महासमुंद जिला अस्पताल में एक्सपायर अग्निशमन यंत्रों का खतरा, सुरक्षा पर उठे सवाल

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महासमुंद। छत्तीसगढ़ में महासमुंद जिले के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध 380 बिस्तरों वाले जिला अस्पताल में अग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। अस्पताल की दीवारों पर लगाए गए छोटे अग्निशमन यंत्रों की वैधता अवधि समाप्त होने के बावजूद यंत्र शो-पीस की तरह टंगे हुए हैं।

गुरुवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 450 से 500 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं। आग जैसी आपात स्थिति में त्वरित नियंत्रण के लिए पूरे अस्पताल परिसर में करीब 90 छोटे अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं। इन यंत्रों की ‘रिफिलिंग’ का कार्य रायपुर की पीआर इंटरप्राइजेज संस्था को सौंपा गया है।

संस्था द्वारा इन अग्निशमन यंत्रों की रिफिलिंग पिछले साल 16 जनवरी और 29 जनवरी को की गई थी, जिनकी वैधता क्रमशः इस वर्ष 15 जनवरी और 28 जनवरी तक थी। वैधता समाप्त हुए लगभग एक माह बीत जाने के बावजूद समय पर रिफिलिंग नहीं कराई गई। ऐसे में आग लगने की स्थिति में इन यंत्रों का उपयोग संभव नहीं था, जिससे मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

अस्पताल में हालांकि सेंट्रल फायर सिस्टम स्थापित है लेकिन आग लगने की प्रारंभिक स्थिति में सबसे पहले छोटे अग्निशमन यंत्रों का ही उपयोग किया जाता है। नियमों के अनुसार संबंधित संस्था को निर्धारित समय पर रिफिलिंग कराना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद इस प्रकार की लापरवाही सामने आना अस्पताल प्रबंधन और जिम्मेदार संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।

इस संबंध में अस्पताल अधीक्षक का कहना है कि आज अग्निशमन यंत्रों की रिफिलिंग कर ली गई है। बहरहाल, इतने बड़े अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था में इस तरह की अनदेखी ने व्यवस्थाओं की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।