अलवर। राजस्थान में देहली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नौगांवा थाना क्षेत्र में पुलिया नंबर 85 के पास कथित अवैध वसूली का विरोध करने पर एक ट्रक चालक की बेरहमी से पिटाई का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिसकर्मी चालक को लात-घूंसों और जूतों से मारते नजर आ रहे हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस अधीक्षक ने संबंधित आरोपी सिपाही अनुराग को लाइन हाजिर कर दिया है और इस संबंध में मामले की जांच रामगढ़ के पुलिस उपाधीक्षक पिंटू कुमार को सौंप दी है।
उन्होंने बताया कि लेनदेन जैसा कोई मामला नहीं था और वह युवक वहां पर किसी गाड़ी से लिफ्ट लेने के लिए खड़ा था। वहां पुलिस की गश्त रहती है जो वाहन बिना लेन के चलते हैं उनको समझाया जाता है। ऐसे में वहां कोई वीडियो बनाने को लेकर बात हुई थी। पैसे लेने की कोई बात सामने नहीं आई है फिर भी इस मामले की पूरी जांच की जाएगी।
उधर, जौनपुर निवासी हाकम दिन ने बताया कि उसका भाई राजू ट्रक चालक है और अक्सर पुलिया नंबर 85 के पास ही ट्रकों पर चढ़ता-उतरता है। घटना के दिन वह गांव से दिल्ली जाने के लिए वहां पहुंचा था। इसी दौरान पुलिस मौके पर पहुंची और उसे वहां से जाने से रोका।
परिजनों के अनुसार पुलिसकर्मियों ने राजू से 200 रुपए की मांग की। जब उसने पैसे देने से इन्कार किया, तो पुलिस ने उससे मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि पुलिस ने उसे इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी हालत गंभीर हो गई। पहले उसे स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर अलवर भेज दिया गया। फिलहाल उसका इलाज अलवर के अस्पताल में जारी है।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना स्थल भले ही डीग जिले के सीकरी थाना क्षेत्र में आता हो, लेकिन नजदीक होने के कारण नौगांवा थाना पुलिस वहां पहुंचकर कार्रवाई करती है। ऐसे में दूसरे थाना क्षेत्र में जाकर अवैध वसूली करने के आरोप बेहद गंभीर माने जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। आरोप है कि नौगांवा थाना पुलिस के कुछ कर्मी अक्सर एक्सप्रेस-वे और आसपास के इलाकों में खड़े होकर वाहनों से अवैध वसूली करते हैं। यहां तक कि थाना परिसर के सामने से गुजरने वाले अवैध खनन से भरे डंपरों से भी वसूली किए जाने की बातें सामने आती रही हैं।
कई बार विरोध भी हुआ, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस पूरे मामले में पुलिस विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं वायरल वीडियो के आधार पर जांच की मांग तेज हो गई है।



