जी राम जी कानून का जिक्र आते ही अभिभाषण में विपक्ष ने किया हंगामा

0

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर विकसित भारत जी राम जी कानून का उल्लेख आते ही कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी सदस्यों ने अपनी सीटों पर खड़े होकर इसका विरोध किया और कानून को वापस लेने की मांग करते हुए नारेबाजी की। वंदेमातरम का जिक्र आने पर विपक्ष ने सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए थोड़ा शोर शराबा किया।

मुर्मु ने संसद के बजट सत्र के पहले दिन जब अभिभाषण में संसद के शीतकालीन सत्र में पारित विकसित भारत जी राम जी कानून का सरकार की उपलब्धि के रूप में उल्लेख किया तो विपक्षी सदस्य एकाएक अपनी सीटों पर खड़े होकर इसका विरोध करने लगे। विपक्षी सदस्यों ने इस दौरान इसके विरोध में नारेबाजी की और विधेयक को वापस लेने की मांग करते रहे।

कुछ देर तक चले हंगामे के बीच सदन में जहां सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जी राम जी नाम का उल्लेख आते ही मेजें थपथपाकर इसका स्वागत किया वहीं विपक्षी सदस्यों ने इसके खिलाफ नारेबाजी की। विपक्षी सदस्य हंगामे के बीच जी रामजी वापस लो के नारे लगाते रहे।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, डीएमके के टी आर बालू सहित सभी विपक्षी दलों के सदस्यों ने अपनी सीटों पर खड़े होकर जी रामजी का विरोध किया। राष्ट्रपति विपक्षी सदस्यों के व्यवधान पर ध्यान दिए बिना अपना अभिभाषण पढ़ती रहीं। बाद में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने संक्षिप्त रूप में पढे अभिभाषण के दौरान सरकार की कई उपलब्धियों का जिक्र किया लेकिन जीरामजी कानून का उल्लेख नहीं किया।

अभिभाषण में जीरामजी विधेयक के उल्लेख के समय काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। सत्तापक्ष के सदस्य भी जवाब में लगातार मेजें थपथपाते रहे। मुर्मु जो कुछ बोल रही थीं वह हंगामे के कारण सुनाई नहीं दे रहा था लेकिन इसी बीच द्रमुक के टीआर बालू ने विपक्षी सदस्यों को शांत होने और अपनी सीटों पर बैठने का इशारा किया जिसके बाद सभी सदस्य अपनी सीटों पर बैठक गए।

विपक्षी दलों के सदस्यों ने अभिभाषण के दौरान वंदेमातरम के 150वें साल को समारोह पूर्वक मनाने का जिक्र आने के समय भी सरकार का विरोध किया। कुछ सदस्य डॉ अम्बेडकर की 15वीं जयंती पर मनाने का उल्लेख आने पर भी कुछ बोलते रहे लेकिन सुनाई कुछ नहीं दिया। वैसे हर बड़े मुद्दे पर विपक्ष की तरफ से विरोध के स्वर सुनाई दे रहे थे।