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सेंसेक्स 88 अंक गिरकर 28091 पर और निफ्टी 8700 के नीचे हुआ बंद

Sensex down 88 points at 28091 and the Nifty closed below 8700
Sensex down 88 points at 28091 and the Nifty closed below 8700

मुंबई। सप्ताह के दूसरे दिन मंगलवार को शेयर बाजार हल्की गिरावट पर बंद हुआ। हालांकि आखिरी घंटे की ट्रेडिंग में लिवाली बढ़ी, जिसके कारण निचले स्तर से एक हद तक रिकवरी हो गई लेकिन निफ्टी 8,700 से ऊपर बंद होने में विफल रहा।

एफएमसीजी, आईटी, मेटल, सरकारी बैंक, ऑटो, कैपिटल गुड्स और तेल-गैस शेयर बिकवाली के दबाव में रहे। इस वजह से सेंसेक्स 87.66 अंक यानी 0.31 फीसदी गिरावट के साथ 28,091.42 पर बंद हुआ। निफ्टी 17.65 अंक या 0.2 फीसदी गिरकर 8,691.3 के स्तर पर रहा। दूसरी तरफ बीएसई के मिडकैप इंडेक्स में 0.3 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.15 फीसदी तेजी रही।

बैंक निफ्टी 0.15 फीसदी बढ़त पर बंद हुआ, लेकिन सरकारी बैंकों का इंडेक्स 0.7 फीसदी गिर गया। एफएमसीजी, आईटी, मेटल और ऑटो इंडेक्स में 0.9-0.5 फीसदी गिरावट दर्ज की गई। लेकिन, फार्मा इंडेक्स में 0.9 फीसदी तेजी रही। बीएसई के कैपिटल गुड्स और तेल-गैस इंडेक्स 0.5 फीसदी टूटे।

अडाणी पोर्ट्स में 9 फीसदी उछाल
महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, गेल, आइडिया सेल्युलर, एचयूएल और ओएनजीसी में 2.7-1.3 फीसदी गिरावट आई। दूसरी तरफ अडाणी पोर्ट्‌स, डॉ. रेड्डीज, भारती इंफ्राटेल, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक की ट्रेडिंग 9.5-1.5 फीसदी उछाल पर बंद हुई।

IS के खिलाफ भीषण जंग के बीच 7000 परिवारों ने छोड़ा मोसुल: संयुक्त राष्ट्र

seven thousand families left Mosul
seven thousand families left Mosul

संयुक्त राष्ट्र। मोसुल में इराकी सेना और खूंखार आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के बीच छिड़ी भीषण जंग के बीच करीब 7000 परिवार शहर छोड़कर दूसरी जगहों पर चले गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के ऑफिस फॉर द कोर्डिनेशन ऑफ ह्यूमेनिटेरियन अफेयर्स के मुताबिक यह संख्या अभी और बढ़ भी सकती है।

मोसुल में चल रही जंग की जानकारी देते हुए संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन डुजेरिक ने बताया है कि यह लोग अपनी जान बचाने के लिए कुछ समय के लिए मोसुल से सुरक्षित ठिकानों में गए हैं, लेकिन जब यहां के हालात काबू में आ जाएंगे तो यह लोग अपने घरों में वापस आ जाएंगे।

यूएन प्रवक्ता के अनुसार मोसुल छोड़कर गए सभी लोंगों को फिलहाल सहायता की दरकार है। उन्होंने बताया कि 18 अक्टूबर और इसके बाद से ही मोसुल से जााने वालों को अल हॉद सहायता प्रदान करा रहा है1 इन सभी लोगों को फिलहाल आईएस के चंगुल से मुक्त हुई जगहों अल खली और अल अदला में रखा गया हैै। यह जगह मोसुल के दक्षिण और दक्षिण पूर्व में स्थित हैं।

