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नागपुर में पांच स्कूली छात्राओं के साथ रेप, रसोईया फरार

nagpur : 5 girls raped by cook of  government run residential school in Koradi
nagpur : 5 girls raped by cook of government run residential school in Koradi

मुंबई। नागपुर जिले में स्थित कोराड़ी में निवासी स्कूल में 5वीं व 6ठी कक्षा में पढऩे वाली 5 छात्राओं के साथ दुराचार किए जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है।

अंगूर करेगा इन बीमारियों को दूर

Successful treatment of diseases from grapes
Successful treatment of diseases from grapes

फलों में आम को राज कहा जाता है। लेकिन वहीं स्वाद में खट्टा-मीठा अंगूर से भी कई बीमारियों को दूर किया जा सकता है। अंगूर को न तो छिलका उतारने का झंझट और न ही बीज का निकालने का। अंगूर एक बलवर्धक एवं सौन्दर्यवर्धक फल है। अंगूर फलों में सर्वोत्तम माना जाता है। यह निर्बल-सबल, स्वस्थ-अस्वस्थ आदि सभी के लिए समान उपयोगी होता है। पका हुआ अंगूर तासरी में ठंडा, मीठा और दस्तावर होता है।

आप अगर एनीमिया की शिकार है तो अंगूर से बढकर और कोई दवा नहीं है। इसलिए अंगूर खाना शुरू कर दें और एनीमिया से निजात पाएं।

अंगूर की सीमित मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट, मैगनीशियम, सोडियम फाइबर विटामिन ए, सी, ई और के, कैल्शियम, कॉपर, जिंक और आयरन भी मिलता है।

शरीर के किसी भी भाग से रक्तस्त्राव होने पर अंगूर के एक ग्लास जूस में दो चम्मच शहद घोलकर पिलाने पर रक्त की कमी पूरी हो जाती है।

अंगूर में एंटी कैंसर की विशेषता पाई जाती है जिससे कैंसर को इीक रकने में मदद मिलती है। हार्ट-अटैक से बचने के लिए काले अंगूर का रस एस्प्रिन की गोली के समान है।

पोटेशियम की कमी से दांत हिलने लगते हैं और बाल बहुत टूटते हैं, त्वचा ढीली व निस्तेज हो जाती है, जोडों में दर्द व शरीर में जगडन होने लगती है। इन सभी रोगों को अंगूर दूर रखता है।

सर्दियों में चाय की चुस्की का ऐसे ले मज़ा

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Take a sip of tea in winter fun
Take a sip of tea in winter fun

जानिए कुछ हर्बल टी की रेसिपीज, जिनसे इस मौसम में भी सेहतमंद रहा जा सकता है। ऐसे आप चाय की चुस्‍की का मजा लेते हुए अपनी सेहत का भी ख्‍याल रख सकते हैं।
सर्दियों में चाय न मिले तो दिन की शुरुआत अधूरी लगती है। मगर ठंड के दिनों में कई बार हम ज्य़ादा चाय पी जाते हैं, जो सेहत के लिहाज से सही नहीं है। जानिए कुछ हर्बल टी की रेसिपीज, जिनसे इस मौसम में भी सेहतमंद रहा जा सकता है।

लेमन ग्रास टी

यह चाय लेमन ग्रास नामक पौधे से तैयार की जाती है। इस मौसम में इसका सेवन ताज़गी व सुकून देता है। कैसे बनाएं : लेमन ग्रास की दो-तीन स्टिक लें। उन्हें अच्छे से धोकर बारीक काट लें। अब एक कप में गर्म पानी लेकर उसमें एक हर्बल टी बैग के साथ इन टुकड़ों को तब तक के लिए डाल कर रख दें, जब तक कि पानी का रंग न बदल जाए। अब इसे छान लें। इसमें नींबू का रस डाल कर पिएं। स्वाद के लिए इसमें थोड़ी चीनी भी मिला सकते हैं। फायदे : इसमें सिट्रॉल नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो कई बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से बचाता है। इससे पेट साफ रहता है और रक्त संचरण में सुधार होता है। इसका सेवन एग्जि़मा और त्वचा संबंधी संक्रमणों से भी बचाता है। गर्भवती स्त्रियां इसका सेवन न करें।

