तन के बाद हाल के नगर परिषद चुनावों में इन इलाकों में लगातार कई वार्डो में कांग्रेस ने अपना परचम लहराया है। इस क्षेत्र की युवा और पुरानी पीढ़ी में पकड़ को भी इसका कारण म जा रहा है। पुराना कांग्रेसी होनें का भी फायदा जुड़ा है। एक समय था कि जब जिले भर के कांग्रेसियों का संपर्क और बैठकी वर्तमान नेतृत्व की पिछली पीढ़ी के साथ था। विरासत में मिली इस थाती को टूटने नहीं देने का फायदा भी वर्तमान अध्यक्ष के पास है। ऐसे में जिले भर में कांग्रेस की कार्यप्रणाली से नाखुश हो चुके पुराने कांग्रेसी भी फिर से व्यक्तिगत जुड़ाव कर सकते हैं। ऐसे में दो पीढ़ियों के बीच पुल का काम भी हो सकता है।

कांग्रेस को चुनाव सौम्यता और नेतृत्व क्षमता के बीच में करना है। अब कांग्रेस नेतृत्व सिरोही शहर से निश्चिंत होकर शेष विधानसभा में ध्यान देने को प्राथमिकता रखता है या सिरोही विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ फंसकर एनर्जी डायवर्ट करने का रास्ता ये कल सभापति पद के लिए नामांकन के बाद पता चलेगा। क्योंकि 2028 में सिरोही में कांग्रेस का भविष्य आगामी डेढ़ साल में नगर परिषद और सिरोही शहर में नेतृत्व की तय करेगा।