स्टीफन ने बताया है कि मोसुल में कुछ दिनों से जारी भीषण जंग के बाद इराकी फौज ने कुछ गांवों को आईएस के चंगुल से मुक्त भी करवा लिया है। फिलहाल आईएस के गढ़ कहे जाने वाले इस मोसुल में सबसे भीषण लड़ाई इसके केंद्र में हो रही है। गौरतलब है कि इराकी फौज को मोसुल पर कब्जा करवाने के लिए अमेरिकी समेत अन्य देशों की सैन्य टुकडि़यां भी लगातार यहां पर इराकी फौज से कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। अमेरिकी फौज यहां पर इराकी फौज को ग्राउंड सपोर्ट प्रदान कर रही है।

WTA रैंकिंग में शारापोवा की वापसी मुमकिन

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Possible return of Sharapova in the WTA rankings
Possible return of Sharapova in the WTA rankings

मॉस्को। महिला टेनिस संघ (डब्ल्यूटीए) ने विश्व की पूर्व सर्वोच्च विश्व वरीयता प्राप्त टेनिस खिलाड़ी शारापोवा को महिला सिंगल्स में अपनी विश्व रैंकिंग से हटा दिया है। डोपिंग की दोषी पाए जाने के बाद प्रतिबंधित चल रहीं शारापोवा पिछले सप्ताह जारी विश्व रैंकिंग में 93वें पायदान पर थीं।

शारापोवा पर शुरू में दो वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन खेल पंचाट ने चार अक्टूबर को उन पर लगा प्रतिबंध घटाकर 15 महीने का कर दिया था। अब शारापोवा अगले साल 26 अप्रैल को प्रतिबंध पूरा कर कोर्ट पर वापसी कर सकेंगी।

रूस टेनिस संघ (आरटीएफ) ने बताया कि शारापोवा अगले साल तीन टूर्नामेंट खेलने के बाद अपने प्रदर्शन के आधार पर महिला सिंगल्स रैंकिंग में शामिल होंगी। उन्होंने रैंकिंग में हासिल होने का कोटा गंवा दिया है।

रैंकिंग में शामिल होने के लिए एक साल में कम से कम तीन टूर्नामेंट खेलने होते हैं और वह यह नहीं कर पाईं। शारापोवा दिसंबर में फ्रेंच ओपन विजेता स्पेन की गारबाइन मुगुरुजा के खिलाफ मैड्रिड में एक प्रदर्शनी मैच खेलने वाली हैं। इस दौरान शारापोवा को कई मेजर टूर्नामेंटों से दूर रहना पड़ेगा और जब वह वापसी करेंगी उसके बाद फ्रेंच ओपन पहला ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट पड़ेगा।

सेना को दान स्वेच्छा से हो, जबरन नहीं: पर्रिकर

army battle casualty fund is voluntary donation says parrikar
army battle casualty fund is voluntary donation says parrikar

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि सेना को दिया जाने वाले दान स्वेच्छा से होना चाहिए,जबरन नहीं। यह बात उन्होंने राज ठाकरे की पार्टी मनसे द्वारा फिल्म निर्माताओं पर दान देने का दबाव बनाने के संदर्भ में कही। राज ठाकरे के इस मांग की कई लोगों ने आलोचना की है।

गौर हो कि पिछले शनिवार को फिल्म निर्देशक-निर्माता करण जौहर और प्रोड्यूशर गिल्ड के अध्यक्ष मुकेश भट्ट ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज ठाकरे से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद राज ठाकरे ने कहा कि जो भी प्रोड्यूसर पाकिस्तानी कलाकारों को अपनी फिल्मों में काम दे रहे हैं उन्हें दंड के तौर पर कुछ पैसा तो देना पड़ेगा। मैं सुझाव देता हूं कि ऐसी हर फिल्म के लिए 5 करोड़ रुपये आर्मी वेलफेयर फंड में जमा कराए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रोड्यूसरों को यह भी कसम लेनी होगी कि वे फिर कभी पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम नहीं करेंगे।

