पिता पर हावी हुए बेटे के समर्थक सिरोही में पिता के रिप्लेसमेंट को तैयारी तो नहीं!

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सबगुरु न्यूज-सिरोही। राजनीति में परिवारवाद के तहत स्वैच्छिक रिप्लेसमेंट भारत में हर जगह हो रहा है। परिवार वाद नाम पर सत्ता में आई भाजपा में भी। कांग्रेस में भी। अन्य स्थानीय पार्टियों में भी।

सिरोही जिले में माता-पिता के जनप्रतिनिधि बनने पर बेटों के माध्यम से, पत्नी के जनप्रतिनिधि बनने पर पति के माध्यम से और सास के सत्ता का हिस्सा रहने पर बहु के राजनीति में सक्रिय होने के उदाहरण सामने हैं। ये सब स्वैच्छिक है। लेकिन, जिले के एक व्हाट्स एप समूह में जो हुआ वो पुत्र के समर्थकों द्वारा पिता को जबरिया रिप्लेस करने का इरादा ज्यादा माना जा रहा है।

अब बहस इस मुद्दे पर छिड़ गई है कि ये सब पुत्र स्वयं करवा रहा है या समाज के लोग ही पिता की जगह पुत्र को लाने का मानस बनाने लगे हैं। ये सब मजाक में हुआ था या गंभीरता में लेकिन ये स्पष्ट संदेश है कि पुत्र के समर्थक पिता को बेटे से रिप्लेस करने पर उतारू है। अब इसमें पुत्र की कितनी सहमति है ये वही बता सकते हैं।

– क्या था इसमें

तो जिले की रेवदर तहसील में बुधवार को एक सामाजिक आयोजन हुआ। समाज का ये आयोजन था उसके युवाओं का एक व्हाट्स एप समूह है। इसी व्हाट्स एप समूह इस तरह की चर्चा चली थी। इसी समूह में शाम करीब 7:01 बजे एक संदेश आया। इसमें नेता पिता के बारे में टिप्पणी थी। ये टिप्पणी उनके समाज के युवा ही कर रहे थे। इसमें लिखा था कि नेता पिता की नाकामी से जनता परेशान हो चुकी है। धरातल में सब जगह अंधेरा दिख रहा है। अभी छोटे छोटे कम के।लिए भी दलाल छोड़ दिया है। साहब वापस टिकिट लेकर आए तो जीतेंगे नहीं।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दूसरा युवक ने लिखा कि कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पिता की जगह बेटे को स्टेट में जनप्रतिनिधि बना देवे। इससे सब काम फटाफट होंगे और बीच से दलाल भी हट जाएंगे। इसकी प्रतिक्रिया में अन्य युवक लिखता है कि दलाल बीच में से नहीं हटने वाले इन सिस्टम का हिस्सा बना दिया गया है। इस व्हाट्स एप चैट के वायरल होने के बाद जिले में लोग ये चुटकी लेने लगे हैं कि पुत्र ने पिता को साइडलाइन करने की तैयारी कर ली कहती है।

– एक संदेश साफ

इस वायरल व्हाट्स एप चैट में पिता को बेटे से रिप्लेस करने को लेकर ये लोग कितने गंभीर थे ये पता नहीं लेकिन इनकी चैट ये स्पष्ट है कि आम जनता ही नहीं जिन जातियों के भरोसे जनप्रतिनिधि जीतकर संसद, विधानसभा, जिला परिषद, पंचायत समिति, नगर पालिका, ग्राम पंचायतों में चुनकर पहुंच रहे हैं वहां वो आम जनता का ही नहीं बल्कि अपनी जाति के लोगों का भी शोषण करते हैं। इस चैट ने सिद्ध दिया है कि पार्टी कोई भी हो सत्ता और नेताओं का चरित्र जनता के दोहन को लेकर एक सा होता है।