ब्रह्मा जी की नगरी पुष्कर में 171 अरब हस्तलिखित श्रीराम नाम महामंत्रों की परिक्रमा आरंभ

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तीर्थराज पुष्कर में राम नाम धन संग्रह बैंक बना आस्था का केन्द्र

24 घंटे खुला रहेगा श्री रामनामालय, कभी भी कर सकेंगे परिक्रमा
अजमेर/पुष्कर। हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर तीर्थराज पुष्कर में भगवान राम के प्रति आस्था और राम भक्त हनुमान की भक्ति का अद्भुत संगम हुआ। मौका था पंच पीपली के पास सुधाबाय रोड स्थित श्रीराम नामालय में 171 अरब हस्तलिखित श्रीराम नाम महामंत्रों की अनवरत परिक्रमा के शुभारंभ का। गुरुवार को संत महात्माओं के चरणकमलों व आशीर्वाद के साथ सैकडों राम रामभक्तों की मौजूदगी और श्रीरामनाम परिक्रमा समारोह समिति के तत्वावधान में सतत् परिक्रमा का शुभारंभ हुआ। अब राम भक्त साल के 365 दिन, दिन के 24 घंटे में कभी भी परिक्रमा कर सकेंगे।

संयोजक सत्यनारायण भंसाली ने बताया कि इस भव्य आयोजन में हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज का मुख्य आतिथ्य प्राप्त हुआ। निर्मलधाम के महंत डॉ. रामेश्वरानंद, नांद गोशाला के महंत समताराम जी, डोडियाना पीठ सांवरिया सेठ के महंत शत्रुघ्नदास जी महाराज, शांतानंद उदासीन आश्रम के महंत हनुमानराम जी तथा नृसिंह मंदिर अजमेर के महंत श्याम सुंदर शरण सहित अनेक संत-महात्माओं का भी सान्निध्य मिला। संतों का पूरन सिंह चौहान, पंडित बाल कृष्ण पुरोहित, कंवल प्रकाश किशनानी, सत्यनारायण भंसाली, महेन्द्र जैन मित्तल ने शॉल ओढाकर तथा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मान किया। इस अवसर पर बाल साहित्यकार उमेश चौरसिया लिखित वीर बजरंगी उपन्यास का संतों ने विमोचन किया।

भक्ति से मृत्यु नहीं होती बल्कि मोक्ष मिलता है : प्रखर जी महाराज

हरिद्वार महामण्डेश्वर के परम पूज्य स्वामी प्रखर जी महाराज ने कहा कि राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि मानव जीवन को दिशा देने वाला मंत्र है, जो व्यक्ति के जीवन को संवारने के साथ-साथ आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम बनता है। संतों के अनुसार राम में निहित ‘र’, ‘आ’ और ‘म’ अक्षर जीवन में प्रेम, शक्ति और शांति का संचार करते हैं। उन्होंने कलयुग केवल नाम अधारा चौपाई की व्याख्या करते हुए कहा कि कलयुग में राम नाम ही सबसे बड़ा सहारा है।

उन्होंने कहा कि पुष्कर जैसी पवित्र भूमि, जहां सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा विराजमान हैं, वहां इस प्रकार के आध्यात्मिक कार्य का आयोजन अत्यंत गौरवपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ठाकुर जी का एक बार नाम लेने से मंगल हो जाता है। ऐसे में 171 अरब राम नाम महामंत्रों की परिक्रमा तो महामंगलकारी होगी।

रामनाम जप इस भव सागर को पार लगाने वाला है। ठाकुर जी का नाम ही परम औषधि है। ठाकुरजी की भक्ति से मृत्यु नहीं होती बल्कि मोक्ष मिलता है। सबके भीतर भक्ति है बस इसके द्वार को खोल लेंवें। यह सृष्टि बहुत सुंदर है, संसार लुभावना है, तो बनाने वाला कितना सुंदर होगा। उसे खोजने का मार्ग भक्ति है।

