केंद्रपाड़ा। ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में ब्राह्मणी नदी पर बने एक बाड़ वाले स्नान घाट में नहाते समय एक 40 वर्षीय व्यक्ति पर विशालकाय मगरमच्छ ने हमला कर दिया, जिसके बाद वह उसके साथ दस मिनट से अधिक समय तक संघर्ष करते हुए सकुशल बच गया।
राजपुर पंचायत के अंतर्गत आने वाले बलिचंद्रपुर गांव के खयामनिधि दास स्नान घाट में गया था, जिसे स्थानीय निवासियों को मगरमच्छों के हमलों से बचाने के लिए वन विभाग द्वारा विशेष रूप से बाड़ लगाकर सुरक्षित किया गया है। लेकिन गुरुवार को एक विशाल मगरमच्छ कथित तौर पर सुरक्षित घेरे में घुस गया और उस पर हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मगरमच्छ ने अचानक खयामनिधि के पैर को जकड़ लिया और उन्हें गहरे पानी में खींचने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों के बीच भीषण संघर्ष हुआ, जिसमें खयामनिधि ने मगरमच्छ से लड़ते हुए उसे घूंसे और लात मारे और मदद के लिए गुहार लगाई। लगभग 25 फीट लंबे विशालकाय मगरमच्छ से उसने पानी में जमकर छटपटाते हुए दस मिनट से अधिक समय तक संघर्ष किया।
उसकी चीखें सुनकर ग्रामीण बांस की लाठियों से लैस होकर मौके पर पहुंचे और मगरमच्छ पर हमला कर दिया। उनके समय पर हस्तक्षेप से मगरमच्छ ने अपनी पकड़ छोड़ दी। उसके दोनों पैरों पर 40 से 50 जगह चोटें आईं और उसे तुरंत राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। उसका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि उसकी हालत स्थिर है।
सदमे में डूबे खायमानिधि ने घटना के बाद अस्पताल के कर्मचारियों से कहा कि मुझे लगा कि सब खत्म हो गया। इस घटना ने केंद्रपाड़ा जिले के तटीय इलाकों में मगरमच्छों के हमलों के डर को एक बार फिर बढ़ा दिया है। राजनगर, पट्टामुंडई, राजकनिका, औल और महाकालपाड़ा जैसे इलाकों में अक्सर इंसान और मगरमच्छ के बीच मुठभेड़ होती रहती है, क्योंकि भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान से निकलकर खारे पानी के मगरमच्छ ब्राह्मणी, खरास्रोता, कानी और बैतरानी जैसी नदियों में चले जाते हैं। कई जल निकाय मानव बस्तियों के करीब बहते हैं, इसलिए मछली पकड़ने, नहाने और अन्य दैनिक गतिविधियों में लगे ग्रामीण हमलों के प्रति असुरक्षित रहते हैं।
वन अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले निवासियों को बार-बार सलाह दी है कि जब भी पार्क के बाहर मगरमच्छ दिखाई दें, तो अधिकारियों को सूचित करें, खासकर प्रजनन के मौसम में क्योंकि उस समय मानव और मगरमच्छ के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं। यह ताजा हमला केंद्रपाड़ा के नदी तटीय क्षेत्र में मनुष्यों और मगरमच्छों के सह-अस्तित्व की बढ़ती चुनौती की याद दिलाता है।



