चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार ने बुधवार को 234 सदस्यीय विधानसभा में सहयोगी दलों और अखिल भारतीय अन्न द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के बागी विधायकों के समर्थन के साथ आसानी से विश्वास मत जीतकर बहुमत साबित कर दिया।
विजय को यह सफलता तब मिली जब 59 सदस्यीय मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने सदन से बर्हिगमन किया, जबकि अन्नाद्रमुक की सहयोगी चार सदस्यीय पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) और भारतीय जनता पार्टी ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
विजय द्वारा अपनी सरकार में विश्वास व्यक्त करने का प्रस्ताव पेश करने और विभिन्न दलों के नेताओं के बोलने के बाद प्रस्ताव पर मतदान कराया गया। हालांकि दो विकल्प थे लेकिन अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने ध्वनि मत के बजाय सरकार का समर्थन करने वालों की गिनती करने का विकल्प चुना।
सदन के 232 सदस्यों में से 171 सदस्य मौजूद रहे। विजय ने एक सीट से इस्तीफा दिया था और मद्रास उच्च न्यायालय ने एक टीवीके विधायक को विश्वास मत में भाग लेने से रोक दिया था। सदन में विजय ने अन्नाद्रमुक के बागी विधायकों सहित 144 सदस्यों के समर्थन के साथ आसानी से शक्ति परीक्षण जीत लिया, जबकि इसके विरोध में 22 सदस्यों ने मतदान किया और पांच तटस्थ रहे।
प्रस्ताव का समर्थन करने वाले 144 विधायकों में टीवीके के 104 विधायक (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अदालत द्वारा रोके गए एक विधायक को छोड़कर), पांच समर्थक दलों के 13 सदस्य, अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) का एक और शेष अन्नाद्रमुक के बागी विधायक शामिल थे।
विजय के नेतृत्व वाली चार दिन पुरानी सरकार के लिए यह पहली और शानदार जीत है, जिनकी पार्टी 108 विधायकों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी लेकिन बहुमत से पीछे थी। राज्यपाल आरवी अर्लेकर द्वारा सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किए जाने के बाद उन्होंने निर्देशानुसार आवश्यक संख्या जुटाकर अपनी शक्ति साबित की।
विजय द्वारा प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), विदुथलाई चिरूथैगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) सहित समर्थक दलों के नेताओं ने मुख्यमंत्री के पक्ष में बोलते हुए अपना समर्थन दिया ताकि भाजपा को दूर रखा जा सके।
अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के सहयोगी एएमएमके के निष्कासित एकमात्र विधायक कामराज ने कुछ बाधाओं के बीच विजय को अपना समर्थन देने का संकल्प लिया। इसके बाद एक अन्य सहयोगी पीएमके की नेता सौम्या अंबुमणि ने मुख्यमंत्री द्वारा दो सप्ताह के भीतर राज्य के स्वामित्व वाली 717 शराब दुकानों को बंद करने के आदेश सहित कुछ उपायों की सराहना की और घोषणा की कि पीएमके के चार विधायक मतदान से दूर रहे हैं।
विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने सरकार से सभी वर्गों के कल्याण के लिए काम करने का आग्रह किया और कहा कि द्रमुक के 59 सदस्य विधानसभा से बाहर इसलिए बाहार जा रहे हैं कि मुझे पता है कि यह सरकार जीत जाएगी। उन्होंने सरकार से जनता के विश्वास को पूरा करने का आह्वान किया और अपने पार्टी सदस्यों के साथ सदन से बाहर चले गए।
विजय ने अपना संगठन बनाने के दो साल के भीतर चुनावी राजनीति में पहली बार 108 सीटें जीतकर शानदार प्रवेश किया, जिससे द्रविड़ क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हुई और द्रमुक तथा अन्नाद्रमुक के छह दशक पुराने वर्चस्व का अंत हुआ। अभिनेता से नेता बने श्री विजय ने स्वयं दो सीटों पर जीत हासिल की थी।
वर्तमान 107 विधायकों में से विजय के एक सीट छोड़ने के बाद, मद्रास उच्च न्यायालय ने उनके एक विधायक श्रीनिवास सेतुपति को मतदान में भाग लेने से रोक दिया है। उनके निर्वाचन को पूर्व द्रमुक मंत्री केआर पेरियाकरुप्पन ने चुनौती दी थी और डाक मतपत्रों की गिनती में गड़बड़ी का आरोप लगाया था।
मुख्यमंत्री ने हालांकि द्रमुक के सहयोगियों से संपर्क साधा था और पांच दल अपना समर्थन देने के लिए आगे आ गए थे। कांग्रेस ने द्रमुक से अलग होकर टीवीके के साथ गठबंधन किया और अपने पांच विधायकों का समर्थन दिया, जबकि भाकपा, माकपा, वीसीके और आईयूएमएल ने दो-दो विधायकों के साथ बिना शर्त बाहर से समर्थन दिया, जिससे संख्या 119 तक पहुंच गई।
इस संदर्भ में विजय की जीत की संभावनाओं को तब बड़ा बढ़ावा मिला जब अन्नाद्रमुक के बागी विधायकों ने टीवीके सरकार का समर्थन करने के अपने निर्णय की घोषणा की। अन्नाद्रमुक के कुल 47 विधायकों में से 22 सदस्यों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया जबकि 25 बागी विधायकों ने इसका समर्थन किया, हालांकि दूसरे गुट का कहना था कि सभी विधायकों को पार्टी सचेतक के आदेश का पालन करना चाहिए।
तमिलनाडु के राज्यपाल आरवी अर्लेकर ने इससे पहले उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हुए तीन दिनों के भीतर अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था। रविवार को उनके शपथ लेने के साथ ही 1967 के बाद पहली बार राज्य में गैर-द्रमुक और गैर-अन्नाद्रमुक शासन की शुरुआत हुई है।
कार्यभार संभालने के एक दिन बाद सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों ने सदन के सदस्यों के रूप में शपथ ली और अगले दिन अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुए, जिसके बाद आज सदन में बहुमत साबित करने के लिए विश्वास प्रस्ताव लाया गया। विश्वास मत से पहले सत्तारूढ़ टीवीके ने अपने विुगामबक्कम के विधायक आर. सबरीनाथन को सरकार का सचेतक चुना है।
ओएसडी के रूप में रिकी राधन की नियुक्ति का आदेश रद्द
तमिलनाडु सरकार ने मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी-राजनीतिक) के रूप में श्री रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल की नियुक्ति के आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।
राज्य की प्रधान सचिव रीता हरीश ठक्कर द्वारा बुधवार को जारी आदेश के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय से 12 मई को प्राप्त एक आदेश के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। इस आदेश के माध्यम से वेट्रिवेल की नियुक्ति के संबंध में एक दिन पहले यानी 12 मई 2026 को जारी किए गए पिछले आदेश को वापस ले लिया गया है।
फिलहाल इस नियुक्ति को रद्द करने के कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि श्री वेट्रिवेल पहले विजय के ज्योतिषी और उनकी पार्टी टीवीके के प्रवक्ता रहे हैं, जिनकी एक दिन पहले ही ओएसडी के रूप में नियुक्ति हुई थी।