उन्होंने कहा कि हर तीर्थ की अलग अलग महत्ता है। तीर्थ भगवान के मंगल रूप होते हैं। ये हमें ऊर्जा देते हैं। तीर्थ सिर्फ भारत की धरा पर हैं। भगवान के चरण पड़ने से ये धरती पावन और महान है। यहां जन्म दुर्लभ है। हमें पुण्यफलों की बदौलत जन्म मिला है तो मोक्ष के लिए जीवन को जिएं। मानव जीवन को सफल बनाएं। भारत देश की मर्यादा भिन्न है। यहां विविधता में एकता है। भगवान भी यहां जन्म लेकर मर्यादा में रहे। राम नाम धन संग्रह बैंक अलौकिक है। यह अनन्तकाल तक सनातनियों की आस्था का केन्द्र रहेगा।

जीवन में धर्म व राष्ट्र सेवा के मार्ग पर चलें : रामेश्वरानंद जी

निर्मलधाम पुष्कर के महंत डॉ. रामेश्वरानंद जी ने हनुमान जी महाराज एवं प्रभु श्रीराम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जीवन में कई ऐसे प्रसंग आए, जहां हनुमान जी की कृपा से असंभव कार्य भी संभव हुए। उन्होंने बचपन के संस्कारों का उल्लेख करते हुए बताया कि उनकी दादी रामभक्ति से जुड़ी थीं, जिससे उनके जीवन में भक्ति की नींव पड़ी। उन्होंने एक विदेश यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में हनुमान जी का स्मरण मात्र करने से सभी बाधाएं दूर हो गईं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे राम नाम का जप करें और जीवन में धर्म व राष्ट्र सेवा के मार्ग पर चलें।

राष्ट्र और धर्म के लिए कष्ट सहने वाला सनातनी : महंत श्याम सुंदर

नृसिंह मंदिर के महंत श्याम सुंदर ने कहा कि हनुमान जी महाराज की कृपा और राम नाम धन संग्रह बैंक के प्रयासों से अरबों राम नाम की अनवरत परिक्रमा का यह कार्य प्रारंभ हो रहा है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी भक्ति, शक्ति और ज्ञान के प्रतीक हैं। उनके आदर्शों को अपनाकर हम जीवन सफल बना सकते है।  पवित्र काम में भागीदारी ठाकुर जी की कृपा से मिलती है। अपने धर्म और राष्ट्र के लिए काम करना ही सनातन है। सनातन और राष्ट्र की सेवा पुण्य का काम है। हम धर्म की रक्षा करेंगे धर्म हमारी रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि हमें संस्कारों को सुरिक्षित रखना है। आंतकवाद, असमानता का मिटाना है। राष्ट्र और धर्म के लिए जो कष्ट सहता है वही सनातनी है।

राष्ट्र को गौरवमयी बनाने के लिए भी कार्य करें : महंत धीरजराम

रामस्नेही आश्रम के महंत धीरजराम जी ने कहा कि अरबों हस्तलिखित श्रीराम नाम महामंत्रों की परिक्रमा का आरंभ होना आध्यात्मिक जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। खासकर बूढा पुष्कर और पुष्कर के बीच संगम स्थल पर राम नाम का विराजित होना सौभाग्य की बात है। राम नाम धन संग्रह बैंक के इस प्रयास से समाज में नकारात्मकता नष्ट होगी तथा भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होगा। धर्म कार्य के साथ ही हम राष्ट्र को गौरवमयी बनाने के लिए भी कार्य करें।

