जाट आंदोलन : धरना जारी, सोशल मीडिया पर प्रतिबंध

jindaचंडीगढ़। हरियाणा के 19 जिलों में प्रारम्भ हुए जाट आरक्षण के लिए अनिश्चितकालीन धरने का पहला दिन शांतिपूर्वक रहा। धरना स्थल कोे लेकर प्रशासन व आंदोलनकारियों के बीच कैथल व हिसार में कुछ देर के लिए तनावपूर्ण स्थिति हो गई थी।

प्रशासन ने सभी जगहों पर धरना शांतिपूर्वक रहने का शपथ पत्र भरवाने के बाद ही धरने पर बैठने दिया। झज्जर में अफवाहों पर विराम लगाने के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों के जवानों ने महत्वपूर्ण मार्गों पर नाकाबंदी करने के साथ ही संवेदनशील स्थलों पर फ्लैग मार्च भी किया।

गत वर्ष हुए जाट आरक्षण आंदोलन में केन्द्र बिन्दु रहा रोहतक इस बार भी आंदोलन का केन्द्र बना हुआ है। रोहतक में जसिया गांव में सैकड़ों की संख्या में सुबह से ही आंदोलनकारी डटे हुए हैं। हिसार में मय्यड़ गांव के पास धरना दिया जा रहा है। यह स्थान रेलवे ट्रैक के काफी नजदीक है।

यहां पर प्रशासन व आंदोलनकारियों के बीच धरना स्थल को विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। लेकिन आंदोलनकारी मय्यड़ केे पास ही धरने पर बैठ गए। यह स्थान जाट आरक्षण को लेकर हुए पिछले आंदोलनों में काफी चर्चा में रहा है। कुछ ऐसी ही तनाव की स्थिति कैथल में देखने को मिली।

आंदोलनकारी प्रशासन की अनुमति के बगैर देवबन कैंची गांव के पास धरना दे रहे हैं। यह स्थान कैथल-पानीपत और जींद-कैथल राज्य राजमार्ग के पास स्थित है। जींद में इक्कस गांव के पास आंदोलनकारी धरना दे रहे हैं। यहां पर प्रशासन द्वारा चंडीगढ़-हिसार हाइवे पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। झज्जर में राशनवाला चौक पर धरना दिया जा रहा है।

झज्जर में जिला प्रशासन ने मोबाइल नेटवर्क पर प्रदान की जाने वाली 2जीए 3जीए 4जीए ईडीजीईए वाइस काल्स व जीपीआरएसए एसएमएस सर्विसज और बल्क मैसेजस जैसी इंटरनेट सेवाओं सहित सभी कालिंग सर्विस को दैनिक आधार पर सुबह 8बजे से सायं 6 बजे तक प्रतिबंधित कर दिया है।

पानीपत में दिल्ली-चंडीगढ़ हाइवे व हिसार-दिल्ली तथा रोहतक-दिल्ली हाइवे पर कड़ी निगाह रखी जा रही है। पुलिस के साथ अर्द्धसैनिक बलों ने भी नाका लगा रहा है। सोनीपत में मुनक नहर के पास अर्द्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। यही नहीं बस अड्डा, महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों व मार्गों, पैट्रोल पंपों, माल्ज इत्यादि की सुरक्षा के लिए सभी जिलों में विशेष इंतजाम दिखे।

प्रशासन की मंशा इन सभी जगहों से आंदोलनकारियों को दूर रखने की रही। कई जगहों पर अर्द्ध सैनिक बलों ने पुलिस के साथ फ्लैग मार्च भी किया।