
सबगुरु न्यूज-सिरोही। पहले गर्मियों की छुट्टी में एक कहावत बहुत प्रचलित रहती थी। मामा के घर जाएंगे दूध मलाई खाएंगे। राजनीति जब से व्यापार और राजनीतिक पार्टिंयां जबसे काॅर्पोरेट या प्राइवेट लिमिटेड फर्म हुई हैं ये कहावत बदल गई। पिण्डवाडा-आबू विधानसभा की एक नगर पालिका में ये कहावत ‘मामा के घर जाएंगे, मामा के बेटे को दूध मलाई खिलाएंगे’ हो गई है। फिलहाल भाजपा के आम कार्यकर्ता ये ही कहावत यहां दोहरा रहे हैं।
– सेवा में जीरो, पद में हीरो
पिण्डवाडा-आबू विधानसभा में भाजपा के जमीन से जुडे कार्यकर्ताओं में गुस्सा पनप रहा है। वो ये कि जिन लोगों ने पिछले कई सालों से संगठन के लिए पसीने की एक बूंद नहीं बहाई उन लोगों को संगठन के नेता इसलिए नगर पालिका का टिकिट दिलवाने के लिए आतुर हैं कि उस नगर पालिका के पालिकाध्यक्ष का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है। तो पिण्डवाडा आबू के एक नेताजी इसलिए यहां की धनाढ्य नगर पालिका में अपने मामा के बेटे के लिए टिकिट लेने के लिए उत्सुक है कि वो यहां पर पालिकाध्यक्ष बन जाएं और वो पिण्डवाडा ग्रामीण के साथ यहां पर भी अपना दबदबा बना सके। कार्यकर्ताओं का कहना है कि मामा के बेटे भले ही संगठन के लिए सडक पर उतरकर कभी पसीना नहीं बहाया हो, लेकिन, नेताजी का प्रेम ऐसा कि वो संगठन के लिए दिन रात एक करके लगे रहने वाले कार्यकर्ताओं की बजाय संगठन की सेवा में जीरो रहे मामा के बेटे को इसलिए जगह दिलवाना चाहते हैं कि शहर में दबदबा रहे और मामा का बेटा पद का हीरो बन जाए।
– चुनाव टालने से कम हुई कांग्रेस की एंटी इंकम्बेंसी
आबू-पिण्डवाडा विधानसभा के ग्रामीण इलाके से आकर विधानसभा के इस निकाय में सालों तक संगठन के लिए चप्पल घिस रहे नेताओं को दरकिनार करने की ये नीति भाजपा में अंदर खाने विरोध पनपा रही है। जो हालात हैं उससे कार्यकर्ता ये कयास लगा रहे हैं कि मामाजी के बेटे की लाॅन्चिंग निकाय में संगठन को अनलाॅन्च न कर दे। यूं भी इस निकाय में डेढ साल से चुनाव टालते हुए यहां तैनात प्रशासक तैनात करने से उस समय की कार्यप्रणाली से इस निकाय में कांग्रेस की एंटी इंकम्बेंसी को लगभग कम कर दी है। प्रशासककाल का गुस्सा जनता में भाजपा पर अभी भी हावी है।
ऐसे में मामाजी के बेटे को पालिकाध्यक्ष बनाने का जुनून कांग्रेस के टिकिट का सही चयन पर इस वार्ड ही क्या पूरे निकाय क्षेत्र में आम लोगों और सामान्य कार्यकर्ता में असंतोष पनपाएगा। हाल ही की पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा ने वैसे भी प्रशासक काल को भ्रष्टाचार का चरम काल बताया था। जो सबसे बड़ा आरोप लग रहा है वो ये कि मामाजी के बटे को दिक्कत नहीं हो इस कारण इस सीट पर भाजपा के प्रमुख दावेदारों को आवेदन ही नहीं होने दिया गया। उनका या तो आवेदन दूसरे वार्ड से करवा दिया गया या फिर मजबूत पैनल के तीन नामों के हिसाब से कमजोर नाम शामिल कर दिए गए।


