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यह खासियत हैं up के cm अखिलेश यादव के हाईटेक रथ में

samajvadi vikas rath
samajvadi vikas rath

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अपने समाजवादी विकास रथ में अपनी सरकार की उपलब्धियों के बखान के लिए प्रदेश की जनता के बीच निकल गए हैं। जिस रथ में मुख्यमंत्री सवार होंगे मसर्डीज बैंज द्वारा निर्मित इस रथ की विशेष खासियतें हैं।

खराब हुआ cm अखिलेश का रथ, गए सरकारी गाडी में

samajvadi vikas rath
samajvadi vikas rath

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का रथ रवाना होने के थोडी देर बाद ही खराब हो गया है। गंतव्य के लिए निकलते ही राजधानी के लोहिया पथ पर खडा हो गया है। इसे दुरुस्त करने का प्रयास किया गया। जब काफी समय तक जब वह ठीक न हो सका तो मुख्यमंत्री सरकारी गाडी पर सवार होकर यात्रा पर आगे बढ गये।

काशी के घाटों और गलियों पर डाला छठ की महक

chhath festival bring good day for dala makers in varanasi
chhath festival bring good day for dala makers in varanasi

वाराणसी। काशी विश्वनाथ की नगरी में लोक आस्था के पर्व डाला छठ (सूर्य षष्ठी) की सुगन्ध फिजाआें में है। पर्व की खुशियों को साझा करने के साथ आस्थावान और महिलाएं इसकी तैयारियों में जुट गयी हैं। छठ व्रत पूजन के लिए जगह- जगह चौराहों और प्रमुख बाजारों में पूजन की सामग्री दउरी,सूप फल गन्ने की दुकाने सज गयी है।

ललकार में दिखी सपा की रार, भतीजे नहीं लिया चाचा का नाम

samajwadi party leader akhilesh yadav and Shivpal yadav
samajwadi party leader akhilesh yadav and Shivpal yadav

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2017 के घोष की शुरूआत सपा ने गुरुवार को रथायात्रा के माध्यम से की। इस दौरान शुरूआत में चाचा शिवपालसिंह यादव ने भतीजे अखिलेश यादव को इस रथयात्रा के लिए बधाई दी हो, लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश के भाषण में परिवार की रार यहां भी नजर आ गई। उन्होंने अपने भाषण में एक बार भी अपने चाचा शिवालसिंह यादव का नाम तक नहीं लिया। शिवपालसिंह यादव इसी कार्यक्रम में मौजूद थे।

छठ के रंग में रंगा उत्तर भारत

Chhath-Parv
Chhath-Parv

सबगुरु न्यूज-पटना। दीपावली बीतने के बाद उत्तर भारत में छठ महापर्व की छटा छाने लगी है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ ही देश भर में जहां भी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग प्रवास कर रहे हैं वहां पर छठ महापर्व की तैयारियों को रंग रूप दिया जा रहा हैं। जहां पर इन दोनों प्रांतों के बांशिंदें काफी संख्या में हैं वहां पर प्रशासन और जहां पर कम संख्या में वहां पर समाज बंधु ही अपनी ही लोक आस्था को जीवंत करने में जुटे हुए हैं।