सिरोही के मामले में न्यायिक आदेश की पालना नहीं करने पर राज्य सरकार और संबंधित विभाग पर हाईकोर्ट सख्त

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जोधपुर / सिरोही। सिरोही के पशुपालन विभाग कार्मिक नीतीश सिंघवी के मामले यमन राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा है कि आखिर पर न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।

सिंघवी सिरोही पशुपालन विभाग में कार्यरत थे और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आपात स्थिति के बहाने जिला बदर करके बाड़मेर भेज दिया गया था। ऑपरेशन सिंदूर खत्म होने के बाद पशुपालन विभाग ने बाकी लोगों को अपने मूल स्थान भेज दिया लेकिन, नीतीश सिंघवी को अपने मूल स्थान पर नहीं भेजा गया। इस लेकर नीतीश ने न्यायालय में रिट लगाई। इस पर उन मूल स्थान भेजने आदेश हुए। लेखी विभाग हठधर्मिता करते हुए ऊंह मूल स्थान पर नहीं भेजा। इसके बाद अवमानना याचिका दायर की गई। जिस पर न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करके पूछा कि क्यों ना उन पर अवमानना की कार्रवाई की जाए।

सिरोही निवासी नितेश कुमार सिंघवी द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की अदालत ने राज्य सरकार एवं संबंधित अधिकारियों को कड़ा नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि आखिर न्यायालय द्वारा पूर्व में पारित आदेश की पालना नहीं करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जाए।

नीतीश कुमार द्वारा दायर अवमानना याचिका में हाईकोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि आदेशों की अवहेलना पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय हो सकती है।

क्या है मामला?

नीतीश सिंघवी सिरोही में पशुपालन विभाग में कार्यरत हैं। सत्ता बदलने पर कथित रूप से ऊंह जिला बदर करने की लगातार कोशिश होती रही। लेकिन न्यायालय के आदेशों से वो सिरोही में ही रहे। इस बाद ऑपरेशन सिंदूर शुरू हो गया। कथित रूप से जिले के नेताओं और पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने इसे सहारा बनाते हुए प्रदेश के कई कार्मिकों