पुण्य कर्म का फल धरा पर, हरि भजन परलोक में फलीभूत : महंत हनुमान राम

श्री शांतानंद उदासीन आश्रम पुष्कर के महंत हनुमान राम साई से कहा कि पुष्कर की पावन भूमि पर राम नाम धन संग्रह बैंक के मुख्यालय में श्रीराम नाम महामंत्रों की परिक्रमा का अवसर उपलब्ध कराना अत्यंत पुण्यदायी कार्य है। यह पहल समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि हनुमान जी महाराज की भक्ति और प्रभु श्री राम के नाम का निरंतर स्मरण जीवन के सभी संकटों को दूर करता है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी राम नाम को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। इतने राम नाम जपना और लिखना एक प्राणी के लिए संभव नहीं। ऐसे में इनकी परिक्रमा कर पुण्य लाभ लेने से वंचित ना रहें। उन्होंने कहा कि पुण्य कर्म इस धरा पर काम आते है और हरि भजन परलोक में फलीभूत होते है।

कलयुग में राम नाम ही भवसागर से तारने वाला : महंत समताराम

नांद गोशाला के महंत समताराम जी महाराज ने आत्मा से परमात्मा बनने की यात्रा को जीवन का सर्वाेच्च उद्देश्य बताते हुए कहा कि इस दिव्य यात्रा के आज हम सभी साक्षी बन रहे हैं। राम नाम की महिमा अनंत है। राम नाम मानव जीवन को ठीक करता है यह आत्मा को पवित्र करता है। जगत पिता की गोद में राम नाम धन का स्थापित होना इस तीर्थ की महत्ता को बढाएगा। कलयुग में राम से बड़ा राम नाम बताया गया है। राम नाम ही शक्ति है। भगवान का नाम स्व प्रकाशित होता है। राम सुखदायक है, मगलकारी है, दुखों का हरण करने वाला है। राम नाम जपने के साथ लिखना श्रेष्ठ है। कलयुग में राम नाम ही भवसागर से तारने वाला है। बस भक्त की भक्ति हनुमान जी भांति हो। सनातन में भक्त और संत की महत्ता है। मर्यादा में रहे, निंदा से बचें।

सतत परिक्रमा आयोजन को प्रेरणादायक पहल : खाजूलाल चौहान

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अजमेर महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान अपने संबोधन में कहा कि भारत का आध्यात्मिक इतिहास अनादि काल से समृद्ध रहा है और आज भी उसी परंपरा का निर्वाह हो रहा है। उन्होंने पुष्कर में आयोजित इस धार्मिक आयोजन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि श्रीराम नाम धन संग्रह बैंक को एक पवित्र एवं सतत परिक्रमा आयोजन को प्रेरणादायक पहल बताया। विश्व हिंदू परिषद चित्तौड़ प्रांत के मंत्री कौशल गौड़ ने कहा किसनातन धर्म से जुडे इस काल खंड में सेवा कार्य हो रहे। आमजन में देश और धर्म के प्रति जागृति आई है। इसके लिए संतों का प्रयास प्रभावकारी रहा है। उन्होंने कहा कि पुण्यकर्मों से मुक्ति होती है। साधना हमारे पुण्यकर्म बढ़ाती है।

इन्होंने बढाई आयोजन की गरिमा

मुख्य अतिथि नरेश मूलचंदानी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में आनंद अरोड़ा, आनंद सिंह, जितेंद्र खंडेलवाल, देवेंद्र गर्ग, रमेश तापड़िया, रमाकांत बाल्दी, गिरधारी मंगल, हनुमान दयाल बंसल, अनिल आसनानी, संजय गोयल और रमेश मोटवानी रहे। कार्यक्रम के संयोजक मंडल में स्वागत सत्कार समिति कैलाश सिंह भाटी, वृतिका शर्मा, दीपचंद श्रीया, अक्षय जैन, राजेश गर्ग, मुकुल अग्रवाल, प्रचार-प्रसार समिति, विजय कुमार, रेशु पाराशर, किशन शर्मा गोपाल जादम, उमराव सैनी, मुकेश सोनी की सक्रिय भूमिका रही। वृतिका शर्मा ने मंच संचालन किया। आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमियों से पुष्कर श्रीराम नामालय में हस्तलिखित 171 अरब श्रीराम नाम महामंत्रों की परिक्रमा कर धर्म लाभ उठाने की अपील की है। आज से परिक्रमा स्थल सदैव खुला रहेगा। प्रसादी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।