सिरोही में कांग्रेस का शंखनाद और सेनापति की सेना तक नहीं


परीक्षित मिश्रा
सबगुरु न्यूज-सिरोही। युद्ध की तैयारी और जिलाध्यक्ष के पास अपने सेनापति तक नहीं। सिरोही जिले में कांग्रेस के यही हाल हैं। यहां के जिलाध्यक्ष आनन्द जोशी की नियुक्ति हुए पांच महीने से ज्यादा का समय बीत गया है। उन्होंने अभी तक जिला कार्यकारिणी तक घोषित नहीं की है।

प्रदेश में सिरोही ही शायद ऐसा जिला होगा जहां के जिलाध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं को कोई पद नहीं देने के अशोक गहलोत मॉडल को अपनाया हुआ है। विधानसभा चुनाव बिना जिला कार्यकारिणी के लड़ लेने वाले कांग्रेस जिलाध्यक्ष विधानसभा चुनाव बीत जाने के बाद भी अपनी कार्यकारिणी घोषित नहीं कर पाए हैं। जबकि एकाध महीने में कभी भी लोकसभा चुनावों की घोषणा हो सकती है।
-अहसान उतारने के चक्कर में जिला संगठन बना कटी पतंग
आनन्द जोशी जब जिलाध्यक्ष बने थे तो बड़ी चतुराई से आभार जताने के लिए होर्डिंग लगे थे। इन होर्डिंगों में अलग अलग क्षेत्रों के अनुसार अलग-अलग नेताओं के प्रति आभार जताया गया था। आबूरोड शहर में संयम लोढ़ा, नीरज डांगी और रतन देवासी तीनों की आवाजाही रहती है तो आबूरोड में लगे होर्डिंग्स में तीनों का आभार जताया गया। वहीं सिरोही पहुंचते पहुंचते रतन देवासी छूट गए और होर्डिंग का आभार संयम लोढ़ा और नीरज डांगी तक सीमित रह गया।

सूत्रों के अनुसार चुनाव नजदीक आने और नीरज डांगी व संयम लोढ़ा दोनों के चुनाव के दौरान कार्यकर्ताओं को नाराज नहीं करने की मंशा से इसे टाला गया। ये माना जा रहा था कि आनन्द जोशी को लोढ़ा और डांगी की संयुक्त सहमति से अध्यक्ष बनाया गया। लेकिन, आनन्द जोशी को जिलाध्यक्ष बनाने के लिए लोढ़ा और डांगी की जो मंशा थी वो दोनों ही फेल हो गई।

लोढ़ा ने सिरोही विधानसभा के ब्राह्मण मतदाताओं को पक्ष में करने तो डांगी ने रेवदर विधानसभा से अपना टिकिट करवाने की रणनीति के तहत आनन्द जोशी की नियुक्ति पर सहमति जताई थी। लेकिन, आनन्द जोशी के सिर एक बड़ी सफलता लगी। पिछले दो दशकों से रेवदर विधानसभा में हार का स्वाद चख रही कांग्रेस को जीत उनके कार्यकाल में मिल गई।
-जालोर जिलाध्यक्ष निकले ज्यादा तेज
जालोर और सिरोही में कांग्रेस ने जुलाई 2023 में एकसाथ जिलाध्यक्षों की घोषणा की थी। सिरोही कांग्रेस जिलाध्यक्ष आनन्द जोशी से ज्यादा तेज जालोर-सिरोही लोकसभा क्षेत्र के जालोर जिले के जिलाध्यक्ष भंवरलाल मेघवाल निकले। उन्होंने विधानसभा चुनावों से पहले ही 71 लोगों की जिला कार्यकारिणी की घोषणा कर दी थी। लेकिन, सिरोही जिलाध्यक्ष नवम्बर में विधानसभा चुनावों से पहले तक जिला कार्यकारिणी की घोषणा नहीं कर पाए थे और बिना जिला कार्यकारिणी के ही चुनावों में चले गए।

सिरोही विधायक संयम लोढ़ा की हार की एक वजह ये भी थी कि पुरानी कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को उन्होंने न तो कोई पद मिलने दिया और न ही चुनावों से पहले उनमें विश्वास जताया, बस एकला चलो की रणनीति पर चले और पाली संभाग में अपने ही कार्यकर्ताओं के असहयोग के कारण इस चुनाव में सभवत: सबसे ज्यादा वोटों से हारने वाले कांग्रेस के प्रत्याशी में शुमार हो गए।

इनका कहना है….
मैने विधानसभा चुनाव से पहले ही 71 लोगों की कार्यकारिणी को स्वीकृति के लिए भेजा था। तब उसे बाद में करने के निर्देश दिए थे। एक महीने पहले फिर से भेजी है। जल्द ही कार्यकारिणी की घोषणा हो जाएगी।
आनन्द जोशी
कांग्रेस जिलाध्यक्ष, सिरोही।