पेपरमिंट टी

पुदीना औषधीय गुणों से भरपूर है। इससे बनी हर्बल टी दुनिया भर में पी जाती है। पुदीने को पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद माना जाता है। यही वजह है कि इसे चटनी और ठंडे पेय पदार्थों में इस्तेमाल किया जाता है। कैसे बनाएं : इसकी चाय बनाने के लिए पुदीने की ताज़ी पत्तियां लें। इन्हें धूप में सुखा कर कड़क कर लें, फिर हाथों से दबा कर चूरा करें और डिब्बे में स्टोर कर लें। एक बर्तन में पानी उबालें। अब इसमें दो चम्मच पुदीने की पत्तियां और 1 हर्बल टी बैग डालें। इसे छान कर चाय में शहद मिलाएं और पिएं। फायदे : यह चाय पाचन तंत्र को दुरुस्त रखती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। कैंसर पीडि़त मरीज़ों के लिए यह बहुत लाभदायक है। यह तनाव कम करती है और पेट दर्द में भी आराम पहुंचाती है। दूषित पानी से होने वाले रोगों में भी इससे फायदा होता है। भोजन के एक घंटे बाद छोटा कप पेपरमिंट टी पीने से लाभ होता है।

रोज टी
जैसा कि नाम से ज़ाहिर है, यह चाय ताज़े गुलाब की पंखुडिय़ों से बनाई जाती है।
कैसे बनाएं : एक कप गर्म पानी लें। ध्यान रहे कि पानी उबलता हुआ न हो। इसमें आप गुलाब की 10 पंखुडिय़ों और 1 ऑर्गेनिक टी बैग को 5 से 7 मिनट तक डाल कर रखें। इसमें एक बादाम और दालचीनी के छोटे-छोटे टुकड़े भी काट कर डाल सकते हैं। स्वाद बढ़ाने के लिए चीनी या दूध भी डाला जा सकता है। इसे ट्राई करें और गर्मागर्म रोज़ टी का लुत्फ उठाएं। इन पंखुुडिय़ों को सुखाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, इनकी खुशबू बरकरार रहेगी।

फायदे : इसमें विटमिन-ए, बी 3, सी, डी और ई होता है। इससे त्वचा जवां और चमकदार बनती है। शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं। इसे गले की खराश को ठीक करने के लिए भी पिया जाता है। यह विटमिन-सी के सबसे अच्छे स्रोतों में से एक है, जो इम्यून सिस्टम के लिए भी अच्छी है।

मेडिटेशन करने के लिए रखें इन ख्याल

Keep these three things in the right way to meditation
Keep these three things in the right way to meditation

एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए योगा के कई फायदे हैं। ध्यान यानी की मेडिटेशन करना योगा की कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण व्यायामों में से एक है। मेडिटेशन हमारे स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारी मन की शांति के लिए भी बहुत जरूरी है लेकिन इसके सही फायदे तभी मिल सकते हैं जब आप इसे ठीक से करें। मेडिटेशन के कई तरह के फायदे हैं लेकिन वह आपको तभी मिल सकते हैं जब आप मेडिटेशन सही से करेंगे।

जानते हैं कि मेडिटेशन या ध्यान करने का सही तरीका क्या है। ध्यान करना आसान नहीं होता और सभी को यह परेशानी होती है कि वह ध्यान करते समय अपना फोकस किसी एक जगह पर नहीं रख पाते। दरअसल ध्यान करने का भी एक तरीका होता है। मेडिटेशन में तीन बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। ये होती हैं सांस, मानसिक स्थिति और ध्यान के लिए केंद्रित किया गया लक्ष्य।

