जानलेवा हो चुकी है आबूरोड पुलिस की ये कार्यप्रणाली 

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आबूरोड में शुक्रवार को पीक आर में सीटी थाने के सामने से निकलता माल से भरा ट्रक

सबगुरु न्यूज-आबूरोड। गुजरात के पर्यटकों को रोक कर चालान करने के लिए कुख्यात आबूरोड पुलिस के काम करने की अद्भुत प्रणाली शुक्रवार को फिर जानलेवा बन गई। आबूरोड पुलिस की मौन सहमति से शहर में घूमते भारी वाहन लोगों के लिए जानलेवा हो चुके हैं। शुक्रवार दोपहर को भी विष्णु टॉकीज के पास निर्माण सामग्री से भरे ट्रक ने एक एक्टिवा को पीछे से टक्कर मार दी। इसमें एक व्यक्ति की जान चली गई। इससे पहले ऐसी ही घटना आकरा भट्टा में हुई थी। इसमें भी दोपहर में शहर में घुसे डंपर ने मोटर साइकिल चालक को कुचल दिया था।

आबूरोड शहर में दोपहर को जानलेवा सड़क हादसे में क्षतिग्रस्त स्कूटर

नो एंट्री टाइम में ट्रक, ट्रॉले और डंपर

शहर में भारी वाहनों की नो एंट्री के समय में मालवाहक ट्रक, ट्रॉले और डंपर धड़ल्ले से निकलते चले आ रहे हैं लेकिन, इसे रोकने और कार्रवाई करने की कवायद करती पुलिस नजर नहीं आई। इन्हीं भारी वाहनों के कारण शुक्रवार को एक जान और चली गई जो बता रहा है कि आबूरोड पुलिस की कार्यप्रणाली आम शहरी के लिए जानलेवा हो चुकी है।

सांतपुर की तरफ जा रहे थे दोनों

विष्णु टॉकीज पर जो युवक दुर्घटना में जान गंवाया वो शहर से सांतपुर की तरफ जा रहा था। ट्रक भी उसके पीछे ही आ रहा था। इसमें सरिये भरे हुए थे। यानि ये ट्रक भी दोपहर को भीडभाड वाले समय में शहर में घुसा हुआ था। जबकि आबूरोड शहर के ही ट्राफिक रूल के हिसाब सुबह नौ बजे से शाम सात बज तक शहर में भारी वाहनों को प्रवेश वर्जित है। लेकिन, पुलिस के अपना काम सही ढंग से नहीं करने की वजह से ये हादसा हो गया।

सिटी थाने के सामने से निकल जाते हैं ट्रक और डंपर

जिले में यातायात जाम के लिए आबूरोड शहर कुख्यात है। इसके लुनियापुरा लेकर केसरगंज तक पीक ऑर के 8 घंटों में यहां से दो पहिया वाहन भी निकलना मुश्किल होता है। इस मार्ग पर ट्रैफिक नियंत्रण के लिए ट्राफिक पुलिस के दो पुलिस पिकेट बने हुए हैं। एक सीटी थाने के सामने अंबाजी मंदिर के पास दूसरा रेलवे स्टेशन के पास। यहां पर खडे़ पुलिसकर्मियों की  नजर यहां से निकलने वाले गुजरात पासिंग के दो तरह के वाहनों पर रहती है। एक चार पहिया। दूसरा दो पहिया। लेकिन, इनके सामने शुक्रवार को ट्रक शहर से निकलता चला गया, इस पर कार्रवाई का काम दोनों ही पिकेट पर नहीं हुआ। ये हालात पूरे शहर में है। चाहे वो तीनों पुलिस थानों के इलाकों में पडते हों।