करण जौहर की फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ को लेकर उस समय विवाद खड़ा हो गया था जब मनसे ने इस फिल्म में पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान को काम देने को लेकर विरोध शुरू कर दिया था। इस फिल्म को तब रिलीज करने की अनुमति दी गई जब फिल्म के निर्माताओं ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे की तीन शर्तो को मान लिया जिसमें सेना कल्याण कोषण में 5 करोड़ रूपये भुगतान करने की बात शामिल है।

हाल में फिल्मकार करण जौहर ने मिलिट्री वेलफेयर फंड को 5 करोड़ रुपये दान देने की घोषणा की। एमएनएस नेता राज ठाकरे ने इसे फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में पाकिस्तानी कलाकारों को काम देने का दंड करार दिया था लेकिन रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक करण जौहर के इस दान को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय अब एक नए नियम पर काम कर रहा है, जिसके तहत मजबूरन दिए गए दान पर रोक लगाना है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह दिया गया दान, इस नेक काम की भावना के खिलाफ है। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘ सभी योगदान (कल्याण कोष) स्वेच्छा से होना चाहिए। जबरन वसूली की अनुमति नहीं है। हम चाहते हैं कि लोग अपनी खुशी से इसमें योगदान करें न कि किसी तरह के दबाव में।’

नवाज सरकार का झूठ आया सामने, लश्कर ने करवाया था उड़ी हमला

lashkar claims responsibility of uri attack
lashkar claims responsibility of uri attack

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में हुए आतंकवादी हमले को लेकर पाकिस्तान सरकार का झूठ सामने आ गया है। नवाज़ शरीफ सरकार यह झूठ तब सामने आया जब पाकिस्तान के गुंजरावाला शहर में आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा ने कई पोस्टर लगाए हैं जिसमें कहा गया है कि वह उन चार में से एक आतंकी का अंतिम संस्कार करेगा, जो भारतीय सेना की 12वीं ब्रिगेड पर हमले में शामिल था, जिसमें 20 जवान शहीद हुए थे।

ये पोस्टर भारत के उन आरोपों के पुख्ता सबूत हैं, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों ने इस हमले को अंजाम दिया है। हालांकि पाकिस्तान सरकार अब तक इससे इनकार करती रही है।

एक अंग्रेजी समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार, उस पोस्टर में एक आतंकी का नाम मोहम्मद अनास बताया गया है, जो अबु सिरका के नाम से जाना जाता था। लश्कर ने अपने पोस्टर में स्थानीय लोगों से उसके लिए होने वाली आखिरी नमाज में शामिल होने की अपील की है।

इस पोस्टर में लश्कर सरगना हाफिज सईद की तस्वीर लगी है, जिसमें बताया गया है कि आखिरी नमाज पंजाब राज्य के गुंजरावाला में गिरजख के पास बड़ा नुल्हा में होगी।

भारत ने उरी हमले के लिए जैश ए मोहम्मद को दोषी बताया है। घटना वाली जगह से पाकिस्तान में बने पेनकिलर्स, सिरिंज, अन्य दवाएं और रेडी टू ईट खाद्य सामाग्रियों के पैकेट मिले थे।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, आतंकियों को घुसपैठ में मदद करने के आरोप में दो लोगों अहसान खुर्शीद और फैसल अवान को गिरफ्तार किया गया है। दोनों लगातार विरोधाभासी बयान दे रहे हैं। हालांकि ऐसा प्रतीत होता है कि उनको आतंकी हमले की जानकारी थी।

गौरतलब है कि 18 सितंबर को उरी में सैन्य शिविर पर हमले को अंजाम दिया गया था, जिसमें सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। जवाबी कार्रवाई में चार आतंकी मारे गए थे। इसके बाद भारत ने आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को बेनकाब करने की अपनी मुहिम तेज कर दी। वहीं, सेना ने पीओके में घुसकर आतंकी शिविरों पर हमला किया, जिसमें सात शिविर ध्वस्त हो गए और 50 आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया।