
सबगुरु न्यूज-सिरोही। करीब आठ साल पहले सरूपगंज में आदर्श शिक्षा समिति और एक वृद्धा देवी बाई खंडेलवाल के बीच भूमि को लेकर विवाद हुआ था। भाजपा की सत्ता थी। आदर्श शिक्षा समिति ने रातों रात उस जमीन पर कब्जा करके कोठरी बनाकर कब्जा दर्शाने के प्रयास किया था। बाद में यहां संचालित विद्यालय भी विवाद में पड़ गया। ये विवाद अब भी जारी है।
सिरोही में आरएसएस के एक और प्रकल्प सेवा भारती को ओटाराम देवासी के द्वारा रामझरोखा के ठीक सामने नेहरू उद्यान की दीवार से सटी भूमि आवंटित करवाई गई। ये भूमि पैमाईश में हिंदू श्मशान समिति की निकली। इसके खुलासे के बाद यहां पर भी रातों रात कोठरी बनाकर भूमि के सेवा भारती का होने का बैनर लगा दिया। लेकिन, ये मामला सरूपगंज की देवी बाई के मामले से कुछ अलग और पेचीदा है। जहां कोठरी बनाकर कब्जा दिखाने वाला स्टंट काम आने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। इसकी वजह है इस जमीन से जुड़ी कानूनी पेचीदगियां।

पहली पेचीदगी मास्टर प्लान
इस जमीन को लेकर 5 साल पहले भी विवाद हुआ था। तब इसके आवंटन रद्द किया गया था। इसकी नीलामी की गई थी। उस समय नगर परिषद की दलील थी कि ये जमीन मास्टर प्लान में संस्थागत नहीं है। तब तक इस जमीन की पैमाईश होकर इसके खसरे की स्थित स्पष्ट नहीं थी।

यहां पर दो खसरा हैं। एक 2694 और दूसरा 2695। इन दोनों खसरों के बीच में कोई अन्य खसरा नम्बर नहीं है। ऐसे में दो ही संभावना हैं। या तो ये जमीन खसरा नम्बर 2695 की है जो नगर परिषद सिरोही नाम से दर्ज है या फिर ये 2694 का हिस्सा है जो वैष्णव श्मशान के नाम दर्ज है। 1991-2011 और 2011-2031 के सिरोही के मास्टर प्लान में खसरा संख्या 2695 और इसके आस पास का इलाका पार्क के रूप में इंद्राज है। ऐसे में गुलाब कोठारी बनाम राजस्थान सरकार प्रकरण के अनुसार ये भूमि मास्टर प्लान के विपरीत किसी को भी आवंटित नहीं की जा सकती। यदि सेटलमेंट या पैमाईश में सत्ता के दम पर ऐसा करवा भी लिया जाए तो भी इस जमीन और इसमें हेरफेर करने वाले अधिकारी पर कानूनी गाज गिरने की संभावना प्रबल है।

– दूसरी पेचीदगी श्मशान की भूमि की
रामझरोखा के ठीक सामने ओटाराम देवासी द्वारा सेवा भारती को आवंटित करवाई गई जमीन पैमाईश में खसरा संख्या 2694 का हिस्सा निकली है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार खसरा संख्या 2691 से लेकर 2694 तक वैष्णव श्मशान की भूमि है। प्रशासन शहरों के संग और शहरी सेवा शिविर दोनों में स्वायत्त शासन विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार पार्क, मंदिर, श्मशान, कब्रिस्तान, तालाब, बफर जोन की भूमि पर पट्टे जारी करने की मनाही थी। नियमित रूप से भी इस तरह की जमीनों के पट्टे जारी नहीं किए जा सकते।
खसरा संख्या 2694 की भूमि वैष्णव श्मशान के खातेदारी की है। ऐसे में इसका पट्टा जारी नहीं किया जा सकता। सार्वजनिक उपयोग की जमीनों में आती है जिनका पट्टा जारी करना न्यायालयों ने भी अवैध घोषित किया हुआ है। पट्टे में जो शर्तें लिखी होती हैं उनमें ये भी शामिल होती है कि किसी गलत सूचना की वजह से ये जारी भी कर दिया जाए तो उसे निरस्त किया जा सकता है। खसरा संख्या 2695 की जमाबंदी तो नगर पालकी के नाम है लेकिन मास्टर प्लान में ये 1991 से या उससे पहले से ही पार्क के रूप में दर्शाई हुई है। इसकी खातेदारी में बदलाव नहीं होना राजस्व विभाग की अनदेखी का मसला है। ये नोटिफाइड हो चुके मास्टर प्लान को ओवरकम नहीं कर सकती है।


