औद्योगिक ग्राहकों को खुदरा खरीद से रोकने के लिए पेट्रोल-डीजल पर जारी किया गया नियंत्रण आदेश : सरकार

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नई दिल्ली। डीजल की खुदरा बिक्री में कई जिलों में भारी वृद्धि के बाद सरकार ने औद्योगिक तथा संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए आम पेट्रोल पंपों से इसकी खरीद पर रोक लगा दी है। इसके अलावा, कालाबाजारी रोकने के लिए खुदरा ग्राहकों के लिए भी एक दिन में खरीद की अधिकतम सीमा 200 लीटर तय कर दी गई है, और यह शर्त भी रखी गई है कि वे इसकी पुनः बिक्री नहीं कर सकेंगे।

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार देर रात नया नियंत्रण आदेश जारी किया। इसे फिलहाल 90 दिन के लिए लागू किया गया है। इसमें कहा गया है कि किसी भी वाहन या व्यक्ति को एक दिन में पेट्रोल पंप पर 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं मिलेगा। नए नियम से लंबी तथा मध्यम दूरी के माल परिवहन वाले ट्रकों पर असर पड़ने की संभावना है।

खुदरा बिक्री केंद्रों (पेट्रोल पंप डीलरों) को आदेश दिया गया है कि वे डीजल की बिक्री केवल वाहनों के टैंक अथवा पेसो (पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन) से अनुमोदित कंटेनर में ही करेंगे। आदेश में फिलहाल पेट्रोल की खुदरा बिक्री की कोई सीमा तय नहीं की गई है, लेकिन भविष्य में ऐसा करने की गुंजाइश रखी गई है। साथ ही, डीजल के साथ इसकी भी जमाखोरी रोकने के लिए कार्रवाई का प्रावधान है।

तत्काल प्रभाव से लागू इस आदेश में कहा गया है कि संस्थागत और प्रत्यक्ष अथवा औद्योगिक तथा व्यावसायिक ग्राहक खुदरा बिक्री केंद्र से पेट्रोल या डीजल नहीं खरीदेंगे या नहीं मंगवाएंगे। वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति केवल अपने उपभोक्ता पंप से ही करेंगे।

राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया है कि वे आज के आदेश और अन्य लागू कानूनों के तहत पेट्रोल और डीजल से संबंधित जमाखोरी, कालाबाजारी, अनधिकृत रूप से उनकी खरीद, जिस उद्देश्य के लिए खरीदा गया है उससे अलग इस्तेमाल और अन्य अनाचारों के विरुद्ध कार्रवाई सहित सभी आवश्यक उपाय करेंगे। इन आदेशों का उल्लंघन आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और अन्य लागू कानूनों के प्रावधानों के अनुसार दंडनीय होगा और उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।

सरकार ने कहा है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति में आई बाधा से डीजल का थोक मूल्य खुदरा मूल्य की तुलना में करीब 40 रुपए अधिक हो गया है। इसे देखते हुए संस्थागत और औद्योगिक उपभोक्ता भी उनके लिए निर्दिष्ट माध्यमों की बजाय सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों के आम पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल खरीद रहे थे।

इससे आम उपभोक्ताओं के लिए सस्ते डीजल की उपलब्धता कम हो रही थी। साथ ही तेल विपणन कंपनियों पर भी भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा था। पश्चिम एशिया संकट के बीच कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति से उन्हें रोजाना 500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।

मंत्रालय ने आंकड़े जारी करते हुए बताया है कि एक साल पहले के मुकाबले इस साल मई में देश के 327 जिलों में सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों के खुदरा आउटलेट पर डीजल की बिक्री में 10 प्रतिशत उछाल दर्ज किया गया। इनमें से 80 जिले ऐसे हैं जहां बिक्री में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि नए नियामक उपायों का उद्देश्य खुदरा ग्राहकों के हितों की रक्षा करना है।

अधिसूचना में कहा गया है कि वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति और औद्योगिक, वाणिज्यिक तथा संस्थागत उपभोक्ताओं द्वारा खुदरा बिक्री केंद्रों के माध्यम से खरीद कर अनुचित लाभ उठाने की घटनाओं के देखते हुए जनहित में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति, वितरण और बिक्री को उचित कीमतों पर विनियमित करना आवश्यक है।