सांसों पर काबू
सबसे पहले जानते हैं सांसों के बारे में। सांस लेने और छोड़ने का मेडिटेशन से बहुत गहरा संबंध है। सही तरीके से मेडिटेशन तभी होता है जब आराम से गहरी और लंबी सांसें लीं और छोड़ी जाती हैं। अगर सांसों की गति तेज है तो इसका मतलब यह है कि आप मेडिटेशन सही से नहीं कर रहे हैं। सांसों की गति मेडिटेशन के समय धीमि होनी चाहिए।

मानसिक स्थिति
मेडिटेशन करने के लिए आपकी मानसिक स्थिति का ठीक होना सबसे अहम है। मानसिक स्थिति का अर्थ यह है कि आपका मन शांत होना चाहिए। अगर ध्यान करते समय आपका मन शांत नहीं है या फिर आप तनाव में हैं तो समझ जाइये आप मेडिटेशन ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। आपको ध्यान करते समय अपनी सारी परेशानियों को भूलकर ईश्वर पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। तनाव में रहकर आप ध्यान कर ही नहीं सकते।

अंत में मेडिटेशन के लिए सबसे अहम होता है लक्ष्य। लक्ष्य से अर्थ यह है कि मेडिटेशन करते समय आपके दिमाग में क्या चल रहा है। मेडिटेशन में ओम शब्द के उच्चारण का बहुत महत्व है और यह इसीलिए है कि आप सही से ध्यान लगा सकें। ओम शब्द कहते समय आपके पूरे शरीर में कम्पन होता है और ओम शब्द का धर्म में, मंत्रों में हर जगह ओम का वास है। मेडिटेशन के दौरान ओम शब्द कहने से आपके शरीर के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और यह आपके मेडिटेशन के तरीके को बेहतर बनाता है।

यह बीमारी 2050 तक में सबको पड़ेगी भारी!

eye disease is harmful for health in 2050
eye disease is harmful for health in 2050

आजकल की रोजमर्रा वाली जिंदगी में लोगों को बीमारियां जल्दी पकड़ लेती हैं। ऐसे में जैसे उम्र बढ़ती जाती हैं वैसे वैसे बीमारी बढ़ती जाती है। नई नई बीमारियां इतनी तेजी से पनप रही है जिसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता । कुछ बीमारियां तो दुनिया की आधी आबादी को निगलने को तैयार है। साल 2050 तक दुनिया के आधे से ज्यादा लोग कमजोर आंखों की बीमारी की चपेट में आ जाएंगे।

आंखों की कमजोरी

दूर की नजर हो रही कमजोर आंखों की सेहत से जुड़ी मैगजीन ‘ऑप्थैल्मोलॉजी’ में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक लोगों की दूर की नजर तेजी से कम हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका मुख्य कारण कम्प्यूटर, स्मार्टफोन या टीवी देखते हुए ज्यादा समय बिताना है।

रिपोर्ट में चौंका देने वाले खुलासे

रिपोर्ट में दावा किया गया कि ऐसा रहा तो 2050 तक दुनिया के आधे लोग इस रोग के शिकार हो जाएंगे। दवाओं का गलत मिश्रण खतरनाक शिकागो स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉयस के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया है कि हाल के 5 वर्षों में बुजुर्गों में खतरनाक कॉम्बिनेशन की दवा लेने की प्रवृत्ति बढ़ी है। जैसे क्लोपिडोग्रेल, ओमेप्रेजोल और एस्प्रिन का कॉम्बिनेशन उनकी सेहत के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। ये हार्ट अटैक और अंदरूनी रक्तस्त्राव का खतरा पैदा कर सकते हैं।

कारण

छोटी उम्र में मोबाइल फोन, टेबलेट, कंप्यूटर, वीडियो गेम का ज्यादा इस्तेमाल आंखों को कमजोर बना देता है। बच्चे फिर इन सब चीजों के आदी हो जाते है। सबसे ज्यादा असर अच्छा खान पान न करना है।